स्वतंत्र उम्मीदवार अजय द्विवेदी की चर्चा
बीरगंज,चुनावी बिगुल बज चुका है, उम्मीदवार अपनी किस्मत की आजमाइश में लगे हुए है। सब जगह मुख्यतः दोनों गठबंधन में प्रतिस्पर्धा है लेकिन पर्सा क्षेत्र 1 में स्वतंत्र उम्मीदवार अजय द्विवेदी को ब्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। अजय द्विवेदी नामांकन से पहले ही चर्चा और कौतूहल का विषय बने हुए थे, हरेक चौक-चौराहे पर यही चर्चा चल रही थी कि “अजय द्विवेदी चुनाव लड़ेंगे की नहीं… उनको स्वतंत्र उम्मीदवारी देनी चाहिए… अगर वे चुनाव लड़ते है तो वे सबसे उपयुक्त उम्मीदवार होंगे… वे सारे उम्मीदवार पर भारी पड़ेंगे।”
इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए अजय द्विवेदी में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया और उन्हें चुनाव चिन्ह मछली (माछा) मिला। नामांकन के तुरंत बाद ड़ेंगू के चपेट में आने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होने पड़ा। उनके प्रतिद्वंद्वीयों के लिए ये सुनहरा मौका था, वे उनकी अनुपस्थिति का लाभ उठाकर चुनावी बढ़त लेने का प्रयास कर रहे थे लेकिन अजय द्विवेदी की लोकप्रियता के कारण किसी उम्मीदवार को जनसमर्थन नही मिला।
अजय द्विवेदी की लोकप्रियता का आलम ये है कि उनके अस्पताल में रहते समय, स्थानीय लोग स्वस्फूर्त रूप से उनके प्रचार-प्रसार करने लगे, लोग सोशल मिडिया में ख़ुद-ब-ख़ुद उनके पोस्टर बना कर पोस्ट कर रहे है। कई युवा अपने नौकरी- ब्यापार से छुट्टी लेकर उनका साथ देने आए है।
अस्पताल से निकलने के बाद उन्हें कमजोरी है, डॉक्टर ने आराम करने की सलाह दी लेकिन स्थानीय लोगो ने स्वयं कार्यक्रम का आयोजना करके उन्हें बुलाया। अस्वस्थ होने के बावजूद वे परवानीपुर, चोरनी, लालपर्सा, जगरनाथपुर, मनियारी, राधेमाई गए जहाँ जनता का स्नेह और आशीर्वाद मिला। उनका साथ देने और उनके स्वास्थ्य का ख़्याल रखने के लिए उनकी पत्नी डॉ सुषमा तिवारी द्विवेदी हर कदम पर उनके साथ रहती है।
अजय द्विवेदी स्वच्छ छवि के नेता है, वे किसी आडंबर और दिखावें के बग़ैर जनता के बीच रहते है। वे इतने शांत, शौम्य और मृदुभाषी है कि उनकी किसी से अनबन तक नही होती। आज उनकी यही छवि लोगो के लिए जुनून बना हुआ है। उन्हें बालेन साह की तरह जनसमर्थन मिल रहा है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए प्रतिद्वंद्वी साजिश और ख़रीद फ़रोख़्त का षड़यंत्र करने में लगे है।







