कचरामय काठमांडू, क्या बालेन साह निजात दिला पाएंगे ? : कंचना झा
कंचना झा, काठमांडू 17 अगस्त। कभी बर्फील हवाओं का असर दिखता था काठमांडू उपत्यका में आजकल कूड़े कचरे की बदबू आती है काठमांडू उपत्यका से । आजकल आप काठमांडू के किसी भी गली, कूचे, सड़क या किसी मोहल्ले से निकले आपको कचरा, कचरा और कचरा ही दिखेगा अर्थात् कचरामय काठमांडू ।
बरसात के महीने को हम प्रकृति से जोड़ दें तो थोड़ी देर के लिए समस्या है जैसे पानी का जम जाना, मच्छड़ ,मक्खी का आना , ये सभी समस्याऐं हैं जिनपर हर वर्ष प्रश्न उठाये जाते हैं और किसी तरह हम निजात भी पा जाते हैं । बरसात के महीने में मच्छड़ का आना स्वाभाविक है उसके लिए बहुत तरह के छिड़काव किए जा सकते हैं लेकिन ये काठमांडू नेपाल है जहाँ जीवन से बढ़कर लोगों के लिए पैसा पद और पावर काम करता है क्योंकि ये पैसा पद और पावर किसी आम नागरिक के लिए नहीं है ये सबकुछ है अपने लिए , अपने परिवार और संगे संबंधियों के लिए । आम नागरिक की समस्या से किसी को कोई सरोकार नहीं है । अभी बहुत से समस्याओं से काठमांडू जुझ ही रहा है कि उपर से एक और बहुत बड़ी समस्या आन पड़ी – कूड़े कचरे की समस्या । सड़क पर जमा कचरा, बारिश के कारण सड़क पर आ गया और धीरे धीरे राजधानी के पीने वाला पानी में मिल गया जिसके कारण राजधानी में हैजा का प्रकोप बढ़ रहा है । बहुत से लोग डेंगु के चपेट में हैं । दुषित पानी की वजह से होने वाले जन्डीस, टाइफाइड के रोगी भी लगातार बढ़ रहें हैं । आम नागरिकों की बेचैनी अभी देखने लायक है । चारों ओर इसी बात की चर्चा हो रही है कि कब आएगा कूड़ा कचरा वाला ?
बालेन साह जब काठमांडू के मेयर बने तो लोगों को उनसे बहुत आशाऐं और उम्मीदें थी कि कुछ तो काठमांडू उपत्यका के लिए वो करेंगे । उन्होंने अपनी प्रतिबद्धता भी जताई थी कि वो काठमांडू में कुड़े कचरे का व्यवस्थापन करेंगे । हलांकि आम नागरिको की ये सोच पहले से ही बनी थी कि करोड़ों करोड़ का खेल है ये कूड़ा कचरा । कैसे बालेन साह इससे निजात दिलवाऐंगे काठमांडूवासियों को ? कूड़ा कचरा नहीं उठाने से लोग बीमार होने लगे हैं । काठमांडू के गली, चौक चौराहे, सड़कों की बात छोड़ दें यहाँ तो घर घर दो तीन बोरा कूड़ा कचरा रखा हुुआ है जहाँ से बदबू आती है । बच्चें घर में बैठकर खाना नहीं खा पाते ।

रोज रात को सोते समय ये सोच बना कर सोती हूँ कि हे भगवान सुबह कूड़ा वाला आए सीटी बजाए और हम अपने घरों का कूड़ा कचरा उसे दे और कुछ दिनों के लिए चैन की सांस लें । वैसे और जगहों की बात नहीं कर सकती लेकिन बल्खु के प्रत्येक घर में जितने भाड़ेदार होते हैं सभी से प्रत्येक महीने में १०० रुपया लिया जाता है जैसे अगर किसी घर में दो भाड़ेदार और एक मकान मालिक है तो उस घर से ३०० रुपया कुड़ा कचरा वाले को दिया जाता है । उसके अलावे हर तीज त्योहार पर आपकी अपनी ईच्छा से जितना चाहे उन्हें दे सकते हैं । हाँ इसमें भी मनमानी है कि आप १०० से कम नहीं दे सकते । अगर आपने ५० रुपया दिया , एक तो वो लेगा नहीं और कहीं उसने ले लिया तो कुड़ा कचरा वाला कुछ दिन आपसे नाराज हो जाएगा और बहुत दिनो तक आपके घर पर उनकी पैनी नजर रहेगी कि आप कितना कचरा दे रहे हैं ।
पिछले १५ दिन से कूड़ा वाला नहीं आया जिसकी वजह से लोग बहुत परेशान हैं जिस परेशानी की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है । वैसे मेयर साहब जी तोड़ प्रयास कर रहें हैं कि कुछ सुधार हो सके इसी सिलसिले में मंगलवार को वो प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउवा से जाकर मिलें हैं और इस विषय पर बात भी की है । उन्होंने कहा कि सत्तारुढ़ दल ही कूड़ा कचरा व्यवस्थापन में अवरोध पैदा कर रहें हैं । बातचीत के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री से शिकायत की कि धादिंग के धुनवेशी नगरपालिका के सत्तारुढ़ गठबंधन के स्थानीय नेता ने एक बयान जारी कर कचरा प्रबंधन को रोकने की मांग की है । ऐसी अवस्था में एक बात तो तय है कि कुछ राजनीतिक पार्टिया बालेन साह से परेशान हैं उन्हें लगता है कि अगर ये सफल हो गया तो आनेवाले समय में उनका पत्ता साफ होनेवाला है । वो बालेन साह को असफल करना चाहते हैं । करोड़ो–करोड़ो का सवाल है इस कूड़े कचरे पर । बात सिर्फ पैसों की नहीं है यहाँ कचरे पर राजनीति हो रही है । राजनीति करने वाले यह नहीं समझ रहें है कि बालेन को असफल करने के चक्कर में वो जनता की जान से खेल रहें हैं । जरुरी क्या है बालेन को असफल करना या जनता की जान । उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि इसका समाधान जल्द से जल्द हो । ये मानव जीवन की बात है जिसके आगे किसी और बात की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए ।


