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रेवाड़ी की प्रवीण कुमारी को मिली डॉ ‘मानव’ के साहित्य पर पीएचडी की उपाधि

 

नारनौल। रेवाड़ी की शोध-छात्रा प्रवीण कुमारी ने ‘डॉ रामनिवास ‘मानव’ का बालकाव्य : परिचय एवं मूल्यांकन’ विषय पर शोध-प्रबंध लिखकर टांटिया विश्वविद्यालय, श्री गंगानगर (राजस्थान) से पी-एचडी (हिंदी) की उपाधि प्राप्त की है। इसके साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रामनिवास ‘मानव’ के साहित्य पर शोध करने वाले शोधार्थियों की संख्या बढ़कर चौहत्तर हो गई है, जिनमें से इक्यावन शोधकर्ताओं ने एमफिल्, बाईस ने पीएचडी और एक ने डीलिट् की उपाधि प्राप्त की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ ‘मानव’ समकालीन हिंदी-साहित्य के अकेले ऐसे साहित्यकार हैं, जिनके साहित्य पर इतना व्यापक शोध-कार्य हुआ है। शोध-छात्रा प्रवीण कुमारी ने डॉ ‘मानव’ को एक श्रेष्ठ साहित्यकार और आदर्श इंसान बताते हुए कहा कि उनके साहित्य पर शोध करना मेरे लिए गौरव और गर्व की बात है। उल्लेखनीय है कि छप्पन पुस्तकों के लेखक और संपादक डॉ ‘मानव’ सिद्धहस्त कवि, लेखक, संपादक और शिक्षक होने के साथ-साथ हरियाणा में रचित समकालीन हिंदी-साहित्य के प्रथम शोधार्थी, अधिकारी विद्वान तथा कुशल शोध-निर्देशक भी हैं। ‘हरियाणवी साहित्य के पुरोधा’ के रूप में विख्यात डॉ ‘मानव’ हरियाणा के समकालीन हिंदी-साहित्य पर पीएचडी और डीलिट् की दोनों उपाधियां प्राप्त करने वाले देश के प्रथम और एकमात्र विद्वान हैं। इनके कुशल निर्देशन में शताधिक शोधार्थी एमफिल्, पीएचडी और डीलिट् की उपाधियां प्राप्त कर चुके हैं। यही नहीं, आधा दर्जन बोर्डों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी इनकी विविध रचनाओं और पुस्तकों को शामिल किया गया है। विश्व की सत्तर प्रमुख बोलियों और भाषाओं में डाॅ ‘मानव’ की अनेकानेक रचनाएं अनूदित हो चुकी हैं तथा दस अनूदित पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। संप्रति सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी औ(राजस्थान) के हिंदी-विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष के रूप में कार्यरत डॉ रामनिवास ‘मानव’ को देश-विदेश की लगभग डेढ़ सौ संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।

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