लीक से हट कर …मधेश कहाँ और किस प्राथमिकता पर है ? : उमेश कुमार मण्डल
उमेश कुमार मण्डल, जनकपुरधाम । तराई-मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी के रुप में फिर से एक पार्टी (जो मधेशीयों का अपना और वास्तविक राजनीतिक संगठन हो) आगे बढ़ाना सतही तवर पर कुछ लोगों को चौंकानेबाली घटना हो सकती है, मगर यह एक आवश्यकता है जिसकी नींव जीतनी जल्दी हो पूरी कर दी जानी चाहिए ।
गम्भीरता से सोचें, वास्तविकता का विश्लेषण करें और निष्कर्ष निकालें तो परिणाम यही आएगा –
1. मधेश के लोगों ने अपनी राजनीतिक दल का निर्माण करने का एकदम से प्रयास किया । मधेशी कहलानेबाले सभी दलों को एकत्रित होने के लिए दबाब बनाया । पर शायद यह कहने के लिए नहीं कि अब हम मधेसी पार्टी नहीं हैं और हमारी पार्टी ‘मधेश’ शब्द को अछूत वा त्येज्य मानती है । लेकिन तथाकथित सभी मधेशी पार्टीयों ने यही और सिर्फ यही किया । आज न तो मधेशी फोरम है न ही सशक्त बनती जा रही कभी की तमलोपा । पहचान, सम्मान और स्वाभिमान तीनों की तिलांजलि तो यहीं हो गया था ।
ऐसे में हमें अपनी राजनीतिक दल चाहिए या नहीं ?
2. कहाँ है मधेश का मुद्दा ? बस लकड़सुंघे का डमरू और सुगों का रटान ही तो है । सत्ता और सरकार में प्रवेश के समय सभी लिवास उतारते रहे हैं । हमाम में सभी नङ्गे हैं और इन नेताओं के लिए राजनीति में सत्ता का क्षण ही हमाम है । सत्ता रुपी शीत पानी सभी अंग पर पड़े यही और बस एक ही चाहत सभी ओर दिखाई पड़ती है । आज गठबन्धन सरकार का न्यूनतम कार्यक्रम क्या है ? मधेश कहाँ और किस प्राथमिकता पर है ? जब लोग केपी ओली के सरकार में निर्लज्ज हो कर गये तब भी नहीं था न प्रचण्ड के जाल में फंसते वक्त ही रहा ।
सोचिए, मधेश के लोगों के लिए मधेश का मुद्दा अहम् है कि नहीं ? अगर है तो क्या किया जाय ? कैसे आगे बढ़ें ?
3. राजनीतिक पार्टी की एक राह होती है । अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का एक क्षमता होता है । कहाँ है वह राह ? कहाँ दिखाई पड़ रही है क्षमता ? मधेश के लोगों ने प्रदेश में मौका दिया । स्थानीय सरकार में भी चुना । कुछ अलग तो दिखाई पड़ना चाहिए था । बस दिखाई दिया अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, बिना योजना का क्रियाकलाप और इसके सिवाय और कुछ भी नहीं । वास्तव में सरकार बनाने का अवसर नेताओं का क्षमता परीक्षण है । कैसे लोगों को सरकार में भेजा जाता है ? संसद में भेजा जाता है और सरकार कैसे चलती है किस दिशा में चलती है ? यही प्रश्न महत्वपूर्ण होता है । मधेश को प्रदेश सरकार या स्थानीय सरकार किस निश्चित अपेक्षित दिशा में ले जाना चाहा ? शायद जबाब नहीं है ।
हमें ऐसी कोई पार्टी चाहिए या नहीं जो जबाब के प्रति जबाबदेह हो ?
4. विगत के दिनों में ऐसा महशूस हुआ जैसे मधेश में कोई लोकतन्त्रवादी होता ही नहीं है । सभी वामपन्थीयों के पल्लू से बंध गये । इसका यह भी अर्थ है, हमें लोकतन्त्र से मतलब ही नहीं है । जिधर चीन्नी उधर मक्खियों का घिन्नी ।
क्यों हमें लोकतन्त्र चाहिए ही नहीं ? अगर चाहिए तो मधेशीयों का अपना लोकतन्त्र के प्रति प्रतिवद्ध पार्टी भी जरुरी है ।
5. सभी जानते हैं कि मधेशी ‘मधेशी’ के नाम पर संगठित होना चाहते हैं । लेकिन तथाकथित मधेश केन्द्रित दल के नेता पार्टीयों को जात का पात्र बना दिया है । मधेशी के नाम पर संगठित तो होना ही नहीं चाहते । मत चाहिए परन्तु काम या कोई योजना या फिर कुछ और जात के नाम पर ही होगा । सम्मान भी जात के ही नाम पर ही दिया जाएगा चाहे कुछ भी हो जाय । मधेश के लिए सभी क्षेत्र के लोगों ने योगदान दिया है । परन्तु कदर जात के आधार पर ही होगा । सम्बन्धी हो तो हाथ कंगन को आरसी क्या ?
आन्दोलन को इस भायरस से अलग करना है या नहीं ? अगर है तो, प्रयत्न करना ही होगा ।
6. संघीयता का अर्थ है संघ में सभी का शासन और क्षेत्र में क्षेत्रवासीयों का स्वशासन । अगर क्षेत्रीय मुद्दा, आकांक्षा, आवश्यकता पर कोई जोर ही नहीं दे तो संघीयता का माने ही क्या होगा ?
क्षेत्रीयता शब्द से ही लोग डरने लगे हैं । ऐसे में क्षेत्रीयता पर जोर देना जरुरी है कि नहीं ? क्षेत्रीय पार्टी चाहिए या नहीं ?
7. राजनीतिक पार्टी अगर संस्थागत नहीं होगी तो राजनीतिक हो ही नही सकती । गर संस्थागत और विधि सम्मत निर्णय नहीं होगी तो कोई भी समूह प्राइवेट लिमिटेड ही होगा । कोशिश हर जगह हुई लेकिन परिणाम ऋणात्मक रहा । खतरा विक्री पर न हो , साली-घरबाली-बाहरबाली पर न हो यही लक्ष्य रहा । कोई बांकी नहीं हैं ।
क्यों हमें इसे तोड़ना चाहिए या नहीं ? संस्थागत राजनीतिक संगठन की आवश्यकता है या नहीं ?
तराई-मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी अगर लोकतन्त्र, मधेश का मुद्दा और आकांक्षा, स्वच्छ क्षेत्रीयता, संस्थागत राजनीतिक पार्टी, भ्रष्टाचार बनाम सुशासन, परिभाषित विचार, लक्ष्य और उसके लिए मान्य शान्तिपूर्ण राह पर चलने का प्रण लेती है तो साधुवाद का अधिकारी है । इसे समर्थन मिलना चाहिए ।
पार्टीयाँ फूटती और जुटती रही है, रहेंगी लेकिन ज्यादातर पार्टीयाँ अवसर के लिए अर्थात् सत्ता में जाने के लिए फूटी है । तराई-मधेश लोकतान्त्रिक पार्टी सत्ता या कोई लाभ के लिए आगे आती नहीं दिखती । ऐसा कोई अवसर भी नहीं है । अगर यह पार्टी विचार से प्रेरित है तो हमें शुभकामना देना ही चाहिए । यह एक ऐतिहासिक जिम्मेदारी है । इन्हें उर्जा प्रदान हो ।

पूर्व केन्द्रीय सदस्य जसपा
उमेश कुमार मण्डल
पूर्व केन्द्रीय सदस्य जसपा

