Mon. May 25th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

नेपाल-चीन सम्बन्ध कितना करीब ?

 

देश में चीन की वैश्विक सुरक्षा पहल और वैश्विक विकास पहल में  नेपाल की भागीदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं ।  ग्लोबल सिक्योरिटी इनिशिएटिव (जीएसआई) की घोषणा इस वर्ष अप्रैल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बोआओ फोरम के दौरान की थी। हाल में चीनी अधिकारियों ने ये दावा किया है कि नेपाल जीएसआई का समर्थन कर रहा है। लेकिन  विदेश मंत्रालय की तरफ से इस बारे में कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

पूर्व उप प्रधानमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री सुजाता कोइराला ने शेर बहादुर देउबा सरकार से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा। संसद में सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस की इस वरिष्ठ नेता पूछा कि क्या सचमुच देउबा सरकार ने जीएसआई में शामिल होने का फैसला कर लिया है। सरकार की तरफ से इस पर कोई जवाब नहीं आया।

यह भी पढें   विदेशी विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों को विनियमित करने के लिए नई नियमावली लाने की तैयारी

सुजाता कोइराला के यह मुद्दा उठाने के बाद नेपाल के कूटनीतिक हलकों में यह सवाल गरमा गया है। कई विदेश नीति पर्यवेक्षकों और सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस पर अपनी राय जताई है। उनमें इस बात पर लगभग सहमति देखी गई है कि नेपाल को जीएसआई में शामिल होने की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए। विदेश नीति विशेषज्ञ गेजा वागले ने कहा है- ‘चीन या किसी दूसरे देश के मामले में हमारी बुनियादी समझ यह है कि नेपाल को विकास संबंधी पहल में शामिल होना चाहिए, लेकिन सुरक्षा या सैनिक गठबंधनों से नहीं जुड़ना चाहिए।’

यह भी पढें   मधेश प्रदेश के मुख्यमंत्री कृष्ण यादव आज ले रहे हैं विश्वास मत

नेपाली सेना में मेजर जनरल रह चुके पूर्ण सिलवाल ने कहा है कि जिस तरह नेपाल ने अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) में शामिल होने से इनकार कर दिया था, उसी तरह उसे जीएसआई से भी दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा- ‘अमेरिका और चीन एक दूसरे को रोकने की कोशिश कर रहे हैं और चाहते हैं कि दोस्त देश उनकी पहल में शामिल हों। लेकिन हम ऐसा कैसे कर सकते हैं?’

चीन के विदेश उप मंत्री ली येचेंग ने कुछ समय पहले बीजिंग में दिए एक भाषण में कहा था कि जीएसआई के पीछे सुरक्षा संबंधी नया विचार है। ये विचार यह है कि सुरक्षा नीति पारस्परिक सम्मान और अविभाज्य सुरक्षा के सिद्धांत पर आधारित हो, और दीर्घकालिक मकसद से एक वैश्विक सुरक्षा समुदाय का गठन किया जाए। इसका उद्देश्य उस नजरिए को ठुकराना है, जिसमें हर पहल दूसरे को कमजोर करने के लिए की जाती है। विश्लेषकों के मुताबिक ली की ये बातें कथित अमेरिकी नजरिए की आलोचना और उसका चीनी विकल्प पेश करने के चीन के इरादे को जाहिर करती हैं।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *