वतन जलाने वाले : विनोद शर्मा वेणु
वतन जलाने वाले
वतन जलाने वाले कैसे वफा निभाने पायेंगे
आग लगाने वाले कैसे अग्नि वीर बन पायेंगे
आधी रोटी खा कर बच्चे देश बचाने वाले थे
किसने जहर हवा में घोला वो तो भोले भाले थे
शैतानों की करतूतों से आहत सेना बहुत हुई
सीमा पर तनती बंदूकें अपनों के आगे बंद हुई
वतन पे मिटने वाले ही भारत को माता कहते हैं
अटल रहे जब देश का झण्डा तभी चैन से रहते हैं
जलते वतन को देखके यूं दिल में कसक सी उठती है
अंधा कानून और बहरी सत्ता देखो कैसे सिसकती है
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित

धर्मशाला रोड़
जोगबनी अररिया बिहार
Mo. 8292621177
W. App 8107161177
संकलन
माला मिश्रा जोगबनी अररिया ।


