Tue. Oct 6th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

जानिए कब है हरियाली अमावस्या और क्या है इसका महत्त्व

 

अमावस्या माह में एक बार ही आती है। मतलब यह कि वर्ष में 12 अमावस्याएं होती हैं। श्रावण माह में हरियाली अमावस्या आती है। इसे महाराष्ट्र में गटारी अमावस्या कहते हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में चुक्कला एवं उड़ीसा में चितलागी अमावस्या कहते हैं। इस बार यह अमावस्या 8 अगस्त रविवार के दिन है। आओ जानते हैं हरियाली अमावस्या के बारे में कुछ खास उपाय।

1. शास्त्रों में अमावस्या तिथि का स्वामी पितृदेव को माना जाता है। इस दिन पितरों की शांति हेतु अनुष्ठान अर्थात पिंडदान, तर्पण आदि करने से पितृदोष का समाधान होता है। इस दिन दक्षिणाभिमुख होकर दिवंगत पितरों के लिए पितृ तर्पण करें तथा पितृ स्तोत्र या पितृ सूक्त का पाठ करना लाभदायी सिद्ध होता है।

2. हरियाली अमावस्या के दिन पौधा रोपण या वृक्षारोपण का बहुत महत्व है। आम, आंवला, पीपल, वटवृक्ष और नीम के पौधों को रोपने का विशेष महत्व बताया गया है। वृक्ष रोपण करने ग्रह नक्षत्र और पितृदोष शांत हो जाते हैं।
3. श्रावण मास में महादेव के पूजन का विशेष महत्व है इसीलिए हरियाली अमावस्या पर विशेष तौर पर शिवजी का पूजन-अर्चन किया जाता है। हरियाली अमावस्या के दिन भगवान शिव को सफेद आंकड़े के फूल, बिल्व पत्र और भांग, धतूरा चढ़ाएं।

4. इस दिन व्रत करने का भी बहुत महत्व बताया गया है। सभी तरह के रोग और शोक मिटाने हेतु विधिवत रूप से इस दिन व्रत रखा जाता है।

5. अमा‍वस्या के दिन भूत-प्रेत, पितृ, पिशाच, निशाचर जीव-जंतु और दैत्य ज्यादा सक्रिय और उन्मुक्त रहते हैं। ऐसे दिन की प्रकृति को जानकर विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

यह भी पढें   रेड बुल कृति अवार्ड्स के 13वें संस्करण के तहत ‘कृति कनेक्ट’ कार्यक्रम का आयोजन

6. इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।

7. सावन हरियाली अमावस्या के दिन नदी, तालाब और सरोवर में स्नान का बहुत महत्व है।

8. साथ ही शिव भगवान के साथ हनुमान जी की भी पूजा जरूर करना चाहिए। हनुमान मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें. साथ ही सिंदूर और चमेली का तेल चड़ाएं।

9. इस दिन व्यक्ति में नकारात्मक सोच बढ़ जाती है। ऐसे में नकारात्मक शक्तियां उसे अपने प्रभाव में ले लेती है तो ऐसे में हनुमानजी का जप करते रहना चाहिए।

10. अमावस्या के दिन ऐसे लोगों पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है जो लोग अति भावुक होते हैं। अत: ऐसे लोगों को अपने मन पर कंट्रोल रखना चाहिए और पूजा पाठ आदि करना चाहिए।

11. इस दिन हो सके तो उपवास रखना चाहिए। जानकार लोग तो यह कहते हैं कि चौदस, अमावस्या और प्रतिपदा उक्त 3 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है।

12. इस दिन आटे के दीपक जलाकर नदी में प्रवाहित करने से पितृदेव और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है।

13. इस दिन शनिदेवजी के मंदिर में विधि अनुसार दीपक लगाने से वे प्रसन्न होते हैं।

14. इस दिन चीटियों को चीनी मिश्रित आटा खिलाएं।

यह भी पढें   ‘राष्ट्रीय रक्त सम्राट’ प्रेमसागर कर्माचार्य नें १ सय ८८वीं बार रक्तदान किया 

15. इस दिन गेहूं और ज्वार की धानी का प्रसाद वितरण करें।

16. इस दिन शाम को लाल रंग के धागे की बत्ती का उपयोग करते हुए गाय के घी का दीपक लगाएं। दीये में थोड़ीसी केसर डालें और इसे घर के ईशान कोण में रख दें। इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होंगी।

17. हरियाली अमावस्या के दिन शिवजी और श्रीविष्णु के मंत्रों का जाप और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।

18. इस दिन शिव जी की विधिवत पूजा करें और उन्हें खीर का भोग लगाएं। ऐसा करने से आपकी मनोकामना शीघ्र ही पूरी होगी और भोले नाथ की कृपा भी प्राप्त होगी।

19. मछलियों को आटा या चीनी जरूर खिलाएं।

20. हरियाली अमावस्या की रात्रि में पूजा करते समय पूजा की थाली में स्वास्तिक या ॐ बनाकर और उसपर महालक्ष्मी यंत्र रखें फिर विधिवत पूजा अर्चना करें, ऐसा करने से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होगा और आपको सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी।

हरियाली अमावस्या की कथा :
कहते हैं कि एक राजा की बहू ने एक दिन मिठाई चोरी करके खा ली और नाम एक चूहे का ले दिया। यह बात जानकर चूहे को क्रोध आया और उसने तय किया कि एक दिन राजा के सामने सच लेकर ही आऊंगा। फिर एक दिन राजा के यहां अतिथि पधारे और राजा के ही अतिथि कक्ष में सोऐ। चूहे ने रानी के वस्त्र ले जाकर अतिथि के पास रख दिए। प्रात:काल उठकर सभी लोग आपस में बात करने लगे की छोटी रानी के कपड़े अतिथि के कमरे में मिले। यह बात जब राजा को पता चली तो उस रानी को घर से निकाल दिया।

यह भी पढें   आक्रोशित युवा, अनिश्चित भविष्य और शासन की जवाबदेही : देश के सामने बढ़ती चुनौती : बिमल सरार्फ

रानी प्रतिदिन संध्या को दिया जलाती और ज्वार बोती और पूजा करके गुडधानी का प्रसाद बांटती थीं। फिर एक दिन राजा शिकार करके उधर से निकले तो राजा की नजर रानी पर पड़ी। राजा ने महल में आकर कहा कि आज तो वृक्ष के नीचे चमत्कारी चीज हैं, अपने झाड़ के ऊपर जाकर देखा तो दिये आपस में बात कर रहे थे। आज किसने क्या खाया, और कौन क्या है।

उसमें से एक दिया बोला आपके मेरे जान-पहचान के अलावा कोई नहीं है। आपने तो मेरी पूजा भी नहीं की और भोग भी नहीं लगाया बाकी के सब दिये बोले ऐसी क्या बात हुई तब दिया बोला मैं राजा के घर का हूं उस राजा की एक बहू थी उसने एक बार मिठाई चोरी करके खा ली और चूहे का नाम लें लिया। जब चूहे को क्रोध आया तो रानी के कपड़े अतिथि के कमरे में रख दिये राजा ने रानी को घर से निकाल दिया, वो रोज मेरी पूजा करती थी भोग लगाती थी। उसने रानी को आशीर्वाद दिया और कहा की सुखी रहे। फिर सब लोग झाड़ पर से उतरकर घर आए और कहा की रानी का कोई दोष नहीं था। यह सुनकर राजा ने रानी को घर बुलाया और फिण सभी सुखपूर्वक रहने लगे।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com