वृषभान दुलारी, राधा सुकुमारी : निशा अग्रवाल
राधाष्टमी pr वृजेश्वरी राधा रानी को समर्पित
वृषभान दुलारी, राधा सुकुमारी
कीर्ति नन्दिनी, श्रीजी मतवारी
चंचल चपल वो मृगनयनी
स्निग्ध कोमल ज्युं कुमुदिनी
श्रीकृष्ण की है वो प्राणेश्वरी
अप्रतिम सौंदर्य रासरासेश्वरी
राधे करती जब पुष्प श्रृगांर
पुष्पों पे आता है निखार
वो मनमोहिनी, चांदनी सी निर्मल
मिस्री की डली, नवनीत सी कोमल
वो मृदुल हास, तन में उल्लास
है कृष्ण प्रिया भीनी सुवास
वो भोली ग्वालन, प्रेम पुजारन
वंशी की धुन पे नाचे छनछन
वो आद्यशक्ति, वो परम भक्ति
चरणों में तेरे मिलती है मुक्ति
कृष्ण देह तो प्राण है राधा
बिन राधा मेरा श्याम है आधा
करे करजोड़ ‘निशा’ प्रार्थना
हे प्रेम प्रीत की परिभाषा
चरणों की धूल बना रखना
तुम एकमात्र जीवन आशा

निशा अग्रवाल
धरान


