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4 दिसबर रविवार को अश्विनी नक्षत्र एवं परिघ योग में किया जाएगा अगहन का रविवार व्रत: आचार्य राधाकान्त शास्त्री

 

शास्त्रों के अनुसार *रविवार व्रत अगहन मास के शुक्ल पक्ष में पंचमी के बाद प्रारम्भ करने का विधान है।* अतः इससे पहले रविवार व्रत करना सर्वथा निषिद्ध है।
अतः शुद्ध रविवार व्रत 4 दिसबर को किया जाएगा। जिसका स्नान एवं नहाय खाय 3 दिसबर को रेवती में किया जाएगा।
इस के बाद रविवार व्रत आरम्भ हो जाएगा। यह रविवार व्रत सबके लिए सर्वोत्तम है।
*रविवार व्रत :-*
रविवार व्रत भगवान सूर्यदेव की अनुकम्पा प्राप्त करने के लिए किया जाता है। जिस व्यक्ति की जन्मकुण्डली अथवा गोचर मे सूर्य अनिष्टकारी हो ; उसे रविवार व्रत अवश्य करना चाहिए।
रविवार व्रत का आरम्भ विशेषकर सौर्य मास से अगहन, वैशाख, भाद्रपद, एवं माघ मास में किया जाता है।
व्रती को चाहिए कि वह प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प ले। फिर सूर्य देव के मूर्ति या फ़ोटो को गन्धाक्षत आदि से विधिवत पूजन करे।
मूर्ति के अभाव मे सूर्यदेव की ओर देखते हुए उन्हें गन्ध पुष्प आदि अर्पित करे। फिर जल मे लाल पुष्प डालकर सूर्यार्घ्य प्रदान करे। सम्पूर्ण दिन शान्तचित्त होकर परमात्मा का स्मरण करे।
रविवार व्रत मे सूर्यास्त के पूर्व एक बार नमक रहित भोजन लेना चाहिए। यदि केवल फलाहार लेना हो तो भी सूर्यास्त के पूर्व ही लेना चाहिए। इस प्रकार एक से बारह वर्षों तक व्रत करके व्रत उद्यापन करना चाहिए।

