2021 बदलेगा सिर्फ अंक, तारीख और कैलेन्डर : श्वेता दीप्ति
हर चेहरे पर एक दर्द देकर
जाता यह साल
याद रखेंगी कई पीढियाँ
इस साल से हुई तबाही को ।
अपनों के खोने का दर्द
सपनों के टूटने का दर्द
हर सुबह मौत के आँकड़ों को
सहन करने का दर्द
भूख और बेबसी का दर्द
इस दर्द के साक्षी बनते हम
नहीं जानते कब तक सुरक्षित हैं
कल की सुबह से अन्जान हम
एक उम्मीद के साथ
आने वाले कल का इंतजार कर रहे
जबकि एक नया डर दस्तक दे चुका है
पर जीने से पहले मर नहीं सकते
और मरने से पहले जीना छोड़ नहीं सकते
बदलेगा सिर्फ अंक, तारीख और कैलेन्डर
जानते हुए भी कि जो बिखरा है
उसे संवारना इतना आसान नहीं
फिर भी आँखों में एक आस
एक उम्मीद को सजाए
आगे बढ़ने की ललक के साथ
आइए स्वागत करें एक और
दस्तक देता नववर्ष का
सब सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
ईश्वर की कृपा बनी रहे ।



