प्रसिद्ध साहित्यकार राम दयाल राकेश द्वारा रचित पुस्तक ‘तारा’ का लोकार्पण
काठमांडू, सावन ९ । मृत्यु एक अटल सत्य है, जिसे कोई भी रोक नहीं सकता । मृत्यु के बाद मानव का भौतिक अस्तित्व समाप्त हो जाता है, पर उसकी स्मृतियाँ सदैव जीवित रहती हैं । ये बातें नेपाल के सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री राम दयाल राकेश ने अपनी पत्नी की स्मृति में व्यक्त किए।
सावन ९ गते (आज) नेपाल के प्रसिद्ध साहित्यकार राम दयाल राकेश द्वारा रचित पुस्तक ‘तारा’ का लोकार्पण किया गया । यह पुस्तक उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी श्रीमती तारा देवी की स्मृति में लिखी है । अपनी पत्नी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि “ तारा ने कभी मुझसे कोई शिकायत नहीं की । न ही हमारे बीच कभी किसी तरह का कोई झगड़ा हुआ । मेरे लेखनी की हमेशा तारा ने सराहना की । बहुत कम उम्र में हमदोनों का विवाह हुआ, हमने साथ मिलकर जीवन के बहुत ही अच्छे दिन बिताए । आज वो तारा और राम की जोड़ी, जिसमें तारा आकाश में चली गई और राम धरती पर है, लेकिन तारा जीवित रहेगी सदैव मेरे स्मरण चित्र में । ”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सासंद माननीय अमरेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि – साहित्यकार राम दयाल राकेश उनके अभिभावक समान हैं । वे केवल नेपाली ही नहीं वरन हिन्दी, मैथिली तथा अंग्रेजी भाषाओं के भी सशक्त साहित्यकार हैं । उन्होंने साहित्य को लेकर कहा कि – साहित्य के बिना राज्य अधूरा है, समाज अधूरा है । साहित्य के बिना जीवन ही अधूरा है । साहित्य समाज का आईना होता है ।
आज ही साहित्यकार राम दयाल राकेश का जन्मदिन भी है । पुस्तक लोकार्पण के बाद उन्होंने अपने जन्मदिन के अवसर पर केक काटा और वहाँ उपस्थित सभी लोगों ने हार्दिक उन्हें बधाईयाँ दीं ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय अमरेश सिंह के अलावे कार्यक्रम के सभापति डॉ. तुलसी भट्टराई, डॉ पद्मा अर्याल, त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी केन्द्रीय विभाग की विभागाध्यक्ष तथा हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका की संपादक डॉ. श्वेता दीप्ति, हिमालिनी के प्रबंध निदेशक र्ई. सच्चिानंद मिश्र ,साहित्यकार तथा पत्रकार विजेता चौधरी, साहित्यकार संगीता ठाकुर तथा अन्य विद्वतजनों की उपस्थिति थी ।













