2 सितंबर से पितृ पक्ष श्राद्ध आरंभ :- आचार्य राधाकान्त शास्त्री
आश्विन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से पितृ पक्ष श्राद्ध आरंभ होता है।
आराकाशा के अध्ययन ग्रंथों के अनुसार, इस वर्ष 2 सितंबर को पूर्णिमा को ऋषि तर्पण और प्रतिपदा श्राद्ध करने उत्तम होगा । इसके साथ ही पितृ पक्ष श्राद्ध आरंभ हो जाएगा जो 17 सितंबर तक चलेगा।
पितृ पक्ष पितरों का याद करने का समय माना गया है। पितर 2 प्रकार के होते हैं एक दिव्य पितर और दूसरे पूर्वज पितर।
दिव्य पितर ब्रह्मा के पुत्र मनु से उत्पन्न हुए ऋषि हैं।
पितरों में सबसे प्रमुख अर्यमा हैं जिनके बारे में गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि पितरों में प्रधान अर्यमा वे स्वयं हैं। आराकाशा के अध्ययन ग्रंथों के अनुसार दूसरे प्रकार के पितर पूर्वज होते हैं। पितृपक्ष में अपने इन्हीं पितरों को लोग याद करते हैं और इनके नाम से जल दान या पिंडदान, दान , श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन करवाते हैं। कठोपनिषद्, गरुड़ पुराण, मार्कण्डेय पुराण के अनुसार पितर लोग अपने परिजनों के पास पितृपक्ष श्राद्ध के समय आते हैं और अन्न जल एवं आदर की अपेक्षा करते हैं। जिन परिवार के लोग पितृ पक्ष के समय पितरों के नाम से अन्न दान, जल दान नहीं करते , श्राद्ध कर्म नहीं करते हैं उनके पितर भूखे-प्यासे धरती से लौट जाते हैं इससे परिवार के लोगों को पितृ दोष लगता है। इसे पितृ शाप भी कहते हैं। इससे घर मे तरक्की में बाधा, एवं संतान सुख में बाधा आती है। परिवार में रोग शोक, कर्ज और कष्ट बढ जाता है।
पितृ पक्ष के नियम :-
पितृ पक्ष में जिन तिथियों में पूर्वज यानी पिता, दादा, परिवार के लोगों की मृत्यु हुई होती है उस तिथि को उनके लिए विशेष श्राद्ध एवं दान किया जाता है। इस श्राद्ध का नियम है कि दोपहर के समय पितरों के नाम से जल दान या श्राद्ध और ब्राह्मण भोजन करवाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार देवताओं की पूजा सुबह में और पितरों की दोपहर में करने का विधान है, पूर्वाह्णे मातृकं श्राद्धमराह्णे तु पैतृकम। एकोदि्दष्टं तु मध्याह्णे प्रातर्वृद्धि निमित्तकम्।।
अतः जिनके माता पिता नही हैं वे सब अपने पीतरों के लिए जलदान अवश्य करे ।
इस वर्ष आश्विन कृष्ण प्रतिपदा को द्वितीया श्राद्ध करना है और द्वितीया को अवकाश है
पुनः तृतीया से क्रमशः सब सही हो जा रहा है, ऐसे में सामान्य लोगों को थोड़ा उलझन है, किन्तु ऊपर यह स्पष्ट है ।
आराकाशा के अध्ययन ग्रंथों के नियम के अनुसार जिस दिन दोपहर के समय अधिक समय तक जो तिथि व्याप्त हो उस दिन ही उसी तिथि का श्राद्ध किया जाना चाहिए।
इस वर्ष पितृपक्ष में श्राद्ध की तिथियां निम्न प्रकार है-
2 सितंबर बुधवार प्रोष्ठपदी/पूर्णिमा और प्रतिपदा श्राद्ध
3 सितंबर गुरुवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध
5 सितंबर शनिवार तृतीया तिथि का श्राद्ध
6 सितंबर रविवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
7 सितंबर सोमवार पंचमी तिथि का श्राद्ध
8 सितंबर मंगलवार षष्ठी तिथि का श्राद्ध
9 सितंबर बुधवार सप्तमी तिथि का श्राद्ध
10 सितंबर गुरुवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध
11 सितंबर शुक्रवार नवमी तिथि का श्राद्ध
12 सितंबर शनिवार दशमी तिथि का श्राद्ध
13 सितंबर रविवार एकादशी का श्राद्ध
14 सितंबर सोमवार द्वादशी तिथि/संन्यासियों का श्राद्ध
15 सितंबर मंगलवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
16 सितंबर बुधवार चतुर्दशी का श्राद्ध
17 सितंबर गुरुवार अमावस्या व सर्वपितृ श्राद्ध
इस पितृपक्ष में सबके सभी पितरों के आशीर्वाद से सबके कुल वंश की वृद्धि हो और सबके घर का रोग, शोक, ऋण एवं सभी शत्रुओं का विनाश हो, सबके घर मे सुख शांति, सन्मति, संपत्ति एवं प्रसन्नता की वृद्धि हो, आचार्य राधाकान्त शास्त्री ,


