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‘नो भोट’ संबंधी व्यवस्था कार्यान्वयन के लिए मांग करते हुए सर्वोच्च अदालत में अवहेलना मुद्दा

 
शेरबहादुर देउवा/फाईल तस्वीर

काठमांडू, २९ अप्रील । चुनावी प्रतिस्पर्धा में शामील उम्मीदवारों में से अगर मतदाता किसी भी उम्मेदवार को भोट देना नहीं चाहते हैं तो यह उनकी अधिकार है, इसीलिए चुनाव में ‘नो भोट’ अर्थात् ‘राइट टू रिजेक्ट’ संबंधी व्यवस्था कार्यान्वयन का मांग करते हुए सर्वोच्च अदालत में एक अवहेलना मुद्दा पंजीकृत हुई है । अधिवक्ता स्वागत नेपाल ने बिहिबार सर्वोच्च अदालत में एक निवेदन पेश करते हुए कहा है कि ‘राइट टू रिजेक्ट’ जनता की अधिकार है, ऐसी व्यवस्था कार्यान्वयन में नहीं आया है ।
प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा, सभामुख अग्निप्रसाद सापकोटा, कानूनमन्त्री गोबिन्द बन्दी, निर्वाचन आयोग के पदाधिकारी को विपक्ष बनाकर रिट दायर हुआ है । अधिवक्त नेपाल ने कहा है कि इससे पहले ही सर्वोच्च अदालत ने मतपत्र में राइट टू रिजेक्ट की व्यवस्था करने के लिए कहा था, लेकिन उक्त प्रावधान आगामी चुनाव में कार्यान्वन में नहीं आया है, यह सर्वोच्च अदालत की अवहेलना है ।

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