सुन न सके हम किसी जुबां से, वजह बड़ी है शायद कोई : ममता शर्मा “अंचल”
पढें राजस्थान की जमीन से जुडी संवेदनाओं से भरपूर कवयित्री ममता शर्मा “अंचल” की कुछ कविताओं को
दुलारी आँखों में
………………….
दो कजरारी आँखों में
इन उजियारी आँखों में
सारी दुनिया दिखती है
हमें तुम्हारी आँखों में
निजहित सँग परहित पाया
नित उपकारी आँखों में
किन्तु दर्द किसलिए बसा
आज दुलारी आँखों में
कैसे आई है कहिये
यह लाचारी आँखों में
धैर्य धरो जी सब कुछ है
इन संसारी आँखों में
सुख दुख दोनो आते हैं
बारी बारी आँखों में
ज्यों अंचल को प्यार मिला
प्यारी प्यारी आँखों में
अहसास तुम हो
,………………
सिर्फ तन हम साँस तुम हो
साँस का अहसास तुम हो
आप हो तो जी रहे हैं
यह अटल विश्वास तुम हो
आम हैं अनगिन जहां में
एक है जो ख़ास तुम हो
हम भले पतझड़ कहा लें
ए प्रियम मधुमास तुम हो
हम पखेरू बिन परों के
सोच में आकाश तुम हो
तृप्ति भी कहने लगी है
कंठ हैं हम प्यास तुम हो
कह रहा मन रोज “अंचल”
भाव हम उल्लास तुम हो
प्यार तुम्हारा
…………..
कितना प्यारा
प्यार तुम्हारा
मिला हमें ज्यों
आज दुलारा
नीलगगन का
एक सितारा
खुश होकर झट
हृदय पुकारा
जीत गया लो
फिर उजियारा
खुला अचानक
भाग्य हमारा
जिसकी खातिर
जग बेचारा
भटक रहा है
मारा मारा
मन नें ही खुद
दिया सहारा
जीत हार तू
सोच न यारा
इतना सा है
उत्तर सारा
जीत गया दिल
दिल ही हारा
मुझको याद है
………………..
वह पुराना गीत मुझको याद है
जो रहा दिल मे सदा आबाद है
देख मन को फ़िक्र में कहता रहा
बे वजह क्यों पालता अवसाद है
हो रहे खुश वो पराजित जानकर
मीत यह उनका निरा उन्माद है
डर तुझे है किस गुलामी का बता
ग़म न कर मन बावरे आजाद है
पीर भी उम्मीद की दुश्मन नहीं
सच समझ सुख की यही बुनियाद है
गीत समझाता मुझे “अंचल” यही
जय पराजय जिंदगी की खाद है
प्यार हमें भी
……………
इस दुनिया मे प्यार हमें भी कोई तो करता ही होगा
अधिक नहीं तो जरा जरा सा हम पर भी मरता ही होगा
सुन न सके हम किसी जुबां से वजह बड़ी है शायद कोई
इसीलिए तो बात हृदय की कहने से डरता ही होगा
दिल आखिर दिल ही होता है पत्थर कहना साफ झूठ है
जज्बों की बारिश से जब तब कंठ तलक भरता ही होगा
कभी अकेलेपन में सहने की सीमा को विकल देखकर
जब होता होगा मन भारी आंखों से झरता ही होगा
टूट न जाए हरगिज़ मर्यादा का बंधन यही सोचकर।
खुद को समझाता भी होगा धीरज भी धरता ही होगा
उम्मीदों का हाथ थामकर जीना ही जीना है “अंचल”
यही समझ कर हँस हँस ग़म के दरिया से तरता ही होगा।।।।
ममता शर्मा “अंचल”
अलवर (राजस्थान)7220004040


