Sat. Jul 11th, 2026
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“मल बनाम ईम्बोस्ड नम्बर” व्यग्ंय लेख: बिम्मी कालिन्दी शर्मा

 

व्यग्ंय लेख: बिम्मी कालिन्दी शर्मा, । मन न मिले खेत बाँझ रह जाए कोई बात नही । पेट में अन्न न पडे भूख चारों तरफ मातम मनाए कोई बात नहीं पर मलमल के कुर्ते पहन कर अपने दलबल सहित ईस राजनीति के दलदल में मुस्दैद रहते हैं । कहने को तो नेता है ं पर यह है वास्तव में दलाल तभी तो हर चीज में कमिशन खाने की ईनकी आदत पड चूकी है । ईसी कमिशन के चक्कर में देश में बडे-बडे आयोजना आगे बढ नहीं पाते या निर्माण पूरा नहीं हो पाता । चाहे वह मेलम्ची हो या कोई और आयोजना सब का ईन दलालों नें बंटाधार कर दिया है । यह कमिशन खाने और मोटाने के लिए कोई न कोई छिद्र ढूंढ ही लेते है । और अब ईन राजनीतिक दलों के दलालों ने नंया छिद्र ढुंढा है जिसका नाम है ‘ईम्बोस्ड नंबर’ ।
देश में सडकों के हालात जर्जर है, पुरानी और खटारा गाडी हर दिन सडकों पर लीला दिखा कर ईंसानों की ईहलीला समाप्त कर देती है । ईस देश का जमीन ही नहीं आसमान भी सुरक्षित नहीं है तभी तो पुराने आउटडेटेड विमानों को आसमान में कलाबाजी करने दिया जाता है । जिसका नतिजा यह होता है कि ऐसे जर्जर विमानों में सवार यात्री आसमान से ही परमधाम चले जाते हैं । न जमीन न आसमान सुरक्षित है । ईंसान जाए तो जाए कंहा ? और सरकार नाम का गिद्ध अपने नागरिकों को नोचती ही रहती है । अब ईस गिद्ध सरकार ने अपने कथित मुर्दा नागरिकों को नोचने के लिए ईम्बोस्ड नंबर का जाल फेंका है । जो ईम्बोस्ड नंबर देश के ईस दुरावस्था के समय जरुरी नहीं हे पर ईसको सांस कि तरह जरुरी बना कर अपने नागरिकों को लुटने का नंया जरिया बनाया जा रहा है । सडक खस्ताहाल है उसका मरम्मत करने पर ध्यान नहीं है पर अपने सवारी साधनों.में.ईम्बोस्ड नंबर लगवाना जरुरी है । वह भी मंहगे दामों में सरकार के कहे रेट पर । जो.ईम्बोस्ड नंबर भारत में मामुली पांच सो में आ जाता है उसका मूल्य. उससे छह गूना ज्यादा तीन हजार रुपैंया रखा गया है । महँगाई शीर चढ कर बोल ही रही है । अब बैल कि तरह यह ईम्बोस्ड नंबर भी आपको मारेगा । ईससे अच्छा तो यह होता कि सरकार अपने अवाम को एक ही बार में मुसल में डाल कर पीस डालें । आखिर में महंगाई रोज पीस ही रही है । एक हि दिन में पीस कर किमा बना दो हम सभी का । कमसेकम यह हर दिन के सरकार के रवैये से तो छुटकारा मिलेगा ।
धान के बीज बोने का मौसम आ गया है । किसान बीज, मल और सिंचाई न पा कर हाहाकार कर रहा है । ऐसे समय में यह मेढक जैसी सरकार बजट का बेसुरा राग से टर्र-टर्र कर रही है । और जले में नमक छिड्कने जैसा किसानों को ईस बजट से पेन्शन देनें का भी एलान किया गया है । किसान का खेत बंजर या सुखा रहने का मतलम है हम जैसे लाखों लोगो का अन्न से दूरी । खालि पेट में पेन्शन का झुनझुना ले कर किसान