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ओमिक्रॉन : WHO ने कहा- निगरानी के साथ सतर्क रहने की जरूरत

 

ओमिक्रॉन वैरिएंट पहली बार 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका में मिला था। इससे संक्रमित व्यक्ति का 9 नवंबर को सैंपल लिया गया था। 25 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका ने इसके बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बताया था। 26 नवंबर को WHO ने नए वैरिएंट B.1.1.529 को ओमिक्रॉन नाम दिया। इसे वैरिएंट ऑफ कंसर्न कैटेगरी में रखा गया है। इसके सामने आने के बाद कई देशों ने दक्षिण अफ्रीका की उड़ानों पर रोक लगा दी थी।

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WHO ने कहा- निगरानी के साथ सतर्क रहने की जरूरत
WHO साउथ ईस्ट एशिया की रीजनल डायरेक्टर डॉ. पूनम अग्रवाल ने बताया कि भारत में ओमिक्रॉन के दो नए मामलों की पुष्टि हुई है। ये अप्रत्याशित मामला नहीं है। लगातार आ रहे केसेस को देखते हुए सभी देशों को निगरानी बढ़ाने, सतर्क रहने और वारस के प्रसार को रोकने उपाय पर जोर देने की जरूरत है।

ओमिक्रॉन अन्य वैरिएंट की तुलना में कहीं ज्यादा बार म्यूटेंट हो रहा है। दुनियाभर के साइंटिस्ट ओमिक्रॉन के बिहेवियर की स्टडी कर रहे हैं। इस वैरिएंट से बचने के उपाय पर भी रिसर्च किया जा रहा है। WHO उन देशों की सराहना करता है जो नए वैरिएंट के मामलों को जल्द से जल्द पहचानने में सक्षम हैं। इससे आगे की स्टडी में बेहतर परिणाम मिलेंगे।ओमिक्रॉन डेल्टा से 5 गुना ज्यादा खतरनाक है। इसलिए सभी को जागरूक रहने की जरूरत है। हालांकि डरने की कोई बात नहीं है। बस अपनी जिम्मेदारी निभानी है और मास्क पहनना है। कोरोना से बचाव के लिए सभी जरूरी उपाय अपनाने हैं।

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