प्रचण्ड की रणनीति प्रधानमंत्री पद
काठमांडू, ४ पुस –
राजनीति में अभी प्रत्येक पद के लिए चर्चा चल रही है । हरेक दल के अध्यक्ष की यही ईच्छा की उन्हें कोई अच्छा सा पद मिल जाए । अब प्रधानमंत्री ही पद की बात की जाए तो कांग्रेस चाहती है कि उसके नेतृत्व में सरकार बने और प्रधानमंत्री एकबार फिर वो ही बने । लेकिन माओवादी की बात करें तो प्रचण्ड को स्वयं प्रधानमंत्री बनना है तो वो इसकी तैयारी में जुटे हैं । इधर राष्ट्रपति विद्यादेवी भण्डारी ने नये सरकार गठन के लिए प्रतिनिधिसभा में प्रतिनिधित्व करने के लिए दलों को ७ दिन का समय दिया है । बस समय सीमा के साथ ही दाहाल ने अपनी रणनीति अनुसार संवाद करना शुरु कर दिया है ।
स्रोत के अनुसार उन्होंने रविवार प्रधानमन्त्री एवं कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवा के निकट नेताओं के साथ संवाद शुरु कर दिया है । साथ ही उन्होंने पार्टी का दूसरे तह के नेताओं के साथ एमाले के भी दूसरे तह के नेताओं के साथ भी संवाद किया है ।
यानी माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ने गठबन्धन के सम्भावित विकल्प को खुला रखा है । अपनी पहली चरण की बात करते हुए उनकी सोच है कि पहले चरण में ही अपने नेतृत्व में सरकार बनाए । पाँचदलीय गठबन्धन के ही बल में प्रधानमन्त्री बनना दाहाल का पहला विकल्प है । उनकी सोच यहाँ तक की है कि अगर कांग्रेस उनकी बात नहीं माती है तो उनके पास दूसरा विकल्प है कि वो एमाले सहित के दलों के साथ मिलकर सरकार बनाएंगे ।
सूत्रों के अनुसार दाहाल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, सभामुख, उपसभामुख और मुख्यमन्त्री के लिए जो भाग भण्डा है उसे पाने के पक्ष में नहीं हैं । उनका मानना है कि राष्ट्रपति और सभामुख कांग्रेस को भी देने से होगा लेकिन प्रधानमन्त्री पद लेने की उनकी रणनीति साफ दिख रही है ।
देउवा स्वयं अपने नेतृत्व में सरकार बनाना चाहते हैं । ऐसे में वो दाहाल के प्रस्ताव पर सकारात्मक नहीं हैं । यद्यपि देउवा और दाहाल के बीच राज्यशक्ति बांटवारे में ‘विश्वासपूर्ण’ संवाद हो चुका है । ऐसा भी स्ुत्रों से पता चला है । दाहाल का कहना है कि उनके साथ प्रतिनिधिसभा के ६० सांसदों का समर्थन है । इसलिए वो कांग्रेस पर दबाब देने और इसी के बल में वैकल्पिक गठबन्धन बनाने की रणनीति तैयार कर रहे हैं । माओवादी के ३२, एकीकृत समाजवादी के १०, जसपा के १२, जनमोर्चा के एक, जनमत पार्टी के ६, नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के ३ और प्रभु साह के साथ ही २ स्वतन्त्र सांसदों का समर्थन उनके साथ है । लेकिन जिनके समर्थन की बात दाहाल ने की हैं उन सभी दलों ने किसी तरह का कोई निर्णय अभी तक नहीं दिया है ।
दाहाल ने रविवार को हुई पार्टी पदाधिकारी बैठक और नवनिर्वाचित सांसद की बैठक में भी स्पष्ट संकेत करते हुए कहा कि –राष्ट्रीय राजनीति में माओवादी की ही भूमिका मुख्य रहेंगी । उन्होंने प्रधानमंत्री पद का दाबेदार स्वयं को बताया ।
माओवादी सचिव गणेश साह ने भी कहा कि प्रधानमन्त्री में दाहाल का दाबा करना स्वाभाविक ही है । हम गठबन्धन को निरन्तरता देने के पक्ष में हैं । और ऐसे में अगर माओवादी अब सरकार का नेतृत्व पाती है तो ही गठबन्धन और हमारा अपना जो एजेन्डा है उसका कार्यान्वयन करना सम्भव होगा ।
एक तरह से कहें तो चल रही है राजनीतिक रस्साकशी प्रधानमंत्री पद के लिए । इसमें कोन कितना सफल होगा ये तो समय ही बताएगा

