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बहुत बड़ी खुलासा, CPEC की आड़ में 5 साल से चीन-PAK मिलकर बना रहे जैविक हथियार

 

दिव्या तिवारी, नई दिल्ली । चीन की वुहान लैब पाकिस्तान के साथ मिलकर पिछले पांच सालों से खतरनाक जैविक हथियारों पर प्रयोग कर रही है. चीन और पाकिस्तान अपने इकोनॉमिक कॉरिडोर और सड़क निर्माण के नाम पर दुनिया को धोखा दे रहे हैं. ये दोनों देश एक साथ मिलकर बायो वेपन यानी जैविक हथियार बनाने में लगे हुए हैं. इस बात का खुलासा एक ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट द क्लाक्सोन ने किया है. द क्लाक्सोन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि चीन और पाकिस्तान की सेना ने पिछले महीने चुपके से तीन साल की डील की है. इस डील के तहत वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में संभावित जैविक हथियारों को विकसित करने का समझौता भी शामिल है. इसके साथ ही यह खुलासा भी हुआ है कि वुहान स्थित लैब पाकिस्तान के साथ साल 2015 से ही खतरनाक बैक्टीरिया-वायरस पर प्रयोग कर रही है. वुहान और पाकिस्तान के वैज्ञानिकों ने अब तक पांच स्टडीज की है. इन स्टडीज को साइंटिफिक पेपर्स में भी प्रकाशित कराया गया है. सभी स्टडीज में zoonotic pathogens यानी पशुजन्यरोग की खोज और लक्षण के बारे में चर्चा की गई है. zoonotic pathogens की वजह से ऐसी संक्रामक बीमारियां होती हैं जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं. जैसे अभी कोरोना वायरस फैला हुआ है.
एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि इन पांचों स्टडीज में कई घातक और संक्रामक बीमारियों के जीनोम सिक्वेंसिंग के बारे में भी लिखा है. ये बीमारियां हैं- वेस्ट नाइल वायरस मर्स कोरोना वायरस क्रिमियन-कॉन्गो हेमोरेजिक फीवर वायरस द थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम वायरस और चिकनगुनिया वायरस साल 2018 में पाकिस्तान की सरकार CPEC से पीछे हटना चाहती थी लेकिन पाकिस्तान की सेना जो वहां ज्यादा ताकतवर है, उसने डील रद्द करने से मना कर दिया. पाकिस्तान की सेना ने कहा कि वह हर कीमत पर इस समझौते को जारी रखना चाहती है.चीन के वुहान लैब में पाकिस्तानी वैज्ञानिकों को जैविक हथियारों के विकास, संचालन और प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जा रही है. ताकि ये भविष्य में अपने देश में ही जैविक हथियारों का जखीरा बना सकें
वुहान लैब ने पाकिस्तानी सेना के डिफेंस एंड टेक्नोलॉजी ऑ़र्गेनाइजेशन (DESTO) के साथ समझौता किया है जिसमें इसके वैज्ञानिक तेजी से फैल रहे संक्रामक रोगों पर अध्ययन करेंगे. ताकि इन बीमारियों को रोका जा सके. लेकिन यह सच नहीं दिखता..

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