मुस्लिम भी मधेशी क्लस्टर में ही रहना चाहते हैं, गृहमंत्रालय को लिखा पत्र
काठमांडू, २४ पुस –
मुस्लिम समुदाय मधेशी क्लस्टर में नहीं आते हैं यह कहते आ रहे मुस्लिम आयोग अब जाकर कह रही है कि इस समुदाय को मधेशी कोटा में ही आरक्षण को निरन्तरता देने की मांग की है । मुस्लिम आयोग ने गृह मन्त्रालय को पत्र लिखकर किए गए इस मांग की चारों तरफ आलोचना हो रही है ।
मधेशी आयोग ने मधेश में रहने वाले सभी जात जाति का क्लस्टर तैयार करके उसका प्रतिवेदन सरकार को दे दिया था । इसी क्लस्टर में मुस्लिम को भी मधेशी क्लस्टर में ही रखा था । मधेशी आयोग ने मुस्लिम को मधेशी क्लस्टर में रखने के बाद मुस्लिम आयोग ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि ‘मुस्लिम मधेशी नहीं है उनकी अलग ही क्लस्टर और पहचान है ।
मुस्लिम आयोग के अध्यक्ष समिम मियाँ अन्सारी तथा इसके सदस्यों ने इस निर्णय का व्यापक विरोध किया । मधेसी आयोग के प्रतिवेदन आने के बाद अन्सारी ने अपने फेसबुक में लिखा कि –
‘मधेशी आयोग ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर थारु और मुस्लिम को मधेशी की सूची में रखने का वार्षिक प्रतिवेदन के द्वारा किए गए सिफारिस गलत और खेदजनक है ।
उनका कहना था कि नेपाल के संविधान २०७२ जारी होने के पहले ही बहुत कठिन सङ्घर्ष और बहुतों के बलिदान के बाद मुस्लिम और थारु समुदाय ने जिस अधिकार को प्राप्त किया था उसपर हमला का प्रयास किया जा गया है और यह समुदाय तथा लोकतन्त्र पर प्रहार है ।
मधेश एक भूगोल है मुस्लिम और थारु समुदाय मधेश में ही नहीं है वरन वह काठमांडू, तराइ,पहाड़ और हिमाल में भी रहते हैं इस कारण सभी को एक ही बक्से में रखने की कोशिश करना गलत है । मधेशी आयोग को अपनी गलती स्वीकार करनी होगी । मुस्लिम आयोग तथा उसके अन्य सदस्यों के साथ ही थारु आयोग ने भी अपना विरोध जताया था ।
इसके बाद मधेशी आयोग ने प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रीपरिषद् कार्यालय को मङ्सिर २१ गते पत्र भेजकर मुस्लिम तथा थारु को मधेशी समुदाय के क्लस्टर से हटा दिया था । मधेशी आयोग के अध्यक्ष विजयकुमार दत्त ने बताया कि हमारे बार बार समझाने के बाद भी जब वो लोग नहीं माने तब हमने बाध्य होकर मधेशी क्लस्टर से मुस्लिम को हटा दिया था ।
लेकिन मुस्लिम को मधेशी क्लस्टर से हटाने के बाद मुस्लिम आयोग ने पुनः गृह मन्त्रालय को पत्र लिखा है । इस पत्र में लिखा गया है कि –‘निजामती सेवा ऐन, २०४९ में मधेशी समुदाय उल्लेख हुआ है । उसी समय के संवैधानिक व्यवस्था अनुसार ही मधेश में रहने वाले मुस्लिम समुदाय को भी मधेशी में रखा गया है। मधेसी व्यवस्था के अन्तर्गत ही मुस्लिम समेत और उसी अनुसार मुस्लिम समुदाय लोकसेवा में प्रतिस्पर्धा करते आए हैं । हाल तक हुए निजामती सेवा ऐन, २०४९ की कानूनी व्यवस्था के अनुसार मुस्लिम समुदाय को मधेशी व्यवस्था से देते आए सिफारिस हाल में नहीं देने के कारण से लोक सेवा आयोग में प्रतिस्पर्धा करने से वञ्चित होने की अवस्था दिख रही है । इसलिए पहले की ही तरह देती आ रही सिफारिस को निरन्तरता देने की गृह मन्त्रालय और संघीय मामिला प्रशासन मन्त्रालय से अनुरोध करे ।
मधेशी आयोग के अध्यक्ष विजयकुमार दत्त ने मुस्लिम समुदाय भी मधेशी क्लस्टर में ही आते हैं कहकर आयोग ने प्रतिवेदन में समावेश किया था लेकिन मुस्लिम आयोग ने उसका भरपूर विरोध किया । उन्होंने भी बताया कि हमारे बार बार आग्रह करने के बाद भी जब वो नहीं माने तब हमने बाध्य होकर मुस्लिम समुदाय को मधेशी क्लस्टर से हटा दिया है ।
उन्होंने कहा कि यदि कोई मधेशी जाति में नहीं रहना चाहता है, पत्र लिखता है, ज्ञापनपत्र दे रहा है, आन्दोलन करने की चेतावनी देता है तो ऐसे से कोई जबरदस्ती नहीं किया जा सकता है । हमने आयोग में लम्बी बहस और चर्चा के बाद जब मुस्लिम और थारु नहीं माने तब उन्हें मधेशी क्लस्टर से हटाया है । इन समुदायों ने आन्दोलन करने और आयोग की घेराबंदी की चेतावनी दी थी जिससे बाध्य होकर हमने यह कदम बढ़ाई थी ।
अब जाकर मुस्लिम आयोग ने गृह मन्त्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि वो मधेशी क्लस्टर में ही रहना चाहते हैं । यह मांग करते हुए वह सकारात्मक और खुसी का अनुभव कर रहे हैं । लेकिन इसके साथ ही अभी भी मुस्लिम आयोग के कुछ सदस्य इसका विरोध कर रहे हैं ।


