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केन्द्र द्वारा हस्तक्षेप होने के बाद कर्णाली प्रदेश के मुख्यमन्त्री शाही का पद सुरक्षित

 
महेन्द्रबहादुर शाही, फाईल तस्वीर

काठमांडू, १३ अक्टूबर । कर्णाली प्रदेश में एकल पार्टी की सरकार है, जो दो तिहाई बहुमत में भी है । लेकिन कर्णाली प्रदेश सरकार के विरुद्ध पार्टी के ही असंन्तुष्ट पक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसके चलते मुख्यमन्त्री महेन्द्र बहादुर शाही का पद संकट में पड़ गया था । लेकिन केन्द्रीय स्तर से हस्तक्षेप होने के बाद उनका पद सुरक्षित रह गया है ।
नेकपा संबंद्ध १८ प्रदेशसभा सदस्य की ओर से मुख्यमन्त्री शाही के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पंजीकृत की गई थी । उसका तरंग काठमांडू में भी अच्छी तरह पड़ गई । सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के भीतर रहे महत्वपूर्ण तीन समूह (गुट) के बीच आपसी विमर्श के बाद काठमांडू से ही टेलिफोन मार्फत अविश्वास प्रस्ताव को आगे ना बढाÞने के लिए कहा गया है ।
कर्णाली प्रदेश में अविश्वास प्रस्ताव पेश होते ही केन्द्रीय तीन गुट (केपीशमा ओली, पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड और माधव नेपाल) बीच दौड़धूप शुरु हो गई थी । कर्णाली में असंतुष्ट रहे समूह केन्द्र के ओली समूह के हैं । और मुख्यमन्त्री प्रचण्ड समूह के हैं । पिछली बार प्रचण्ड समूह नेपाल समूह के करीबी हैं । यह तीनों नेताओं के बीच इसी विषय को लेकर सोमबार और मंगलबार कई चरण में भेटवार्ता हो गई । अन्ततः प्रधानमन्त्री भी रहे ओली ने अपने समूह को यूटर्न होने के लिए कहा है । सहमति अनुसार अब प्रदेश में मन्त्रिपरिषद् पुनर्गठन किया जाएगा । पुनर्गठित मन्त्रिपरिषद् में असंतुष्ट समूह को भी शामील की जाएगी ।

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