बालेन ने दी ओली को चेतावनी

काठमांडू, १३ मंसिर –काठमांडू महानगरपालिका ने अनाधिकृत रुप में बने हुए काठमांडू के थापाथली स्थित बागमती नदी के किनारे बसे सुकुम्बासी बस्ती के भौतिक संरचनाओं को हटाने के अभियान अन्तर्गत सोमबार को उस बस्ती में डोजर चलाना शुरु किया था । सुकुमवासियों ने इसका खुलकर विरोध प्रदर्शन किया है जिसमें सोमबार को ही ३७ लोग घायल हो गए हैं ।
आज सुबह काठमांडू महानगरपालिका के कार्यालय के आगे प्रदर्शन किया । बात अब यही नहीं ठहरी है इसने एक राजनीतिक रुप ले लिया है । जहाँ नेकपा एमाले के अध्यक्ष केपी ओली ने भी अपना सुझाव देना शुरु किया है । अध्यक्ष ओली ने कहा कि – बल प्रयोग द्वारा सुकुम्बासी समस्या का समाधान नहीं होगा । उन्होंने कहा कि नदी किनारा में टहरा बनाकर रहने वाले सुकुम्बासी शत्रु नहीं है । उनपर बल प्रयोग करना गलत है । लोकतन्त्र में समस्या समाधान के तरिका बल प्रयोग नहीं है ।
ओली के इस कथन का मेयर बालेन ने भी बहुत ही कड़े शब्दों में जबाब दिया है । अपने जबाब में बालेन ने लिखा है कि आपके द्वारा इसी तरह की धारणा का आना सामान्य विषय है क्योंकि २०४७ से यहाँ १४ आयोग गठन होने के बाद भी काठमांडू के सुकुम्बासी समस्या का समाधान नहीं कर सके । बालेन ने लिखा है ‘मन्त्री और बार –बार उसपर भी दो तिहाई की सरकार के प्रधानमन्त्री हुए लेकिन क्यों उन्होंने सुकुम्बासी के जो उनलोगों ने ३२ जाड़े बिताए वो नहीं देख पाए । सुकुम्बासी तो आपके लिए भोट बैंक मात्र रहे हैं । आपने उन्हें गुठी आन्दोलन जैसे आपने स्वार्थ के लिए प्रयोग किया । वो भी राजनीतिक स्वार्थवश ।
बालेन ने ओली से प्रश्न किया कि जनता, नदी नाला और नेवा सभ्यता से यदि प्रेम है तो ओली के नेतृत्व में लुँहिटी (सुन्धारा) को समाप्त कर श्वेत टावर क्यों खड़ा किया ?
मेयर बालेन ने ओली को चेतावनी देते हुए कहा कि – अब परिस्थिति बदल चुकी है । अगर चाहे तो सहयोग करे लेकिन अगर सहयोग नहीं कर सकते हैं तो किसी के विरुद्ध में किसी का प्रयाग करने की कुचेष्टा नहीं करें ।

