ह्यूमन ट्रैफिकिंग : नेपाल में भयावह व चिंतनीय गति से बढ़ रहा है : अजय प्रताप गुप्त
* वर्ष भर में ट्रैफिकर्स के चंगुल से 482 युवतियों को बचाया गया
* अवैध रूप से कतर, दोहा, ओमान, टर्की,दुबई व यूएई भेज बना देते हैं घरेलू दास
* डांस बार व वेश्यावृत्ति के दलदल में देते है झोंक, करते हैं अंगों की बिक्री
* वर्ष में करीब 20 हजार युवतियां होती हैं असुरक्षित विस्थापन का शिकार
*अजय प्रताप गुप्त* *कपिलवस्तु* (लुम्बिनी प्रदेश)।
नेपाल से भारत की ओर मानव तस्करी का मामला तीव्रतम व चिंतनीय रूप से बढ़ रहा है।बीते वर्षभर में कृष्णनगर-बढनी जैसे छोटे बॉर्डर से ही 482 से अधिक युवतियों को ट्रैफिकर्स के चंगुल से बचाया गया।ट्रैफिकिंग के गति की यह स्थिति सरकारी सरोकार, व्यवस्था एवं बॉर्डर मॉनिटरिंग के शैली पर बड़ा सवाल है।
उल्लेख करते चलें कि विभिन्न खाड़ी देशों व भारतीय महानगरों में डांस व बीयर बार,मसाज व स्पा पार्लर, घरेलू वर्कर , सेक्स वर्कर के रूप में नेपाली किशोरियों की भारी मांग है।ह्यूमन ट्रैफिकिंग के धंधे से जुड़े संगठित अंतरराष्ट्रीय रैकेट्स किडनी आदि अंगों की बिक्री हेतु भी मानव तस्करी करते हैं, भोले भाले नेपाली लोगों को वो अपना शिकार बनाते हैं।भारत मे मानव तस्करी रोकथाम,सुरक्षा और पुनर्वास के कई सरकारी उपायों के बावजूद उक्त घृणित व अमानवीय कृत्यों पर प्रभावी रोक नही लग पा रहा है।नेपाली तंत्र के भी स्थिति के सापेक्ष सक्रिय नही होने से ह्यूमन ट्रैफिकिंग व असुरक्षित विस्थापन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष भर में कृष्णनगर/बढनी जैसे ‘बी’ श्रेणी के बॉर्डर से ही 482 से अधिक किशोरियों/युवतियों को संभावित मानव तस्करी का शिकार होने से बचाने के ताजा आंकड़े हैं।जबकि उक्त बॉर्डर पर ह्यूमन ट्रैफिकिंग को प्रभावी ढंग से रोकने हेतु नेपाली सीमा में 3 समेत 4 एनजीओ सक्रिय हैं,जो अनसेफ माइग्रेशन के प्रति भी लोगो जागरूक करते हैं।
आंकड़ो पर गौर करें तो बीते वर्ष में मानव सेवा संस्थान ‘सेवा’ शाखा बढनी (सिद्धार्थनगर) भारत द्वारा भौतिक चकाचौंध,आकर्षक तलब व विभिन्न प्रलोभनों का शिकार हुए 216 युवतियों को शोषण का शिकार होने से बचाया गया,इसमें 129 मामले एसएसबी के मार्फत नेपाली प्रशासन को सौंपे गये हैं, जबकि 87 मामले भारतीय युवतियों का भी मिला। नेपाल की संस्था “पीआरसी नेपाल” ने वर्ष भर में 266 लोगो को ट्रैफिकिंग का शिकार होने से बचाया,जिसमे हाई रिस्क के 105 केस नेपाल प्रहरी के जिम्मे किये गए। इतना ही नही पीआरसी ने भारत से भी 25 लोगों का रेस्क्यू किया है।वाया भारत खाड़ी देशों में (अवैध रूप से) भेजे जाने हेतु ले जाई गयी 12 युवतियों को दिल्ली के एक अपार्टमेंट से विगत वर्ष छुड़ाकर लाया गया था। केवल एक छोटे से बॉर्डर के उक्त 2 संस्थाओं द्वारा ही वर्ष में 482 लोगों का रेस्क्यू किया गया है तो समूची स्थिति कितनी भयावह होगी अंदाजा लगाना मुश्किल है।जबकि कपिलवस्तु जिले में ही मर्यादपुर-खुनुवा, चाकरचौड़ा बॉर्डर पर भी पीआरसी के साथ ही “आफन्त नेपाल” तथा “साना हाथ” संस्था में भी ट्रैफिकिंग के कई मामले ट्रेस हुए हैं।
*”पीआरसी नेपाल” के क्षेत्रीय संयोजक भूमिराज भट्टराई* ने बताया कि कोविड महामारी के पूर्व कृष्णनगर केंद्र के तथ्यांक को देखें तो वर्ष 2018 में ट्रैफिकिंग के
160 मामला आये,जो वर्ष 2020 में करीब 26 प्रतिशत बढ़कर 209 पहुँच गया।वर्ष 2018 के सापेक्ष 2021 में तो केस 65 प्रतिशत उछाल के साथ 265 तक पहुँच गया है और चालू वर्ष में भी 266 केस हो चुके हैं,जो निश्चित ही गंभीर व भयावह स्थिति को दर्शा रहा है।नेपाल से टूरिस्ट का परमिट लेकर रात्रि में भारत में प्रवेश करने वाली बसों से तथा अनाधिकृत ग्रामीण रास्तों से हो रही आवाजाही से भी ट्रैफिकिंग होने की प्रबल आशंका हैं,जिसकी भी पड़ताल आवश्यक है।
*एजेंसियां को गंभीरता से सहकार्य करना होगा -राजेश मणि*
अनसेफ माइग्रेशन व ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने हेतु इंडो नेपाल बॉर्डर पर सक्रिय मासेसं “सेवा” गोरखपुर के निदेशक राजेश मणि कहते हैं कि “मानव तस्करी ( रोकथाम, सुरक्षा तथा पुनर्वास) बिल व उसके सशक्त प्राविधान के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।इस घृणित, अमानवीय कृत्य को रोकने के लिए जिला, राज्य से लेकर केंद्र सरकार तक की जिम्मेदारी निर्धारित है।गृह मंत्रालय ने एसएसबी के अलावे एनआईए को नोडल के रूप में जिम्मेदारी दी है।जनजागरूकता के साथ ये सब उपाय अमली जामा पहन लें और सहकार्य करें तो प्रभावी रोक लग सकेगा।”
राजेश मणि (निदेशक)
मासेसं “सेवा” गोरखपुर,भारत
*रोजगारोन्मुखी शिक्षा,जनचेतना से ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर लगेगा रोक *साजिदा सिद्दीकी* चैयरपर्सन
सिसा,नेपाल

” ट्रैफिकर भोले-भाले व कमजोर आर्थिक पृष्टभूमि वाले नेपाली जनों को चंगुल में फंसाते है।अनुमानतः खुले बॉर्डर से हर वर्ष करीब 20 हजार से अधिक लोग असुरक्षित विस्थापन का शिकार हो जाते हैं। जनचेतना, सघन निगरानी और सबसे जरूरी रोजगार परक शिक्षा देकर मानव तस्करी के घृणित व्यापार को नियंत्रित/रोका जा सकता है।इससे नारी सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। पारिवारिक बिखराव व अभिभावकत्व की कमी तथा सोशल मीडिया के अति प्रयोग के कारण भी स्थिति भयावहता की ओर है”




