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आज मनाया जायेगा भैयादूज एवं चित्रगुप्त पूजा:-

 


सनातन परंपरा में दीपावली पर्व के दूसरे दिन मनाए जाने वाला भैया दूज इस वर्ष ग्रहण एवं अमावस्या के कारण तीसरे दिन आज गुरुवार को प्रातः 7 बजे से गोधन कूट कर मनाया जायेगा। भाई-बहन के प्रेम और स्नेह का प्रतीक माना जाने वाला भाईदूज महापर्व बहुत ही हर्ष के साथ मनाया जाता है। यह पावन पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन बहनों के द्वारा अपने भाईयों को शुभ मुहूर्त में लगाया जाने वाला टीका पूरे साल यम देवता के भय से मुक्त रखते हुए सुख-सौभाग्य प्रदान करता है। भाई की लंबी उम्र के लिए मनाया जाने वाला यह पर्व आज 27 अक्टूबर 2022 गुरुवार को दोपहर 12:45 बजे तक मनाया जायेगा।
आज का टीका का शुभ मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त में प्रात:काल 11:36 से दोपहर 12:24 बजे तक। एवं
सर्वार्थ सिद्ध योग में दोपहर 12:11 से 12:45 बजे तक शुभ रहेगा।
*भाई दूज पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा:-*
पुराणों के अनुसार भगवान सूर्य की पत्नी छाया से यमराज और यमुना जी का जन्म हुआ था। यमुना जी अपने भाई यम के प्रति खूब स्नेह रखती थीं और अक्सर उन्हें अपने घर में भोजन करने के लिए आमंत्रण देती रहती थीं, लेकिन यम देवता अपने कार्य में व्यस्त रहने के कारण उनके पास नहीं पहुंच पाते थे। एक बार जब यमुना जी ने यमराज को अपने घर आने का बहुत ज्यादा आग्रह किया तो उन्होंने भी सोचा कि सभी का प्राण हरने के कारण उन्हें कोई आमंत्रित नहीं करता है, ऐसे में जब बहन इतने स्नेह से बुला रही है तो क्यों उन उसके आग्रह को मानकर भोजन पर चला जाए। फिर यमुना ने यमराज से अपने मिलन के समय नरक में रह रहे सभी आत्माओं को नरक से मुक्त करने का आग्रह किया।
इसके बाद यम देवता ने नर्क भोग रही आत्माओं काे मुक्त कर दिया और जब वे अपनी बहन के पास पहुंचे तो यमुना जी बहुत खुश हुई। जिस दिन यम यमुना के घर पहुंचे उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि थी। इसके बाद यमुना जी ने यम देवता का तिलक करके स्वागत किया और उन्हें भोजन कराया। साथ ही साथ यम देवता से वरदान मांंगा कि जो बहन अपने भाई को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर घर में बुलाकर टीका करें और उसे भोजन कराए, उसके भाई को यम का कोई भय न रहे. तब यमराज ने उन्हें तथास्तु कहकर यमुना को उपहार देकर यमलोक वापस चले गये।
*भाई दूज दिन करें ये अचूक उपाय*
भाई दूज के पर्व से जुड़ी मान्यता है कि यदि कोई भाई अपनी बहन के साथ इस दिन यमुना में स्नान करता है तो उनके बीच प्रेम और स्नेह बना रहता है और भाई को पूरे साल यम देवता का कोई भय नहीं रहता है। भाईदूज के दिन शाम के समय यम के नाम से चौमुखा दीया भी घर के मुख्य द्वार पर रखा जाता है।

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भाईदूज पर हमेशा शुभ मुहूर्त में ही अपने भाई का टीका करें और राहुकाल में टीका नहीं करना चाहिए।
भाई दूज वाले दिन बहनों और भाईयों को काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।
भाई को टीका करने से पहले बहनों को कुछ भी अन्न नहीं ग्रहण करना चाहिए।
भाई को टीका हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही करना चाहिए। भूलकर भी दक्षिण दिशा की तरफ मुखकर करके अपने भाई को टीका न लगाएं।
भाई को टीका लगाते समय उसके सिर पर रुमाल या कोई अन्य वस्त्र ढंकने के लिए अवश्य दें।
भाईदूज वाले दिन भाई या बहन के साथ आपको भूलकर भी झगड़ा नहीं करना चाहिए।
भाईदूज के दिन भाई से जो कुछ भी मिले उसे प्रेम और स्नेह के साथ स्वीकार करना चाहिए। और उसका भूलकर भी अनादर नहीं करना चाहिए।
भैया दूज के पवित्र पर्व पर महादेव सभी भाई बहनों को सभी रोग शोक से बचा कर उत्तम आयु आरोग्यता प्रदान करें।
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*
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