Wed. Jun 24th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

जानिए क्यों बाँधते हैं कलाई पर मोली, क्या गुण है इस लाल धागे का

 

 

कलाई पर लाल धागा, मौली, नाड़ा बांधने की पुरानी परंपरा है। इस लाल धागे को रक्षासूत्र भी कहा जाता है। इसके बिना पूजा पूरी नहीं मानी जाती है। जब भी कलाई पर ये धागा बनवाते हैं तो अपने मंत्रों का जाप भी किया जाता है। कलाई पर मौली बांधने से धर्म लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है।

मौली का शाब्दिक अर्थ है सबसे ऊपर, इसका अर्थ सिर से भी है। शंकर भगवान के सिर पर चंद्रमा विराजमान है, इसीलिए शिवजी को चंद्रमौलैश्वर भी कहा जाता है। मौली बांधने की प्रथा तब से चली आ रही है, जब दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए वामन भगवान ने उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था।

यह भी पढें   सद्भाव के लिए योग: भारत के महावाणिज्य दूतावास, वीरगंज ने शंकराचार्य गेट पर 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया

मौली बांधने से दूर होते हैं त्रिदोष-

कलाई पर मौली वहां बांधी जाती है, जहां से आयुर्वेद के जानकार वैद्य नाड़ी की गति पढ़कर बीमारी का पता लगाते हैं।
इस जगह पर मौली बांधने से पल्स पर दबाव बना रहता है और हम त्रिदोषों से बच सकते हैं।

इस धागे से दबाव से त्रिदोष यानी कफ, वात और पित्त से संबंधित तीन तरह की बीमारियां कंट्रोल हो सकती है।

कफ यानी सर्दी-जुकाम और बुखार से जुड़ी बीमारियां, वात यानी गैस, एसीडिटी से जुड़ी बीमारियां, पित्त यानी फोड़े-फूंसी, त्वचा से जुड़ी बीमारियां। इन सभी बीमारियों की परख वैद्य कलाई की नब्ज से करते हैं।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *