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सत्ता के प्रति लालची व्यक्ति को सत्ता में पहुँचने से रोकने के लिए संसद् बिघटनः प्रधानमन्त्री ओली

 
केपीशर्मा ओली, फाईल तस्वीर

काठमांडू, १० दिसम्बर । प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने कहा है कि संसद् बिघटन कर चुनावी तिथि घोषणा करना उनकी कोई भी गलती नहीं है । उनका यह भी मानना है कि अगर गलती है तो जनता की अदालत अर्थात् चुनाव में खड़ा होकर उसका समना करने के लिए तैयार हैं । आइतबार आयोजित राष्ट्रीयसभा बैठक को सम्बोधन करते हुए और सभी राजनीतिक पार्टी को चुनाव में सहभागी होने के लिए आग्रह करते हुए प्रधानमन्त्री ओली ने ऐसा कहा है ।
सभा को सम्बोधन करते हुए प्रधानमन्त्री ओली ने कहा– ‘कुछ लोग कहते हैं कि संसद् बिघटन असंवैधानिक और अलोकतान्त्रिक है । लेकिन जिम्मेवारी बोध के साथ मैंने संसद् को बिघटन किया है । लोकतन्त्र प्राप्ति के लिए जनता ने जो बलिदान किया है, उसको देखकर ही सत्ता के प्रति लालची व्यक्ति को सत्ता में जानेसे रोकने के लिए ही मैंने संसद् को बिघटन किया है ।’ उन्होंने आगे कहा– ‘अगर मैंने गलती की है तो जनता ही मुझे सजा देगी, जनता की अदालत चुनाव है, इसीलिए सभी मिलकर चुनाव में सहभागी होना चाहिए ।’
प्रधानमन्त्री ओली ने यह भी कहा है कि संसद् बिघटन और चुनाव की तिथि घोषणा से राजनीतिक अस्थिरता भी होनेवाला नहीं है । उन्होंने आगे कहा– ‘संवैधानिक रास्ते पर चलने से अस्थिरता आनेवाली नहीं है । अस्थिरता तो तब होगी, जब बाह्य शक्ति के सामने देश के भीतर रहे शक्ति संचालित होती है, राष्ट्रीय राजनीति को अस्थिरता की ओर ले जाते हैं, निर्वाचित प्रधानमन्त्री को काम करने से रोका जाता है ।’ उन्होने आगे कहा– ‘आज स्थिरता की स्थिति है, चाहकर भी मुझे वे लोग प्रधानमन्त्री से नहीं हटा सके । संसद् बिघटन ने ही अस्थिरता को रोक दिया है ।’
संसद् पुनस्र्थापना संबंधी माग लेकर आन्दोलन करनेवालों की ओर संकेत करते हुए प्रधानमन्त्री ओली ने कहा कि वे लोग अदालत को अनावश्यक दबाव दे रहे हैं और अदालत को स्वतन्त्र ढंग से काम करने के लिए रोक रहे हैं ।

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