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भारत माता के माथे की बिंदी : मंजू उपाध्याय

 
भारत माता के माथे की बिंदी

आओ बहन सीखें हिंदी,
हिंदी देश  के माथे की बिंदी।
जन-जन तक इसको पहुचाएं ,
आओ इसे पहचान दिलाएं।
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा ,
इसे बनाएं हम जन-जन की भाषा।
हम सब इसके हैं अधिकारी ,
भाषा कितनी है प्यारी- प्यारी।
भारत की पहचान है हिंदी,
हम सब की शान है  हिंदी। 
हम सब की पहचान है हिदी,
भारत  को विश्व गुरु बनाना है
हिंदी को आगे बढ़ाना  है।
यह विश्व भाषा बन रही है
नित नए रूप  में संवर  रही है।
आने वाला समय  है उसका 
नयी तकनीक  में वर्चस्व  है जिसका
आओ हिंदी के दिन  फिराएं  
देश  को आत्मनिर्भर बनाएं
मंजू उपाध्याय_ शोधार्थी_
हिंदी विभाग_
मुंबई विश्वविद्यालय_
मुंबई-400098_

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