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२५ साल के बाद ओली ने कहा– ‘महाकाली संधी में कमजोरी हुई है’

 
केपीशर्मा ओली/फाईल तस्वीर

काठमांडू, २ अगस्त । संधी सम्पन्न होने के लगभग २५ साल बाद नेकपा एमाले के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने कहा है कि महाकाली संधी में कमजोरी हुई है । वि.सं. २०५३ साल में नेपाल–भारत बीच सम्पन्न महाकाली संधी के लिए अग्रसरता लिने वाले प्रमुख पात्रों में से एक केपीशर्मा ओली भी हैं । सम्झौता के २५ साल बाद सोमबार काठमांडू में आयोजित उक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उक्त संधी में कमजोरी हुई है, नेपाल को कमजोर बनाकर संधी की गई है ।
पूर्व जलस्रोत सचिव द्वारिकानाथ ढुंगाना द्वारा लिखित पुस्तका लोकर्पण समारोह को सम्बोधन करते हुए एमाले अध्यक्ष ओली ने कहा– ‘पहले से ही नीचले स्थान में स्थित शारदा नहर संचालित था, इसके संबंध में हम लोगों को पता नहीं था । उस समय चर्चा में भी नहीं था, जिसके चलते कन्जम्टिभ वाटर क्या है ? इसके संबंध में आवश्यकता के अनुसार चर्चा भी नहीं हो पाया । कई सवालों में ल्याप्सेस (कमजोरी) हो गई ।’
उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल की सार्वभौम सत्ता के विरुद्ध नेपाल की भूमि में बांध निर्माण नहीं होना चाहिए था, लेकिन हो गया । उन्होंने आगे कहा– ‘लेकिन बांध निर्माण करना आवश्यक था, इसीलिए २.९ हेक्टर जमीन भारत को दे दी गई, जो गलत था ।’ अध्यक्ष ओली ने यह भी कहा कि उनकी प्रधानमन्त्रित्वकाल में इस विषय को लेकर भारत के साथ बार्ता भी हुई है, कुछ पक्षों में सुधार की प्रतिबद्धता भी हुई है । अध्यक्ष ओली ने कहा कि उक्त परियोजना में पानी और बिजली में ५०–५० प्रतिशत की हिस्सेदारी होना चाहिए ।
स्मरणीय है, वि.सं. २०५३ साल में सम्पन्न महाकाली संधी के कारण ही उस समय नेकपा एमाले पार्टी विभाजित हो गई थी । ओली पक्षधर बहुमत सदस्य संधी के पक्ष में थे, सीपी मैनाली और वामदेव गौतम जैसे नेता संधी के विपक्ष में थे ।

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