Wed. Oct 28th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

#नवरात्रि का 7वां दिन, कैसे करें मां सरस्वती का आह्वान? पढ़ें ये विशेष मंत्र, करें यह उपाय

 

दुर्गा पूजा से राहु के सभी अनिष्ट समाप्त होते हैं। राहु के लिए इष्ट देवी मां सरस्वती को माना गया है। लाल किताब में दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय का पाठ राहु का अचूक उपाय बताया गया है। मां को अति प्रिय नारियल भी राहु का ही प्रतीक है।

नवरात्रि में कैसे करें राहु को अनुकूल, करें यह उपाय

1. नवरात्रि में कलश के पास एक नारियल जरूर रखें।
2. नर्वाण मंत्र ‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ का शाम को प्रतिदिन 108 बार जप करें। दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

3. मां सरस्वती को नीले पुष्प अर्पित करें।

4. राहु बीज मंत्र- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम: का जप करें।

यह जप काले हकीक की माला पर दक्षिण-पश्चिम दिशा की तरफ मुख कर करें।

यह भी पढें   शरद पूर्णिमा पर पन्ना में रातभर चला महारास ! डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट

5. सप्तमी तथा दुर्गाष्टमी के दिन शाम को दुर्गा चालीसा, दुर्गा कवच, अर्गलास्तोत्र, कीलक स्तोत्र आदि सहित दुर्गा सप्तशती का विधिपूर्वक संपूर्ण पाठ करें। पाठ खत्म होने के पश्चात हवन करें। नीले पुष्प, सुपारी, पान, कमल गट्टा, जायफल, लौंग, छोटी इलायची, जौं, काले तिल, काली मिर्च, गूगल, शहद, घी की आहुति दें। हवन में ‘ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र की 108 आहुति, ‘ॐ छौं छीं छौं स: राहवे स्वाहा’ मंत्र की सूखी हुई दूब से 108 आहुति जरूर दें। अंत में नारियल की पूर्ण आहुति दें। अगर आपको विधि-विधान का पता नहीं तो किसी योग्य पंडित से कराएं।

नवरात्रि में विद्यार्थी क्या करें :-

नवरात्रि सभी के लिए महत्व रखती है। इन नौ पवित्र दिनों में विद्यार्थियों को माता सरस्वती की आराधना अवश्य करनी चाहिए। जो लोग सरस्वती के कठिन मंत्र का जप नहीं कर सक‍ते उनके लिए प्रस्तुत है मां सरस्वती के सरल मंत्र। नवरात्रि में इस मंत्र जप का आरंभ करने और आजीवन इस मंत्र का पाठ करने से विद्या और बुद्धि में वृद्धि होती है।

यह भी पढें   नेपाल प्रीमियर लीग के विजेता को मिलेंगे डेढ़ करोड़ रुपये

* ‘ॐ शारदा माता ईश्वरी मैं नित सुमरि तोय हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोय।’
– मां सरस्वती का सुप्रसिद्ध मंदिर मैहर में स्थित है। मैहर की शारदा माता को प्रसन्न करने का मंत्र इस प्रकार है।

* ‘शारदा शारदांभौजवदना, वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकमं सन्निधिमं सन्निधिमं क्रियात्।’

– शरद काल में उत्पन्न कमल के समान मुखवाली और सब मनोरथों को देने वाली मां शारदा समस्त समृद्धियों के साथ मेरे मुख में सदा निवास करें।
* सरस्वती का बीज मंत्र ‘क्लीं’ है। शास्त्रों में क्लींकारी कामरूपिण्यै यानी ‘क्लीं’ काम रूप में पूजनीय है।

यह भी पढें   चितवन में तीन महीने में 3,062 लोगों को वंशज के आधार पर मिली नागरिकता

नीचे दिए गए मंत्र से मनुष्य की वाणी सिद्ध हो जाती है। समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाला यह मंत्र सरस्वती का सबसे दिव्य मं‍त्र है।

* सरस्वती गायत्री मंत्र : ‘ॐ वागदैव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्‌।’

इस मंत्र की 5 माला का जाप करने से साक्षात मां सरस्वती प्रसन्न हो जाती हैं तथा साधक को ज्ञान-विद्या का लाभ प्राप्त होना शुरू हो जाता है। विद्यार्थियों को ध्यान करने के लिए त्राटक अवश्य करना चाहिए। 10 मिनट रोज त्राटक करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। एक बार अध्ययन करने से कंठस्थ हो जाता है।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com