रविवार व्रत करने से मनुष्य तेजस्वी, स्वाभिमानी एवं प्रसिद्ध हो जाता है। चर्म रोग, रक्तविकार, नेत्रपीड़ा एवं दीर्घरोग से मुक्ति पाने के लिए रविवार व्रत बहुत लाभकारी माना जाता है। इस व्रत से मनुष्य की सभी कामनायें पूर्ण हो जाती हैं। स्वास्थ्य लाभ के लिए रविवार व्रत रामबाण सदृश प्रभावशाली है।
रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। मान-सम्मान, धन-यश तथा उत्तम स्वास्थ्य मिलता है।
प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त हो, स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्य को जलदान कर आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ एवं इसका स्मरण करें।
सूर्यास्त के पूर्व एक समय भोजन करें।
भोजन सूर्य प्रकाश रहते ही करें।
इस दिन नमकीन या तेल युक्त भोजन ना करें।
इस दिन उपासक को तेल से निर्मित या नमकीन खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। और सूर्य अस्त होने के बाद भोजन नहीं करना चाहिए।
यदि किसी कारणवश सूर्य अस्त हो जाए और व्रत करने वाला भोजन न कर पाए तो अगले दिन सूर्योदय तक वह निराहार रहे तथा फिर स्नानादि से निवृत्त होकर, सूर्य भगवान को जल देकर, उनका पूजन स्मरण करने के बाद ही भोजन ग्रहण करे।
शास्त्रों के अनुसार जिन व्यक्तियों की कुण्डली में सूर्य पीडित अवस्था में हो, उन व्यक्तियों के लिये रविवार का व्रत करना विशेष रूप से लाभकारी रहता है। इसके अतिरिक्त रविवार का व्रत आत्मविश्वास मे वृद्धि करने के लिये भी किया जाता है। इस व्रत के स्वामी सूर्य देव है ।
नवग्रहों में सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिये रविवार का व्रत किया जाता है। यह व्रत अच्छा स्वास्थय व तेजस्विता देता है। शास्त्रों में ग्रहों की शान्ति करने के लिये व्रत के अतिरिक्त पूजन, दान- स्नान व मंत्र जाप आदि कार्य किये जाते हैं। इनमें से व्रत उपाय को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। पुरे नौ ग्रहों के लिये अलग- अलग वारों का निर्धारण किया गया है। रविवार का व्रत समस्त कामनाओं की सिद्धि, नेत्र रोगों में मी, कुष्ठादि व चर्म रोगों में कमी, आयु व सौभाग्य वृद्धि के लिये किया जाता है।
यह व्रत अगहन, वैशाख, या भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से प्रारम्भ करके कम से कम एक वर्ष और अधिक से अधिक बारह वर्ष के लिये किया जा सकता है
रविवार क्योंकि सूर्य देवता की पूजा का दिन है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से सुख -समृद्धि, धन- संपति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिये इस व्रत का महत्व कहा गया है। रविवार का व्रत करने से व्यक्ति कि सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस उपवास करने वाले व्यक्ति को मान-सम्मान, धन, यश और साथ ही उतम स्वास्थय भी प्राप होता है। रविवार के व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है। तथा स्त्रियों के द्वारा इस व्रत को करने से उनका बांझपन भी दूर करता है। इसके अतिरित्क यह व्रत उपवासक को मोक्ष देने वाला होता है।
*रविवार व्रत विधि-विधान:-*
रविवार के व्रत को करने वाले व्यक्ति को प्रात: काल में उठकर नित्यकर्म क्रियाओं से निवृत होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। घर में किसी एकान्त स्थान में ईशान कोण में भगवान सूर्य देव की स्वर्ण निर्मित मूर्ति या चित्र स्थापित करना चाहिए। इसके बाद गंध, पुष्प, धूप, दीप आदि से भगवान सूर्य देव का पूजन करना चाहिए।
पूजन से पहले व्रत का संकल्प लिया जाता है। दोपहर के समय फिर से भगवान सूर्य को अर्ध्य देकर पूजा करे और कथा करें। और व्रत के दिन केवल दूध चिउड़ा शक्कर के साथ भोजन करें। रविवार के व्रत के विषय में यह कहा जाता है कि इस व्रत को सूर्य अस्त के समय ही समाप्त किया जाता है। अगर किसी कारणवश सूर्य अस्त हो जाये और व्रत करने वाला भोजन न कर पाये तो अगले दिन सूर्योदय तक उसे निराहार नहीं रहना चाहिए। अगले दिन भी स्नानादि से निवृत होकर, सूर्य भगवान को जल देकर, उनका स्मरण करने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए ,
भगवान भास्कर आपको शौर्य, पराक्रम , आरोग्यता एवं दिव्य तेज प्रदान करें।
आपके साफल्यता लिए हमारी हार्दिक शुभकामना…
*भगवान भास्कर,श्री हरि विष्णु एवं महादेव इस रविवार व्रत करने वाले अपने सभी भक्तों को उत्तम आयु आरोग्यता, सुख सम्पदा, संतति संतान, अध्यात्म सुख एवं अपने चरणों में भक्ति स्थान प्रदान करें।*
*आप सबके सभी मनोकामना पूर्णता और सर्व साफल्यता लिए महादेव से आराकाशा की विशेष प्रार्थना, और आपके सुखी जीवन की हार्दिक शुभकामना…*
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*हरि ॐ गुरुदेव..!*l

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ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*शुभम बिहार यज्ञ ज्योतिष आश्रम*
*रजिस्टार कालोनी, पश्चिम करगहिया रोड वार्ड-2, कालीबाग, पश्चिम चम्पारण बेतिया, 845438,*
*व्हाट्सअप से संपर्क नं. – 9431093636*

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*ज्योतिषाचार्य आचार्य राधाकान्त शास्त्री*
*🌹शुभम बिहार यज्ञ ज्योतिष आश्रम🌹*
*राजिस्टार कालोनी, पश्चिम करगहिया रोड, वार्ड:- 2, नजदीक कालीबाग OP थाना, बेतिया पश्चिम चम्पारण, बिहार, 845449,*
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*सहायक शिक्षक:- राजकीयकृत युगल प्रसाद +2 उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भैसही, चनपटिया,बेतिया बिहार*
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