विमर्श फाउण्डेशन द्वारा तीन दिवसीय मैथिली साहित्य उत्सव मनाया गया
काठमांडू, ३० जेठ

विमर्श फाउण्डेशन द्वारा तीन दिवसीय मैथिली साहित्य उत्सव मनाया गया
जनकपुर धाम में तीन दिवसीय मैथिली साहित्य उत्सव का समापन हुआ है । कार्यक्रम में भारत से बहुत से साहित्यकार सहभागि थे । विमर्श फाउण्डेशन के आयोजना में हुए इस सम्मेलन के पहले दिन जनकपुर धाम के समृद्ध ऐतिहासिकता तथा वर्तमान विषय में विमर्श किया गया । विमर्श में भाग लेने वाले सहभागियों ने जनकपुरधाम को आधुनिक शहर बनाने तथा ऐतिहासिक शहर के रुप में विकास करने के लिए एक स्पष्ट धारणा बनाकर आगे बढ़ने की सलाह दी । वक्ताओं ने सुझाव देते हुए कहा कि हम जनकपुर को भारत के वनारस तथा जापान के क्योटो शहर जैसा बना सकते हैं । इसके साथ ही जानकी मन्दिर को विश्वसम्पदा सूचि में रखने की बात चल रही है इसके लिए एक साथ काम करना होगा । कार्यक्रम के इस पहले सत्र के विमर्श में मैथिली के चर्चित गायक सुनिल मल्लिक, गीतकार अशोक दत्त, पत्रकार सुजीत कुमार झा, युवा राजनीतिकर्मी विपि साह, पत्रकार एवं कलाकार घनश्याम मिश्र, राजनीतिकर्मी एवं कवि पुनम झा ‘मैथिली’ सहभागि थे । दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया था । कवि गोष्ठी में तारानन्द वियोगी, अशोककुमार मेहता, चन्द्रमोहन झा ‘पड़वा’, रमेशरञ्जन झा, रोशन जनकपुरी, अजित आजाद, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, पुनम झा ‘मैथिली’, रुपा झा, विजय दत्त ‘मणि’, अयोध्यानाथ चौधरी, आनन्दमोहन झा, विकाश वत्सनाभ, डा. गायत्री झा, वन्दना चौधरी, कमलेश प्रमेन्द्र, राजेश्वर ठाकुर, वैद्यनाथ पासवान, प्रेम विदेह ‘ललन’

कवि गोष्ठी की अध्यक्षता मैथिली साहित्यक के दो शीर्ष हस्ती डा. राजेन्द्र विमल तथा डा. भीमनाथ झा ने की थी । कार्यक्रम में स्वागत भाषण विमर्श फाउण्डेशन की अध्यक्ष विभा झा ने दी । पहले दिन के दोनों सत्र का आयोजन दशरथ तलाव के बीच में मंच बनाकर किया गया ।
मैथिली साहित्य उत्सव के दूसरे दिन औपचारिक रुप से उदघाटन किया गया । कार्यक्रम का उदघाटन प्रदेश प्रमुख हरिशंकर मिश्र ने किया । अपने शुभकामना मंतव्य में उन्होंने कहा कि मैथिली एक समृद्ध भाषा रही है । विमर्श फाउण्डेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम से मैथिली भाषा अपने ऊँचाई पर पहुँचेगी ऐसा मेरा विश्वास है । उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन समय समय पर किया जाना चाहिए ताकि मधेश प्रदेश में बोली जाने वाली सभी भाषाओं का विकास हो सके ।
उद्धाटन सत्र के बाद कुछ खास विषयों पर चर्चा की गई जिसमें –अतित के आँगन में भविष्य का अरिपन, मध्य मैथिली के सहायक क्रिया रुप, राजनीतिक अस्तित्वः वर्तमान के चुनौति तथा भविष्य के रणनीति, मैथिली साहित्य के समकालिन परिदृष्य, मिथिला में उद्योग की संभावना तथा चुनौति, मैथिली के समकालिन कथा साहित्य तथा नई पीढ़ी के सामने की चुनौति, मैथिली साहित्य में दलित चेतना, तथा जलाधार संरक्षण आदि विषयों में विमर्श किया गया ।
विमर्श फाउण्डेशन की अध्यक्ष विभा झा द्वारा रचित पुस्तक ‘नहि सीता नहि’ का लोकापर्पण कया गया साथ ही इस पर एक परिचर्चा भी हुई । सांस्कृति कार्यक्रम का भी आयोजना किया गया था ।
कार्यक्रम के अंतिम दिन रविवार को वर्तमान में महिला सशक्तिकरण, लैंगिक विभेद, स्त्री शिक्षा, स्त्री सहभागिता जैसे विषयों को ध्यान में रखकर विमर्श किया गया ।
कार्यक्रम में महाकवि विद्यापति द्वारा रचित ग्रन्थ ‘पुरुष परीक्षा’ का नेपाली अनुवाद ‘पुरुष परीक्षा’ का भी लोकार्पण किया गया । धीरेन्द्र प्रेमर्षी इसके अनुवादक हैं और इस पुस्तक को लेकर परिचर्चा भी हुई । कार्यक्रम में मैथिला नाट्य परिषद की भी अहम भूमिका रही । कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए ।

कुल मिलाकर यह तीन दिवसीय कार्यक्रम बहुत ही सफल रहा ।



