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मा

 

मनीष कुमार श्रीवास्तव

माँ
एक एहसास
एक सुखद मिठास
र्
कई बार सुना था,
माँ बनना
ऐसा होता है, वैसा होता है
माँ शब्द में पूरा ब्रहृमाण्ड समय रहता है ।
माँ ममता, प्रेम, करुणा की प्रतिमर्ूर्ति होती है,
माँ शांति, दया और सुख की अनुभूति होती है

लेकिन माँ शब्द की गरिमा
जाना माँ बनने के बाद ।
जब मेरी बेटी तुतलाकर ममा बुलाती है,
सब कुछ अपने साथ मुज्गे भी खिलाती है ।
चाहे वह
दूध, फल हो, मिर्ठाई,
या उठाकर
आंगन से मिट्टी हो लाई ।
उसकी मीठी मुस्कान, अब मेरा खिलौना है,
उसकी गीली गुद्डी, अब मेरा बिछौना है ।
बेटी की हल्की उफ से,
मेरी जान निकल जाती है,
उसकी उन्मुक्त हँसी से
मेरी दुनिया मुसकाती है ।

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धन्य माँ है मेरी,
जिसने मुझको जन्म दिया है
जिसके कारण ही मुझ को
माँ का रुप मिला है ।

केन्द्रिय विद्यालय,
भारतीय राजदूतावास,
काठमांडू, नेपाल

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