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कुछ ऐसा है विनोद चौधरी द्वारा बनाया गया नमूना बस्ती नाम्डोललिङ

 

काठमान्डू

 

बैसाख 12, 072 के भीषण भूकंप ने सिंधुपालचौक की  नाम्डोललिङ  बस्ती को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। इस भीषण भूकंप ने न केवल सभी के घरों को नष्ट कर दिया, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी यहाँ बड़ी क्षति हुई थी। 62 परिवारों के करीब 300 लोग बेघर हो गए थे। ऐसे समय में नेपाल के प्रसिद्ध उद्योग पति एवं सांसद विनाेद चौधरी ने वहाँ के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी ली और आज नाम्डोललिङ एक खुशहाल बस्ती बना हुआ है । वहाँ के नागरिकों का मानना है कि अगर चौधरी फाउन्डेशन ने यह जिम्मेदारी नहीं ली होती तो वो सब आज भी बेघर होते ।

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एकीकृत बस्ती में बने पक्के मकानों में तीन कमरे, एक शौचालय और एक सब्जी का बगीचा है। हर घर में शौचालय है। बस्ती में जलापूर्ति की व्यवस्था की गई है। ‘ बस्ती में रहने के लिए पक्का मकान ही नहीं मिला है बल्कि   शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और बच्चों के विकास के लिए आवश्यक वातावरण भी तैयार किया गया है।चौधरी समूह के कॉर्पोरेट संचार एवं जनसंपर्क विभाग के प्रमुख मधुसूदन पौडेल कहते हैं, “यह न केवल इस गाँव में, बल्कि आसपास के गाँवों में भी सकारात्मक शिक्षा प्रदान कर रहा है।”

एकीकृत बंदोबस्त के निर्माण के दौरान यहां के निवासियों के कौशल विकास के लक्ष्य से स्थानीय निवासियों को बस्ती के लिए आवश्यक ईंटें तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। गाँव में बस्ती के निर्माण में प्रयुक्त लगभग 200,000 ईंटें तैयार की गईं। इसके लिए आवश्यक उपकरण, प्रशिक्षण एवं अन्य सामग्री चौधरी फाउंडेशन द्वारा प्रदान की गई। एकीकृत बस्तियों में बने मकानों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि बाद में आवश्यकतानुसार दो तल तक जोड़े जा सकें।

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फाउंडेशन ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया है जहां स्थानीय लोगों को सीएसईबी तकनीक के अनुसार ईंट बनाने का हुनर, बढ़ईगीरी, लकड़ी का काम और भवन निर्माण में जरूरी अन्य कौशल सिखाकर घर मिलने के बाद भी उन्हें अपनी आजीविका के लिए रोजगार मिल सकता है। फाउंडेशन ने ईंट बनाने की मशीन को नामडोलिंग एकीकृत बस्ती के स्वामित्व में सौंप दिया है।

फाउंडेशन ने महाकाली सेकेंडरी स्कूल में एक डिजिटल क्लासरूम बनाया है, जहां इस बस्ती के बच्चे पढ़ते हैं. ऑडियो-विजुअल शिक्षा के लिए कम से कम 10 कंप्यूटर/लैपटॉप, टेलीविजन, प्रोजेक्टर आदि डिजिटल कक्षाओं के रूप में स्थापित किए गए हैं। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि यहां के बच्चे इंटरनेट के जरिए बाकी दुनिया के शैक्षिक कार्यक्रमों से जुड़ सकें।

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