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उप प्रधानमंत्री महतो की टिप्पणी को “उचित” बताते हुए 81 लोगों द्वारा विज्ञप्ति जारी

 

उप प्रधानमंत्री और शहरी विकास मंत्री राजेंद्र महतो के उस बयान का समर्थन करते हुए विभिन्न क्षेत्रों के 81 लोगों ने रविवार को एक बयान जारी किया है जिसमें कहा गया है कि नेपाल में राष्ट्रीय मुक्ति क्रांति के जरिए एक बहुराष्ट्रीय राज्य बनाया जाना चाहिए.

महतो की टिप्पणी को “उचित” बताते हुए, उन्होंने  बयान में कहा कि “उच्च हिंदू अहंकार और औपनिवेशिक मानसिकता वाले कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने एक बहुराष्ट्रीय राज्य की मांग को अनर्गलरुप में राज्य के विघटन से जोड़ा गया है।”

उनका दावा है कि एक समान जाति, इतिहास, संस्कृति, भाषा और सामान्य क्षेत्र या भूगोल में रहने वाले लोगों के समूह को ‘राष्ट्र’ कहा जाता है। यह उल्लेख करते हुए कि नेपाल की 2068 की जनगणना के अनुसार नेपाल में 125 से अधिक जातीय समूह हैं, उन्होंने कहा कि पृथ्वीनारायण शाह के गोरखा साम्राज्य के विस्तार के बाद, बहुल राष्ट्र पर जातीय संहार द्वारा एकल राष्ट्र राज्य बनाने के लिए सैन्य बल का उपयोग  किया गया था।

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विज्ञप्ति  में कहा गया है कि, “गोरखाली के ऐसे एकल राष्ट्रीय राज्य गणराज्य में भी, आंतरिक उपनिवेशवाद  है।” विज्ञप्ति में कहा गया है कि, ‘हजारौं वर्ष से इस भूमि को आबाद करने वाले भूमि पुत्र÷पुत्री सामाजिक–सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनैतिक प्रणाली को सैन्य बल तथा औपनिवेशिक कानुन द्वारा समाप्त कर एकल हिन्दु राष्ट्रिय राज्य निर्माण करते हुए अन्य सार्वभौम राष्ट्र को राज्यविहीन बनाने वाले औपनिवेशिक परियोजना को 21वीं शताब्दी के नेपाल की सार्वभौम जनता अस्वीकार करती है ।’

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विज्ञप्ति में कहा गया है कि देश में लोकतांत्रिक गणराज्य की स्थापना के संदर्भ में भी बहुराष्ट्रीय देशों पर पहाड़ी हिंदू उच्च जाति के उपनिवेशवाद पर आधारित राज्य सत्ता थोपना स्वीकार्य नहीं होगा।

बयान में कहा गया, “जिन लोगों ने कल कहा था कि देश को गणतंत्र और संघवाद से विभाजित किया जाएगा, वे अब नए राजा के रूप में बैठे हैं और वह आज फिर से बहुराष्ट्रीय राज्य के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं।”

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उदाहरण के तौर पर बहुराष्ट्रीय राज्यों बोलीविया और इक्वाडोर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वे देश अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती आर्थिक वृद्धि हासिल कर रहे हैं।

उन्होंने राज्यविहीन राष्ट्रों से आंतरिक उपनिवेशवाद से मुक्त एक बहुराष्ट्रीय राज्य के लिए प्रतिबद्ध होने का भी आह्वान किया।

विज्ञप्ति जारी करने वालों में दो पूर्व मंत्री डॉ. केशवमान शाक्य और शिवलाल थापा, तथा पूर्व राजदूत डॉ. गणेश योंजन सहित 81 लोग शामिल  हैं।

 

 

 

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