Tue. Apr 21st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

अभिव्यक्ति पर बंदिश : यह कैसा लोकतंत्र है ?

 

facebook_andolanश्वेता दीप्ति, काठमाण्डू, २१ जून । अभिव्यक्ति पर बंदिश । जी हाँ,  लोकतंत्र में आप अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र होते हैं । पर पता नहीं हम किस तंत्र में अपनी साँसें ले रहे हैं । देश में नए विधेयक को लाने की तैयारी की जा रही है जो अब आपके विचारों की डोर को अपनी पकड में रखेगा । देश का कानून और अदालत की मर्यादा का सम्मान करना हर जिम्मेदार नागरिक का दायित्व है तो गलत होता देख कर प्रतिरोध करना भी जिम्मेदार नागरिक का फर्ज बनता है । बिना किसी विचार विमर्श और गृहकार्य के यह विधेयक तैयार किया जा चुका है । अगर यह संसद द्वारा पारित होता है तो संचार माध्यम और आम जनता दोनों ही प्रभावित होंगे । एक आम नागरिक सामाजिक संजाल पर अपनी एक छोटी सी अभिव्यक्ति देता है तो उसे २० दिनों की सजा भुगतनी पडती है और बाद में उसे ५००० हजार की धरौटी की  रकम जमा करने के बाद छोडा जाता है । अगर आज यह स्वतंत्रता नहीं है तो कल अगर बिना किसी सुधार के अदालत अवहेलना को विषय बनाकर बनाया गया यह विधेयक पास कर देता है तो यह कानून कितना एकतर्फा हो सकता है यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सका है । भले ही सप्तरी के ३० वर्षीय अब्दुल रहमान का फेसबुक कमेन्ट केस इस विधेयक से अलग हो किन्तु आगे चल कर असर कुछ ऐसा ही होने वाला है यह अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है । अगर जनता विरोध या विचार प्रकट करने की स्थिति में नहीं हैं तो यह कैसा लोकतंत्र है ? एक कमेन्ट के लिए प्रहरी ने अदालत से निवेदन में एक लाख रु. और पाँच साल की कैद की माँग की थी । क्या ये सही है ? यह मंथन करने का विषय तो है ही ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *