न हाथ थाम सके, न पकड़ सके दामन, बड़े करीब से उठकर चला गया कोई : मीना कुमारी
टुकड़े टुकड़े दिन बीता, धज्जी धज्जी रात मिली, जिसका जितना आंचल था, उतनी ही सौगात मिली।’ यह फलसफा दिग्गज अभिनेत्री मीना कुमारी की उन्हीं की जुबानी है। सिनेमा जगत में ट्रेजडी क्वीन के नाम से मशहूर मीना जिंदगी भर सच्चे प्यार के लिए तरसती रहीं। मीना को पैदा होते ही पिता का पत्थरदिल रवैया, करियर के मुकाम पर महबूब की बेवफाई और पति की अग्निपरीक्षा नसीब हुई। पुरुष के प्रत्येक रूप ने उनके दिल को तार तार ही किया। अपने इस दर्द के बारे में खुद मीना कुमारी भी लिखती हैं, ‘न हाथ थाम सके, न पकड़ सके दामन, बड़े करीब से उठकर चला गया कोई।’ 

