पांच पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त अपील के साथ प्रधानमंत्री ओली के अलोकतांत्रिक कृत्यों की निंदा
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के ”अलोकतांत्रिक कृत्यों और उनकी सत्ता के लिए लालसा की निंदा करते हुए, पांच पूर्व प्रधानमंत्रियों ने शनिवार को देश के प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से ऐसी गलत गतिविधियों में शामिल नहीं होने की अपील की जिनका राष्ट्र पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता हो।
पूर्व प्रधानमंत्रियों शेर बहादुर देउबा, पुष्प कमल दहल, माधव कुमार नेपाल, झलनाथ खनाल और बाबूराम भट्टराई ने एक बयान में यह संयुक्त अपील की। फिलहाल एक अल्पमत सरकार का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री ओली लगातार नेपाल के संविधान पर हमला कर रहे हैं और संघीय गणराज्य तथा उसके कानून के शासन को प्राप्त करने के लिए नेपाली लोगों के लंबे और कठिन संघर्ष को कमतर कर रहे हैं।
उन्होंने बयान में कहा, ”हम कार्यवाहक सरकार को चेतावनी देते हैं कि वह ऐसा कुछ न करें या दूसरों को ऐसा कुछ भी करने के लिए निर्देशित न करें जिससे देश और लोगों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़े और प्रशासन तथा सुरक्षा एजेंसियों से ऐसी गलत गतिविधियों में शामिल न होने की अपील करते हैं।
उन्होंने कहा, उन्होंने सत्ता के लिए लालसा को प्रदर्शित किया है जो नेपाल के राजनीतिक इतिहास में कभी मौजूद नहीं थी। हम ओली के इस तरह के अलोकतांत्रिक कृत्य की निंदा करते हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने प्रधानमंत्री ओली की सिफारिश पर 22 मई को संसद को भंग कर दी थी।
खबर के अनुसार ओली पर पिछले महीने दूसरी बार प्रतिनिधि सभा को भंग करने के लिए असंवैधानिक तरीकों का सहारा लेने और कोविड-19 महामारी के बीच देश को मध्यावधि चुनावों में धकेलने का आरोप लगाते हुए, पांच पूर्व प्रधानमंत्रियों ने कहा कि ओली ने अपने सत्तावादी और मनमाने चरित्र को उजागर किया है।

