नया बजट – राहत मिली या बोझ बढ़ा ? : डॉ.श्वेता दीप्ति

डॉ श्वेता दीप्ति, हिमालिनी अंक अप्रैल 026। बालेन सरकार की नेतृत्व में वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा संघीय संसद की संयुक्त बैठक में आगामी आर्थिक वर्ष के लिए २१ खर्ब २४ अरब ३४ करोड़ रुपये का बजट पेश किया है । बजट आने के बाद हमेशा की तरह इसे लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है । सत्तापक्ष इसे उपलब्धि बता रहा है तो विपक्ष इसकी आलोचना कर रहा है । लेकिन आम नागरिक के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि इस बजट से उसकी जेब, रोजÞगार, खेती, कारोबार और दैनिक जीवन पर क्या असर पड़ेगा । इस बजट में विशेष रूप से ढांचागत विकास, शिक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा से जुड़े मंत्रालयों को बजट का बड़ा हिस्सा मिला है । सरकार का कहना है कि आर्थिक वर्ष के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण और सामाजिक क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हुए बजट पेश किया है । नया नेपाल बनाने की कड़ी में चाहे कितना भी बुनियादि ढांचा का विकास हो जाए अगर देश में रोजगार और उद्योग नहीं बढ़े तो जनता में निराशा फैलेगी । जानकारों का मानना है कि इस बजट में बेरोजगारी की समस्या को हल करने के उपायों को प्रमुखता से रखना चाहिए था । देश में रोजगार के अवसर न होने के कारण ९० लाख युवा देश से बाहर रह रहे हैं । इससे पहले की सरकार भी यही गलती कर रही थी, जिसका परिणाम सरकार को भुगतना पड़ा था । पिछली और वर्तमान सरकार के बजट में यही अंतर होना चाहिए था जो नहीं हुआ है । अभी नेपाल की मुख्य समस्या बोरोजगारी की है, उसमें भी शिक्षितों की बेरोजगारी की । जिसकी तरफ वर्तमान सरकार की भी नजर कम ही गई है ।
बजट सरकार की नीति और प्राथमिकताओं का आइना भी होता है । नेपाल सरकार की वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा है कि रास्वपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा इस बार लाया गया बजट परिवर्तनकारी होगा और पिछली नीति को तोड़ेगा । लेकिन विपक्षी दलों का यह मानना है कि ये दावा सही नहीं है ,क्योंकि देश के राजस्व का स्रोत कमजोर बना हुआ है । पिछले साल की तुलना में इस साल का राजस्व काफÞी कम है । जबकि देश का चालू खर्च इसके तुलना में काफी अधिक है । इस प्रकार सरकार की आय से देश का खर्च ही संभलने की स्थिति में नहीं है ।
सरकार के अनुसार कुल बजट का सबसे बड़ा हिस्सा नियमित सरकारी खर्च में जाएगा । करीब ५९.८ प्रतिशत राशि प्रशासन चलाने, कर्मचारियों के वेतन–भत्ते और सरकारी कामकाज पर खर्च होगी । वहीं १९.९ प्रतिशत रकम ऋण के मूलधन और ब्याज भुगतान सहित वित्तीय दायित्वों के लिए रखी गई है ।
इसका मतलब है कि विकास निर्माण के लिए कुल बजट का केवल २०.३ प्रतिशत हिस्सा ही बचता है । सड़क, पुल, भवन, ऊर्जा परियोजनाएं और अन्य आधारभूत संरचनाओं पर खर्च होने वाली यही राशि देश के पूंजीगत निवेश का मुख्य आधार होगी ।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार ने जिस राजस्व का लक्ष्य रखा है वह पैसा कहाँ से आएगा । सरकार ने बजट का लगभग ६६.१ प्रतिशत हिस्सा राजस्व से जुटाने का लक्ष्य रखा है । यानी कर और अन्य सरकारी आय इस बजट की सबसे बड़ी वित्तीय आधारशिला होगी । सरकार ने ४ खर्ब १० अरब रुपये आंतरिक ऋण से जुटाने की योजना बनाई है । साथ ही २ खर्ब ४७ अरब २८ करोड़ रुपये वैदेशिक ऋण लेने की योजना है । ६१ अरब ७४ करोड़ रुपये विदेशी अनुदान से प्राप्त होने की उम्मीद है ।
कुल मिलाकर सरकार एक वर्ष के भीतर ६ खर्ब ५७ अरब २८ करोड़ रुपये ऋण लेने की तैयारी में है । यदि राजस्व लक्ष्य पूरा नहीं हुआ तो या तो कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है या विकास खर्च प्रभावित हो सकता है ।
इस बजट में कुछ ऐसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं जिनसे आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है ।
नीचे बजट की प्रमुख बातें सरल भाषा में दी गई हैं ः
१. आयकर में बड़ी राहत
– कर–मुक्त आय सीमा ५ लाख से बढ़ाकर १० लाख रुपये प्रति वर्ष कर दी गई है ।
– अब १० लाख रुपये तक की आय पर केवल १% कर देना होगा ।