क्या करेगा ? दे सकते हो तो बीज, मल और सिंचाई में अनुदान दो । पर ईस देश में किसी सह्रदयी ने बुरे वक्त के लिए धान का बीज जमा कर के रखा हो तो उसे भी ईस देश का प्रशासन अवैध करार दे कर गढ्ढे में डाल देता है । लाखों धन धान न बीज पाया न पेट में किसी के अन्न बन कर गया । गया भी तो गढ्ढे में । ईससे सरकार की गढ्ढे जैसी खुराफाती सोच का पता चलता है । भला धान भी अवैध होता है ? भुखे रह लो पर अवैध धान नही वैध रुप से आयात किया गया मंहगा चावल खाओ और सरकार नाम के कसाई का गुन गाओ ।
‘छुछुदंर के शीर में चमेली का तेल’ तो सुना था पर किसानों के लिए पेन्शन पहली बार सुना है । तब किसान क्यों खेत में बुआई कटाई करेगें जब बैठे-बैठे पेन्शन लेना ही है । पडा रहने दो खेत को उगने दो घांस हो जाने दो बंजर । तब किसान भी अपनी मर्जी से खेतों को प्लटिंग कर के बेच देगें और पैसे कमा कर ऐश करेंगे । पेट भरने के लिए चीन से प्लास्टिक का चावल आयात कर लो और खालो । किसान भी खुश, सरकार भी खुश और चीन भी । क्यो कोई मेहनत कर के ईस धरति को हराभरा करने की जहमत उठाए ? सरकार वृद्ध भत्ता की तरह पेन्शन दे कर आपकी सब जख्मों पर दवा लगा ही रही है । राजकोष खूला है दोनों हाथों से लुटते रहो ।
जिस देश में कृषि कर्म के लिए किसानों को कोई रियायत नहीं उस देश में उस देश में.लंपट सरकार अपनी कुर्सी बचाने के लिए कोई भी कु-कर्म करने को तैयार है । ईसी लिए तो अत्याधुनिकता और सुविधा के नाम पर अनावश्यक ईम्बोस्ड नंबर प्लेट को देश के नागरिकों के गले में जबरजस्ति लटकाया जा रहा है । एक ढंग का राष्ट्रीय परिचयपत्र तो अभी तक बना कर नागरिकों को बांटा नहीं गया उस पर ईम्बोस्ड नंबर सर मुंडाते ही ओले की तरह आ टपका है । ईस ईम्बोस्ड नंबर से अर्बौं रुपैंया सरकारी खजाने में जाएगी जिसे सांसद नाम के संसद के खेत के किडे चाट जाएगें । पैसा कमाने का यह नंया खेल है जो नेतागिरी का खोल ओढे दलालों द्वारा कमिशन के लिए खेला जा रहा है ।
सरकार यह भी कह रही है कि जिसका खेत बंजर या खालि रहेगा उससे एक लाख रुपैंया जुर्माना करवाया जाएगा । अब खेत बचे ही कितने हैं और जो बचे हैं उनमें तो पहले से ही ईंटा भट्टा और घर बनाया जा रहा है । एक तरफ आप किसानों को खेति के लिए.कोई अनुदान नहीं दोगे और दुसरी तरफ आप ही खेत खालि रहने पर जुर्माना भी लगाओगे ? ऐसा तो लोग अपने सौतेले बच्चे के साथ भी नहीं. करते । यह कैसा देश और नीति नियम है जंहा किसानों के लिए अनुदान से जरूरी यह वाहियात ईम्बोस्ड नंबर है ? क्या.ईम्बोस्ड नंबर पेट भरेगा ? हां भरेगा न चोट्टा सरकार और उसके चम्चाशास्त्री नेताओं का । यह देश को वास्तव में नेता नाम के दलालों ने दलदल बना दिया है जंहा जनता के लिए मंहगाई का फिसलन.ही बचा है । यदि ईस देश की सरकार में.थोडी सी भी नैतिकता बची होती तो वह किसानों के लिए मल को प्राथमिकता देती न कि ईम्बोस्ड नंबर को जरुरी बनाती । यह ईम्बोस्ड नंबर कुत्ते गले में बांधी जाने वाली पट्टे से ज्यादा नहीं है । किसान अन्नपूर्ण है पर सरकार उसी को अपूर्ण कर रही है । मल दो और.इम्बोस्ड नंबर को अपने गले में बांध लो । क्यों की याद रहे जो सरकार अपने देश के नागरिकों का ख्याल नहीं रखती वह कुत्ते से भी बदतर है ।और मोटाने के लिए कोई न कोई छिद्र ढूंढ ही लेते है । और अब ईन राजनीतिक दलों के दलालों ने नंया छिद्र ढुंढा है जिसका नाम है ‘ईम्बोस्ड नंबर’ ।
देश में सडकों के हालात जर्जर है, पुरानी और खटारा गाडी हर दिन सडकों पर लीला दिखा कर ईंसानों की ईहलीला समाप्त कर देती है । ईस देश का जमीन ही नहीं आसमान भी सुरक्षित नहीं है तभी तो पुराने आउटडेटेड विमानों को आसमान में कलाबाजी करने दिया जाता है । जिसका नतिजा यह होता है कि ऐसे जर्जर विमानों में सवार यात्री आसमान से ही परमधाम चले जाते हैं । न जमीन न आसमान सुरक्षित है । ईंसान जाए तो जाए कंहा ? और सरकार नाम का गिद्ध अपने नागरिकों को नोचती ही रहती है । अब ईस गिद्ध सरकार ने अपने कथित मुर्दा नागरिकों को नोचने के लिए ईम्बोस्ड नंबर का जाल फेंका है । जो ईम्बोस्ड नंबर देश के ईस दुरावस्था के समय जरुरी नहीं हे पर ईसको सांस कि तरह जरुरी बना कर अपने नागरिकों को लुटने का नंया जरिया बनाया जा रहा है । सडक खस्ताहाल है उसका मरम्मत करने पर ध्यान नहीं है पर अपने सवारी साधनों.में.ईम्बोस्ड नंबर लगवाना जरुरी है । वह भी मंहगे दामों में सरकार के कहे रेट पर । जो.ईम्बोस्ड नंबर भारत में मामुली पांच सो में आ जाता है उसका मूल्य. उससे छह गूना ज्यादा तीन हजार रुपैंया रखा गया है । महँगाई शीर चढ कर बोल ही रही है । अब बैल कि तरह यह ईम्बोस्ड नंबर भी आपको मारेगा । ईससे अच्छा तो यह होता कि सरकार अपने अवाम को एक ही बार में मुसल में डाल कर पीस डालें । आखिर में महंगाई रोज पीस ही रही है । एक हि दिन में पीस कर किमा बना दो हम सभी का । कमसेकम यह हर दिन के सरकार के रवैये से तो छुटकारा मिलेगा ।
धान के बीज बोने का मौसम आ गया है । किसान बीज, मल और सिंचाई न पा कर हाहाकार कर रहा है । ऐसे समय में यह मेढक जैसी सरकार बजट का बेसुरा राग से टर्र-टर्र कर रही है । और जले में नमक छिड्कने जैसा किसानों को ईस बजट से पेन्शन देनें का भी एलान किया गया है । किसान का खेत बंजर या सुखा रहने का मतलम है हम जैसे लाखों लोगो का अन्न से दूरी । खालि पेट में पेन्शन का झुनझुना ले कर किसान क्या करेगा ? दे सकते हो तो बीज, मल और सिंचाई में अनुदान दो । पर ईस देश में किसी सह्रदयी ने बुरे वक्त के लिए धान का बीज जमा कर के रखा हो तो उसे भी ईस देश का प्रशासन अवैध करार दे कर गढ्ढे में डाल देता है । लाखों धन धान न बीज पाया न पेट में किसी के अन्न बन कर गया । गया भी तो गढ्ढे में । ईससे सरकार की गढ्ढे जैसी खुराफाती सोच का पता चलता है । भला धान भी अवैध होता है ? भुखे रह लो पर अवैध धान नही वैध रुप से आयात किया गया मंहगा चावल खाओ और सरकार नाम के कसाई का गुन गाओ ।
