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असम का चुनावी बिगुल : योगेश मोहनजी गुप्ता

 

योगेश मोहनजी गुप्ता, मेरठ । भारत में समय-समय पर चुनावी प्रक्रिया का प्रारम्भ होना एक साधारण बात है परन्तु असम और पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव भारतीय राजनीति के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं। यद्यपि चुनावी प्रक्रिया से पूर्व असम में भाजपा की सरकार ही सत्तासीन थी, परन्तु वहाँ भाजपा को पुनः सत्ता प्राप्ति हेतु काफी प्रयास करना पड़ रहा है दूसरी ओर वहाँ पर कांग्रेस भी सत्ता प्राप्ति हेतु प्रयासरत है। असम पूर्वोत्तर में सात बहनों में सबसे बड़ी बहन है और ऐसा कहा जाता है कि जो राजनीतिक दल यहाँ पर जीत प्राप्त करेगा वही शेष सभी बहनों को भी जीतने में सफल होगा। यदि हम पश्चिम बंगाल और असम की राजनीति की तुलना करें तो पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए खोने के लिए कुछ नहीं है परन्तु जीतने पर एक और राज्य में सत्ता प्राप्ति का अवसर प्राप्त हो सकता है। इसके विपरीत असम में यदि भाजपा चुनावों में श्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाती है तो उसे सत्ता के सुख से वंचित होना पड़ेगा।
इस चुनावी दंगल में सीएए एवं एनआरसी का मुद्दा जहाँ एक ओर भाजपा को पश्चिम बंगाल के चुनाव में जीतने में मदद करेगा वहीं असम में उसे नुकसान पहुँचाएगा। भाजपा ने बंगाल में घोंषणा की है कि यदि वह सत्ता में आती है तो अपने मंत्री मंडल की पहली बैठक में सीएए एनआरसी लागू करा देगी, जबकि असम में इसको लागू कराने के मुद्दे पर भाजपा कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रही है। असम राज्य में इस बार चुनावी मुकाबला अत्यधिक रोचक हो चुका है, यहाँ चुनाव का परिणाम चाहें कुछ भी आए परन्तु कांग्रेस ने अपनी स्थिति विभिन्न क्षेत्रीय दलो विशेषतया बोडोलैण्ड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और ऑल इंडिया यूनाईटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के सहयोग से सशक्त कर ली है। ये दोनो क्षेत्रीय राजनीतिक दल असम में अत्यधिक प्रभावशील हैं और इनका कांग्रेस के साथ गठबंधन कुछ भी परिवर्तन लाने में सक्षम है। इस चुनावी युद्ध का शंखनाद होते ही भाजपा और कांगे्रस दोनो ही पार्टी सत्ता प्राप्ति की दौड़ में समकक्ष प्रतीत हो रहीं हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी असम राज्य में रैली कर चुके हैं, भाजपा के भी सभी दिग्गज नेता यथा – प्रधानमंत्री से लेकर केन्द्रीय मंत्री तक अपना अमिट प्रभाव छोड़ने के लिए प्रयासरत हैं। इन सब नेताओं के प्रचार प्रसार ने इस चुनावी युद्ध को अत्यधिक रोचक बना दिया है। चुनावों में असम के क्षेत्रीय दलों की भूमिका 80 के दशक से ही बहुत अहम रही है। सभी पार्टीयों ने अपने घोषणापत्र जारी कर दिए हैं जो कभी न पूरा होने वाले बड़े-बड़े वायदों के साथ मात्र एक चुनावी दस्तावेज होते हैं।
असम राज्य के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के मध्य अस्तित्व का युद्ध चल रहा है। यदि भाजपा इस चुनाव में जीत प्राप्त करती है तो वह उन्मुक्त रूप से कह सकती है कि देश की जनता को सीएए और एनआरसी से कोई समस्या नहीं है और जो उसने इन व्यवस्थाओं को लागू करने का निर्णय लिया है वह देश और जनता के हित के लिए लिया गया है।

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योगेश मोहनजी गुप्ता
चेयरमैन
आई आई एम टी यूनिवर्सिटी
मेरठ, भारत

 

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