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कोरोनाः भारत दयालु महाशक्ति : डॉ. वेदप्रताप वैदिक

 

 

*डॉ. वेदप्रताप वैदिक* गणतंत्र दिवस पर भारत गर्व कर सकता है कि कोरोना के युद्ध में वह वैश्विक स्तर पर दयालु महायोद्धा सिद्ध हो रहा है। पिछले हफ्ते जब मैंने लिखा था कि भारत में बने कोरोना के दो टीके उसकी विश्व-छवि को चमकाएंगे तो एक-दो विपक्षी नेताओं को लगा कि मैं पता नहीं क्यों सरकार को अनावश्यक श्रेय दे रहा हूँ। वास्तव में यह सरकार को नहीं, भारत को श्रेय है। भारत के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को श्रेय है। लेकिन सरकार को तो श्रेय अपने आप मिल रहा है। उसके दो कारण हैं। एक तो यह टीका पिछले एक सप्ताह में जितने लोगों को लगा है, उतना इतने कम दिनों में किसी देश के लेागों को नहीं लगा है। अमेरिका के लोगों को भी नहीं, यूरोपीय देशों और चीन के लोगों को भी नहीं। पहले 6 दिन में 10 लाख लोगों को यह टीका किस देश के लोगों को लगा है ? यदि सरकार सैकड़ों टीका-केंद्रों और हजारों स्वास्थ्यकर्मियों को पहले से तैनात नहीं करती तो क्या यह संभव था ?

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दूसरी खूबी हमारे टीके की यह है कि यह दुनिया का सबसे सस्ता और सुलभ है। दुनिया के संपन्न और उन्नत देशों में यह टीका 7 से 10 हजार रु. मूल्य का है तो भारत में इसकी कीमत 250 या 300 रु. है। इससे भी बड़ी बात यह कि स्वाथ्यकर्मियों के लिए यह मुफ्त है। सरकार इस प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है कि 30 करोड़ वृद्धजन और असमर्थ लोगों को भी यह मुफ्त में दिया जा सके। इस टीके से दुनिया में भारत की छवि में भी चार चांद लग रहे हैं।

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भारत के ऐसे पड़ौसी देश, जिनकी नेता आजकल चीन की दाढ़ी सहला रहे हैं, उन्हें भी भारत ने लाखों की संख्या में टीके भेज दिए हैं। इन देशों के जो भी नागरिक यह भारतीय टीका लगवाकर खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे, जरा उनसे पूछिए कि भारत के लिए उनकी भावना क्या होगी ? यह टीका सिर्फ पड़ौसी देशों तक ही नहीं, मोरिशस और सेशेल्स तक ही नहीं बल्कि ब्राजील, मोरक्को और अफ्रीकी देशों तक भी पहुंच रहा है। कोई आश्चर्य नहीं कि इधर इमरान खान का फोन आया नहीं कि पाकिस्तान को भी यह टीका मिल जाए।

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पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में जब भी प्राकृतिक विपदाएं आई हैं, आपसी राजनीतिक रंजिशों को भुलाकर भारतीय प्रधानमंत्रियों ने उनकी सहर्ष सहायता की है। यही भारतीय संस्कार है। अमेरिका और चीन अपने आप को चाहें महाशक्ति कहें लेकिन कोरोना के दौरान भारत एक दयालु महाशक्ति की तौर पर उभर रहा है, इसमें जरा भी शक नहीं है।

डॉ. वेदप्रताप वैदिक,
Most Senior Journalist

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