नागरिकता आंदोलन कर रहे नीरज कामत ने किया आत्मदाह का प्रयास
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30 जेष्ठ, काठमांडू।
नीरज कुमार कामत नेशनल ट्रॉमा सेंटर के आपातकालीन कक्ष के बिस्तर में हैं। नागरिकता की मांग को लेकर माइतीघर की सड़कों पर संघर्ष कर रहे कामत ने मंगलवार दोपहर अपने ही शरीर पर पेट्रोल छिड़क लिया। उस दौरान पेट्रोल निगल लेने के कारण वह बोल नहीं पा रहा था।
5 साल से नागरिकता के लिए आंदोलन में भटक रहे कामत जैसे सैकड़ों लोग इस समय राजधानी के माइतीघर मंडला में धरना दे रहे हैं.
भले ही जन्म के आधार पर माता-पिता को नेपाली नागरिकता मिल गई है, लेकिन कामत जैसी तीसरी पीढ़ी को नागरिकता नहीं मिली है ।17 गते जेष्ठ को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने नागरिकता विधेयक को प्रमाणित किया था। यह कानून नेपाली के वंशजों की नागरिकता प्रदान करता है जिन्होंने जन्म से नागरिकता ली है।
हालांकि, राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को मंजूरी दिए जाने के 2 दिन बाद 19 गते जेष्ठ को एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता विधेयक को तुरंत लागू नहीं करने का अंतरिम आदेश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें नागरिकता नहीं मिलेगी, नागरिकता पीड़ित संघर्ष समिति के नाम पर जन्म से नागरिकता पाने वालों की संतान एक सप्ताह से माइतीघर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होने वाली थी. लेकिन रिट याचिकाकर्ता बालकृष्ण नेउपाने ने कहा कि वो अदालत में आकर बहस नहीं कर सकते । इसके बाद सुनवाई को स्थगित कर दिया गया ।
माइती घर में इस समाचार काे सुनने के साथ ही नीरज कामत, विचलित होकर पेट्रोल खोजने के लिए दौड़ा।
अस्पताल में कामत की देखभाल कर रहे सूरज चौधरी कहते हैं, ”वो कहीं से पेट्रोल ले आया और अपने उपर डाल लिया जिससे कुछ पेट्रोल उसके मुँह में भी चला गया था । पुलिस ने उसे बचाया । इलाज में जुटे स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार कामत की हालत खतरे से बाहर है.


