कवि /व्यंग्यकार अशोक ‘अंजुम’ व लोकप्रिय लेखिका भारती शर्मा की पुस्तकों का लोकार्पण
4 years ago
अलीगढ़। 12 अप्रैल 22 ! कवि श्री अशोक अंजुम के मुक्तक संग्रह ‘ज़रा-सी बात पर’ तथा लेखिका /कवयित्री श्रीमती भारती शर्मा के लघुकथा संग्रह ‘एक थी गुड्डी’ का लोकार्पण कार्यक्रम शिखर साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में साईं रेस्टोरेंट के भव्य सभागार में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के प्रथम सम्मान सत्र का संचालन श्री अरविंद पंडित ने किया। द्वितीय लोकार्पण-सत्र का संचालन युवा कवि सुधांशु गोस्वामी ने तथा अंतिम कवि सम्मेलन – सत्र का संचालन ओजस्वी कवि श्री हरीश बेताब ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री अशोक कुमार सरोहा, विशिष्ट अतिथि श्री गौरव दयाल व प्रो० चंद्रशेखर के साथ-साथ अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।
प्रारम्भ में श्री अशोक अंजुम तथा श्री भारती शर्मा ने अपनी माताश्री का शॉल आदि के द्वारा सम्मान किया ! तत्पश्चात सभी अतिथियों को सम्मानित किया गया !
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० वेदप्रकाश अमिताभ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारती शर्मा के लघुकथा संग्रह में अधिकतर कथाएं सकारात्मक हैं जो समाज को एक नई दिशा प्रदान करेंगी। उन्होंने अशोक अंजुम के मुक्तक संग्रह के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अशोक अंजुम बिल्कुल अशोक के वृक्ष की तरह से हैं जो कभी पत्र विहीन नहीं होता, इसी प्रकार इनकी सृजनात्मकता भी निरंतर हरी-भरी रहती है । कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० प्रेम कुमार ने कहा ‘ कविता करना कोई खेल नहीं है, इसके लिए साधना करनी पड़ती है। आज अशोक अंजुम को उनकी साहित्य साधना ने ही साहित्य के शिखर तक पहुंचाया है तथा भारती शर्मा ने परिवार के दायित्वों को संभालते हुए साहित्य के क्षेत्र में भी कदम रखा है उसके लिए हार्दिक शुभकामनाएं। ‘ श्री अशोक ‘अंजुम’ ने अपनी लेखन-यात्रा पर संक्षेप में प्रकाश डालते हुए पहले पुस्तक से कुछ मुक्तक सुनाए- ‘ज़रा-सी बात पर रिश्तों को तुम दो फाड़ मत करना।कभी कुछ चूक हो जाए तो तिल का ताड़ मत करना।दिलों में गांठ पड़ जाए तो फिर मुश्किल से खुलती है- किसी की भावनाओं से कभी खिलवाड़ मत करना ‘। इसी के साथ अंजुम ने अपने लोकप्रिय गीत और ग़ज़लों का भी सस्वर पाठ करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया !कवयित्री/लेखिका भारती शर्मा ने कहा ‘ गृहस्थ जीवन और साहित्य दोनों की जिम्मेदारियों को एक साथ निभाना मुश्किल रहता है, परन्तु गुरुजनों के आशीष तथा मित्रों व अपनों के सहयोग से साहित्य के पथ पर चलने की ऊर्जा मिलती रही है ‘। इस अवसर पर भारती शर्मा ने पुस्तक से दो लघुकथाओं का पाठ भी किया और श्रोताओं के आग्रह पर अपनी लोकप्रिय रचना ‘उदास चिड़िया’ भी सुनायी !इस अवसर पर डॉ. दौलत राम शर्मा ने फर्रुखाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार/कवि डॉ. शिवओम अंबर द्वारा अशोक अंजुम की पुस्तक पर लिखित समीक्षा आलेख का वाचन किया। वहीं श्री अरविंद पंडित ने भारती शर्मा की पुस्तक पर लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार श्री राजेंद्र वर्मा द्वारा लिखित समीक्षा प्रस्तुत की।
आमंत्रित कवि प्रो०आर०आर० आज़ाद, नरेंद्र शर्मा ‘नरेंद्र’, डॉ० दौलतराम शर्मा, नितिन ‘नायाब’, हरीश ‘बेताब’, योगेश सेंगर, सुधांशु गोस्वामी, पंकज भारद्वाज ने अपनी कविताओं से कार्यक्रम को रसरंजित कर दिया। मुख्य अतिथि श्री अशोक कुमार सरोहा ने कार्यक्रम की प्रशंसा की तथा अशोक अंजुम व भारती शर्मा जी को उनकी नई पुस्तकों के लिए बधाई दी। विशिष्ट अतिथि कमिश्नर श्री गौरव दयाल ने कहा कि वरिष्ठ कवि अशोक अंजुम की 65 वीं किताब है इतनी साहित्यिक किताब तो मैंने अब तक के जीवन-काल में नहीं पढ़़ीं जितनी कि अशोक जी ने लिख दी हैं साहित्य के क्षेत्र में ये कार्य निश्चित रूप से समाज को उन्नत करेगा, उन्होंने भारती शर्मा के लेखन की भी खुले दिल से सराहना की । ‘ विशिष्ट अतिथि प्रो० चंद्रशेखर ने कहा ‘ साहित्य के क्षेत्र दोनों ही पुस्तकें श्रेष्ठ स्थान रखती हैं, निश्चित ही इन पुस्तकों को पाठकों का भरपूर प्यार मिलेगा । हरदुआगंज पावर प्रोजेक्ट के जी.एम. श्री मयंक मांगलिक ने भी अपने वक्तव्य में दोनों ही विभूतियों के लेखन की भूरि-भूरि प्रशंसा की !प्रायः सभी अतिथियों ने पुस्तकों की आकर्षक प्रस्तुति के लिए दिल्ली के प्रतिष्ठित “श्वेतवर्णा प्रकाशन” को भी सराहा !
कार्यक्रम के सहसंयोजक श्री मनीष शर्मा बिट ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया !
इस अवसर पर विशेष आमन्त्रित अथिति के रूप में एडीएम प्रशासन श्री देवी प्रसाद पाल, डॉ. पूनम शर्मा, हिंदूमहासभा के राष्ट्रीय महामंत्री अशोक कुमार पांडेय, रंगकर्मी प्रमोद राघव, डॉ. गणेश शर्मा, आयकर अधिकारी श्री गजेन्द्र सिंह, श्री विद्यार्णव शर्मा, श्री सौरभ अग्रवाल (एड.), हिमांशु मित्तल, आर. के. गुप्ता (एड.) , एस. सी . अस्थाना, एक्टोमीनिआ के हितेंद्र दीक्षित आदि सैकड़ों प्रबुद्ध जन विशेष रूप से उपस्थित रहे।