– अधिकतम आयकर दर ३९% से घटाकर २९% कर दी गई है ।
– इससे मध्यम वर्ग और वेतनभोगी कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी ।
२. शेयर बाजार और पूंजीगत लाभ कर
– शेयर बेचकर होने वाले लाभ पर लगने वाला पूंजीगत लाभ कर (ऋबउष्तब िन्बष्लक त्बह) अब अंतिम कर माना जाएगा ।
– इसके बाद उस आय पर अलग से आयकर नहीं देना होगा ।
– हालांकि कर दरों में वृद्धि की गई है ः
– १ वर्ष से अधिक समय तक रखे गए शेयरों पर ७.५% कर (पहले ५%)
– १ वर्ष से कम अवधि में बेचे गए शेयरों पर १०% कर (पहले ७.५%)
– इससे निवेशकों को स्पष्टता मिलेगी, लेकिन कर का बोझ थोड़ा बढ़ेगा ।
३. सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि
– सरकारी कर्मचारी, शिक्षक और सुरक्षा कर्मियों के वेतन एवं भत्तों में २१% तक वृद्धि की गई है ।
– इसमें मूल वेतन वृद्धि और अन्य सुविधाएं शामिल हैं ।
४. व्यवसाय और स्टार्टअप को प्रोत्साहन
– स्टार्टअप कंपनियों को पहले ५ वर्षों तक १००% आयकर छूट मिलेगी ।
– फ्रीलांसर और रिमोट वर्कर्स के लिए ५% की फ्लैट टैक्स दर तय की गई है ।
– निवेश, निर्यात और व्यवसाय संचालन को आसान बनाने के लिए कई नियम सरल किए जाएंगे ।
– सीमा शुल्क (ऋगकतयmक म्गतथ) की दरों और श्रेणियों को भी सरल बनाया गया है ।
५. कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान
– कृषि में २ करोड़ रुपये तक निवेश करने वाले किसानों को ४०% तक अनुदान (सब्सिडी) मिलेगा ।
– उर्वरक, कृषि बीमा और आधुनिक खेती के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है ।
– कृषि–प्रसंस्करण (ब्नचय–उचयअभककष्लन) उद्योगों को १० वर्षों तक पूर्ण आयकर छूट दी जाएगी ।
६. डिजिटल और तकनीकी विकास
– काठमांडू के स्यूचाटार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा ।
– अधिक सरकारी सेवाएं नागरिक ऐप (ल्बनबचष्प ब्उउ) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी ।
– डिजिटल निर्यात, तकनीकी रोजगार और एआई फेलोशिप को बढ़ावा दिया जाएगा ।
– नेपाल टेलिकॉम की ३४% हिस्सेदारी जनता को बेचने की योजना है ।
७. बुनियादी ढांचे का विकास
– सड़कों, सुरंगों (जैसे नागढुंगा और सिद्धबाबा), रेलवे, पुलों और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़ा बजट आवंटित किया गया है ।
– निर्माण कार्यों को तेज करने के लिए वैकल्पिक वित्तीय मॉडल अपनाने की योजना है ।
८. ऊर्जा और निजी क्षेत्र
– निजी कंपनियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिजली व्यापार करने की अनुमति दी जाएगी ।
– जलविद्युत और ऊर्जा क्षेत्र के विकास पर सरकार का विशेष ध्यान रहेगा ।
९. अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं
– भूमि और संपत्ति लेन–देन पर कर बढ़ाकर ७.५% किया गया है ।
– अनावश्यक सरकारी कार्यालयों को कम करने और सरकारी खर्च नियंत्रित करने की योजना है ।
– लगभग ७% आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने और महंगाई को नियंत्रित रखने का लक्ष्य रखा गया है ।
– डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए वैट (ख्ब्त्) में १०% की छूट भी दी गई है ।
बजट का समग्र संदेश
यह बजट आम नागरिकों और व्यवसायों को राहत देने के साथ–साथ दीर्घकालिक आर्थिक विकास पर केंद्रित है । इसमें मुफ्त लोकलुभावन योजनाओं की तुलना में उत्पादन, रोजगार, निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था को अधिक महत्व दिया गया है ।
जहां कई लोग आयकर में कटौती का स्वागत कर रहे हैं, वहीं कुछ निवेशक शेयर बाजार और संपत्ति पर बढ़े हुए करों को लेकर असंतुष्ट हैं ।
कुल मिलाकर, यह बजट आर्थिक चुनौतियों के बाद निवेशकों, व्यवसायों और आम जनता का विश्वास पुनः स्थापित करने का प्रयास करता है । विभिन्न क्षेत्रों पर इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण अभी विशेषज्ञों द्वारा किया जा रहा है ।
सरकार ने गैर–आवासीय नेपाली को द्वितीयक प्रतिभूति बाजार में भागीदारी की अनुमति देने की भी घोषणा की है । इसके साथ ही विदेशी निवेश स्वीकृति प्रक्रिया, मुनाफा प्रत्यावर्तन नियम और निवेश लेखा प्रणाली में सुधार किए जाएंगे, ताकि पूंजी निवेश प्रवाह बढ़ाया जा सके ।
कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरक सब्सिडी के लिए ३२.४६ अरब रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के २८.८२ अरब रुपये से अधिक है । इसका उद्देश्य आयातित उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है । सरकार घरेलू उर्वरक उत्पादन की संभावनाओं पर भी अध्ययन करेगी । इसके अतिरिक्त कृषि तथा पशुपालन विकास मंत्रालय के लिए ४६.४२ अरब रुपये तथा कृषि आधुनिकीकरण के लिए २.०७ अरब रुपये आवंटित किए गए हैं ।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सामाजिक स्वास्थ्य सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए १३.१५ अरब रुपये का बजट रखा गया है, ताकि कमजोर और वंचित वर्गों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सके । सरकार ने आर्थिक वर्ष २०८३–८४ के भीतर भूमिहीन और अव्यवस्थित बस्तियों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए व्यवस्थित नीतिगत हस्तक्षेप करने की भी घोषणा की है । पर्यटन क्षेत्र में नेपाल को वैश्विक वेलनेस टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है । लक्जरी होटल और रिसॉट्र्स को प्रोत्साहन दिया जाएगा । साथ ही, नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण का पुनर्गठन करते हुए नियामक और लाइसेंसिंग कार्यों को अलग किया जाएगा, ताकि विमानन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित हो सके ।
सांस्कृतिक संरक्षण के तहत तिलौराकोट, गोकर्णेश्वर और जनकपुरधाम जैसे स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास किए जाएंगे । इसके अलावा खेल क्षेत्र के लिए ४.३ अरब रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाडि़यों के लिए आजीवन स्वास्थ्य सेवा सहायता की व्यवस्था भी शामिल है । कुल मिलाकर यह बजट वित्तीय संतुलन, निवेश प्रोत्साहन, विभिन्न क्षेत्रों के विस्तार और संरचनात्मक सुधारों पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता और विकास को मजबूत करना है ।
बजट के कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता भी जताई जा रही है । ५० यूनिट से अधिक बिजली खपत पर वैट लगाने की व्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है । आलोचकों का कहना है कि तराई क्षेत्र के परिवार, बिजली से सिंचाई करने वाले किसान और इलेक्ट्रिक वाहन या इंडक्शन चूल्हा उपयोग करने वाले उपभोक्ता इससे अधिक प्रभावित होंगे ।
आर्थिक जानकारों का यह भी मानना है कि बड़े पैमाने पर आंतरिक ऋण लेने से बैंकिंग प्रणाली पर दबाव बढ़ सकता है । यदि ब्याज दरें ऊपर जाती हैं तो छोटे व्यवसायियों और ऋण लेकर कारोबार करने वालों की लागत बढ़ सकती है ।
इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर संरचना में बदलाव का असर मध्यम वर्गीय खरीदारों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है । इसी तरह शेयर बाजार और रियल एस्टेट में पूंजीगत लाभ कर बढ़ाने के फैसले से निवेशकों के बीच भी चर्चा है ।
सरकार ने हरित कर का दायरा बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है । इससे कुछ आयातित उत्पाद, पेट्रोलियम आधारित सामग्री और पुराने वाहनों की लागत बढ़ सकती है ।
निजी विद्यालयों और निजी अस्पतालों से जुड़ी नई शुल्क व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं । कई लोगों का तर्क है कि इसका अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा ।
बजट का सबसे बड़ा विवादित पक्ष विकास खर्च का अनुपात बना हुआ है । कुल बजट का केवल एक–पांचवां हिस्सा ही पूंजीगत निवेश के लिए निर्धारित किया गया है । विशेषज्ञ लंबे समय से यह सवाल उठाते रहे हैं कि यदि अधिकांश राशि प्रशासन और ऋण भुगतान में ही खर्च होती रही तो आर्थिक वृद्धि और रोजÞगार सृजन की गति कैसे बढ़ेगी ।
देश पहले से ही कर्ज में दबा है । ऐसी स्थिति में सरकार साल में १२ हजार करोड़ भी विकास के लिए खर्च नहीं कर सकती । देश की अर्थव्यवस्था इतनी खराब हो चुकी है कि बजट जितना सुनने में प्रभावकारी दिखता है, उतना अमल में नहीं । विपक्षी दलों का भी कहना है कि इस बजट में कृषि, औधोगिक उत्पादन, भूमिहीन और श्रमजीवी वर्ग की समस्या समाधान करने तथा बेरोजगारी समाप्त करने के लिए कोई ठोस योजना शामिल करनी चाहिए थी । इस तरह के बजट से देश ज्यादा विदेशी कर्ज के बोझ के तले दबता चला जाएगा ।

