नेपाली जनता आशुरी शक्ति और भष्माशुरी प्रवत्ति से उन्मुक्ति चाह रही है : पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह
आज पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह ने दशमी की शुभकामना संदेश जारी करते हुए ब्यवस्था – ब्यवस्थापन और ब्यवस्थापक पर कडा प्रतिक्रिया जनाते हुए गम्भीर असंतोष एवं असंतुष्टी व्यक्त की है,
“नेपाली जनता आशुरी शक्ति और भष्माशुरी प्रवत्ति से उन्मुक्ति चाह रही है”, प्रेस वक्तव्य मे आगे कहा गया है कि, नेपाल मे अभी अपराधिक गतिविधीयाँ और पिशाच प्रवृत्ति चरम उत्कर्ष पर है और बढते आशुरी एवं भष्माशुर प्रवृत्ति से आम नेपाली जनता उन्मुत्ति चाह रही है !
काेरोना संक्रमित का यथोचित उपचार सरकार द्वारा न कर पाने के संदर्भ मे भी राजा ज्ञानेन्द्र द्वारा आक्राेश व्यक्त किया गया है साथ ही कहागया है कि देश और आम जनता अभिभावक बिहिन राज्य की अनुभूति कर रही है, बेरोजगारी, कुब्यवस्था चरम पर है और शासन प्रणाली, मौलिकता, धर्म, परम्परा सभी ध्वस्त किया जारहा है ।
राजा ज्ञानेन्द्र के शुभकामना संदेश मे आगे कहागया है कि, ‘जनता रहेगी तबमात्र राज्य बचेगा और राज्य रहेगा तबमात्र राजनीति बचेगी” ।
आपसी समन्वय, सदभाव और सहकार्यको छोडकर जब हम व्यक्तिबाद, समूहबाद तर्फ उन्मुख होंगे तब स्थिर, सुदृढ और सन्तोषजनक राष्ट्रिय परिणाम प्राप्त होना असम्भव होगा ।
राजा द्वारा सन्देश मे अभिका महंगी, काला बजारी तथा अत्यावश्यक वस्तुयों कि अभाव, भोकमरी, आत्महत्या, बलात्कार प्रति भी चिन्ता व्यक्त किया गया है !
राजा ज्ञानेन्द्र द्वारा जारी शुभकामना संदेश एवं ब्यवस्था – ब्यवस्थापन और ब्यवस्थापक प्रतिका आक्रोश को जनतान्त्रिक तराई मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रिय अध्यक्ष डा. मनोज मुक्ति “विवेक” द्वारा स्वागत एवं समर्थन किया गया है !

