आवाज के १४ वें संस्करण पर प्रख्यात कवि बिभु पाधी
भारतीय दूतावास तथा बीपी कोइराला भारत नेपाल फाउंडेशन व्दारा बुधवार ११ जून २०१४ को आवाज ( voices )का १४ वाँ संस्करण का आयोजन किया गया ।
आवाज के इस संस्करण में भारतीय कवि बिभु पाधी ने अपनी साहित्यिक यात्रा और कविता में शामिल तकनीकी के बारे में बात बतायी थी ।
उन्होंने कहा कि मैं अपनी किशोरावस्था से माइग्रेन से पीड़ित हो गया था । १९७५ में एक दिन मैं एक गंभीर माइग्रेन दर्द से पिडित था और मैं किसी भी नुस्खे के बिना ही खाली पेट में तीन दर्दनिवारक टेवलेट ले लिया, नतीजतन यह मेरे पेट में जलन के कारण बन गया और मैं रक्तश्राव से परेसान हो गया । एक 
महीने से अधिक के लिए एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था । यहाँ मैंने अपनी आँखों से हर रोज मौत को बारीकी से देखता रहा । मेरी आँखों के सामने लोग मर रहे थे । बाद मे मुझे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, इसके बाद मे मैने अपनी पहली कविता लिखी ।
पाधी की कविता विदेशों में और भारत की कई साहित्यिक पत्रिकाओं में भी प्रकाशित किया गया है । उनकी कई साहित्यिक संग्रह भी प्रकाशित है ।
” बीपी कोइराला भारत नेपाल फाउंडेशन के सचिव कवि और राजनयिक अभय कुमार ने अंत में दर्शकों को कवि बिभु पाधी के बारे मे जानकारी कराते हुये अपना मनतव्य रखा ।
अभय कुमार ने कहा कि आज हमारे साथ कवि बिभु पाधी है । उन्होने नेपाल का दौरा करके और आवाज के १४ वें संस्करण पर अपनी विचारों को सार्वजनिक करने के लिए कवि पाधी के प्रति आभार व्यक्त किया । कार्यक्रम पाधी कविता की विभिन्न तकनीकों और शैलियों पर दर्शकों के साथ बातचीत के साथ संपन्न हुआ ।