‘छुछुदंर के शीर में चमेली का तेल’ तो सुना था पर किसानों के लिए पेन्शन पहली बार सुना है । तब किसान क्यों खेत में बुआई कटाई करेगें जब बैठे-बैठे पेन्शन लेना ही है । पडा रहने दो खेत को उगने दो घांस हो जाने दो बंजर । तब किसान भी अपनी मर्जी से खेतों को प्लटिंग कर के बेच देगें और पैसे कमा कर ऐश करेंगे । पेट भरने के लिए चीन से प्लास्टिक का चावल आयात कर लो और खालो । किसान भी खुश, सरकार भी खुश और चीन भी । क्यो कोई मेहनत कर के ईस धरति को हराभरा करने की जहमत उठाए ? सरकार वृद्ध भत्ता की तरह पेन्शन दे कर आपकी सब जख्मों पर दवा लगा ही रही है । राजकोष खूला है दोनों हाथों से लुटते रहो ।
जिस देश में कृषि कर्म के लिए किसानों को कोई रियायत नहीं उस देश में उस देश में.लंपट सरकार अपनी कुर्सी बचाने के लिए कोई भी कु-कर्म करने को तैयार है । ईसी लिए तो अत्याधुनिकता और सुविधा के नाम पर अनावश्यक ईम्बोस्ड नंबर प्लेट को देश के नागरिकों के गले में जबरजस्ति लटकाया जा रहा है । एक ढंग का राष्ट्रीय परिचयपत्र तो अभी तक बना कर नागरिकों को बांटा नहीं गया उस पर ईम्बोस्ड नंबर सर मुंडाते ही ओले की तरह आ टपका है । ईस ईम्बोस्ड नंबर से अर्बौं रुपैंया सरकारी खजाने में जाएगी जिसे सांसद नाम के संसद के खेत के किडे चाट जाएगें । पैसा कमाने का यह नंया खेल है जो नेतागिरी का खोल ओढे दलालों द्वारा कमिशन के लिए खेला जा रहा है ।
सरकार यह भी कह रही है कि जिसका खेत बंजर या खालि रहेगा उससे एक लाख रुपैंया जुर्माना करवाया जाएगा । अब खेत बचे ही कितने हैं और जो बचे हैं उनमें तो पहले से ही ईंटा भट्टा और घर बनाया जा रहा है । एक तरफ आप किसानों को खेति के लिए.कोई अनुदान नहीं दोगे और दुसरी तरफ आप ही खेत खालि रहने पर जुर्माना भी लगाओगे ? ऐसा तो लोग अपने सौतेले बच्चे के साथ भी नहीं. करते । यह कैसा देश और नीति नियम है जंहा किसानों के लिए अनुदान से जरूरी यह वाहियात ईम्बोस्ड नंबर है ? क्या.ईम्बोस्ड नंबर पेट भरेगा ? हां भरेगा न चोट्टा सरकार और उसके चम्चाशास्त्री नेताओं का । यह देश को वास्तव में नेता नाम के दलालों ने दलदल बना दिया है जंहा जनता के लिए मंहगाई का फिसलन.ही बचा है । यदि ईस देश की सरकार में.थोडी सी भी नैतिकता बची होती तो वह किसानों के लिए मल को प्राथमिकता देती न कि ईम्बोस्ड नंबर को जरुरी बनाती । यह ईम्बोस्ड नंबर कुत्ते गले में बांधी जाने वाली पट्टे से ज्यादा नहीं है । किसान अन्नपूर्ण है पर सरकार उसी को अपूर्ण कर रही है । मल दो और.इम्बोस्ड नंबर को अपने गले में बांध लो । क्यों की याद रहे जो सरकार अपने देश के नागरिकों का ख्याल नहीं रखती वह कुत्ते से भी बदतर है ।

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