रक्सौल-काठमान्डू रेल या केरुंग-काठमान्डौ रेल, किसकी रेल पहुँचेगी काठमान्डू पहले ?
काठमांडू: 12 अगस्त
नेपाल और भारत का सम्बन्ध हमेशा से महत्तवपूर्ण रहा है । लेकिन समय समय पर इसमें तनाव भी उत्पन्न होता रहा है । नेपाल में चीन हमेशा से अपना वर्चस्व बनाना चाहता है ताकि वह नेपाल के जरिए भारत की सीमा तक पहुँच सके । यह स्थिति भारत के लिए चिंता बढाती रहती है । नेपाल भारतकी खुली सीमा वर्तमान में बहुत संवेदनशील माना जा रहा है । इस बीच सीमा पर चीनी नागरिक का पकडा जाना और पाकिस्तानी नागरिक का अवैध रुप से भारत प्रवेश ने स्थिति को संवेदनशील बना दिया है । यही कारण है कि नेपाल भारत की सीमा पर नेपाली नागरिकों को भी पहचानपत्र के आधार पर प्रवेश करने की अनुमति मिल रही है । कुछ दिनों पहले नेपाली वाहनों पर भी अनुमतिपत्र लेने की कडाई की गई किन्तु फिर इसे रोक दिया गया । वर्तमान में नेपाल भारत के रिश्तों में तनाव दिख रहा है बावजूद इसके कई भारत के कई महत्तवपूर्ण परियोजनाएँ परिचालित किए जा रहे हैं । ऐसे ही परियोजना में एक महत्तवपूर्ण परियोजना है रक्सौल काठमान्डू रेलवे । यह परियोजना नेपाल और भारत दोनों के लिए अत्यन्त ही महत्तवपूर्ण है ।
भारत ने हाल ही में रक्सौल-काठमांडू रेलवे का अंतिम लोकेशन सर्वे नेपाल को सौंपा है, जिसके बाद चीन टेंशन में आ गया है। चीन ने भी नेपाल की राजधानी को अपने रेलवे लाइन से जोड़ने के प्रयासों को तेज कर दिया है। चीन का लक्ष्य है कि वह केरुंग-काठमांडू रेलवे लाइन का निर्माण करे। एक्स्पर्ट्स इसे नेपाल में अपने प्रभाव को बढ़ाने के रूप में देख रहे हैं। हालांकि इसमें भारत चीन से एक कदम आगे है, क्योंकि उसने इसका डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट नेपाल को दे दिया है।
नेपाल के रेलवे विभाग के महानिदेशक रोहित बिसुरल ने कहा, ‘हम वर्तमान में अंतिम लोकेशन सर्वे की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं।’ वहीं, केरुंग-काठमांडू रेलवे की बात करें तो रेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक चीन की टेक्निकल टीम एक फील्ड सर्वे कर रही है। इस पर बिसुरल ने कहा कि चीन की टीम मार्च से क्षेत्र में सर्वे कर रही है। फील्ड सर्वेक्षण लगभग पूरा हो चुका है। चीनी टीम हवाई सर्वेक्षण, मैपिंग, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, स्पेशल टेक्निकल स्टडी, ऑन साइट सर्वे, निर्माण स्थिति का अध्ययन और इंजीनियरिंग स्टडी की रिपोर्ट तैयार करेगी।
रेलवे विभाग के मुताबिक पिछले साल दिसंबर के अंत में चीन रेलवे फर्स्ट सर्वे एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट ग्रुप का प्रतिनिधित्व करने वाली चीन की एक टीम ने नेपाल का दौरा किया और रेलवे परियोजना का टोही सर्वेक्षण किया। यह रेलवे परियोजना का पहला सर्वेक्षण है। नेपाल के प्रधानमंत्र जब केपी शर्मा ओली थे तब 2016 में उन्होंने चीन की यात्रा की थी। तब दोनों पक्षों में इस बात पर सहमती बनी थी कि सीमा पार रेलवे निर्माण को लेकर अधिकारी जानकारी का आदान-प्रदान करेंगे।
भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत लोक राज बराल ने कहा, ‘भारत पिछले कुछ वर्षों से चीन को पाकिस्तान की तुलना में बड़ा खतरा मानता है। क्योंकि भारत पहले ही आर्थिक रूप से पाकिस्तान को काफी पीछे छोड़ चुका है और दुनिया की प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा है। यही कारण है कि भारत नेपाल में अपने प्रतिद्वंद्वी चीन का प्रभाव नहीं बढ़ाना चाहता।’ नेपाल का दो तिहाई व्यापार भारत के साथ होता है और नेपाल का तीसरे देश से होने वाला ज्यादातर व्यापार भारत के क्षेत्र के जरिए ही होता है। इसलिए भारत हमेशा से नेपाल में चीन के बढते प्रभाव को रोकना चाहता है ।
चीन ने नेपाल को अपने पाले में लाने के लिए एक और कोशिश की है । भारत के बढ़ते साफ्ट पावर से परेशान चीन ने भारत के पड़ोसी देश नेपाल और आसियान के दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में ‘सिल्क रोडस्टर’ प्रॉजेक्ट को लॉन्च किया है। यह प्रॉजेक्ट चीन के बेल्ट एंड रोड परियोजना का हिस्सा है जिससे अभी हाल ही में इटली ने किनारा किया है। शी जिनपिंग के ड्रीम प्रॉजेक्ट बीआरआई के 10 साल पूरे होने पर चीन ने इस परियोजना को लॉन्च किया है। चीन अब नेपाल के जरिए दक्षिण पूर्वी एशियाई और दक्षिण एशियाई देशों के साथ सहयोग के नए रास्ते तलाश रहा है जहां भारत का रणनीतिक हित बेहद अहम है।
चीन नेपाल में सिल्क रोडस्टर प्लेटफार्म के तहत कई नए प्रॉजेक्ट को शुरू कर रहा है। चीन इन प्रॉजेक्ट को विभिन्न नेपाली दलों और सामाजिक संगठनों के जरिए पूरा करना चाहता है। चीन का दावा है कि सिल्क रोडस्टर प्लेटफार्म को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि व्यवहारिक सहयोग और लोगों के बीच आदान प्रदान को बढ़ाया जा सके। इसमें चीन में मौजूद स्थानीय सरकारों, विश्वविद्यालयों और संस्थानों के संसाधनों के साथ समन्वय किया जाना है।
इसके तहत चीन की कोशिश है कि स्किल ट्रेनिंग, पढ़ाई और लोगों को कुछ समय के लिए आने की अनुमति देकर अपने प्रभाव को बढ़ाया जाए। इसके अलावा युवाओं को जोड़ने और उन्हें चीनी संस्कृति से परिचय कराने की कोशिश की जाएगी। चीन और दक्षिण एशियाई देशों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाया जाएगा। चीन इस नीति के जरिए अपनी परंपरागत बीआरआई नीति से पीछे हटकर पूरे क्षेत्र में साफ्ट पावर कूटनीति को बढ़ाने पर फोकस कर रहा है।
नेपाल ने साल 2017 में बीआरआई पर हस्ताक्षर किया था लेकिन अभी तक इस परियोजना के तहत एक भी प्रॉजेक्ट शुरू नहीं हो सका है। इससे चीन बुरी तरह से नेपाल सरकार पर भड़का हुआ है। पिछले दिनों पोखरा एयरपोर्ट को लेकर चीन और नेपाल के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया था। चीन का दावा था कि यह बीआरआई का हिस्सा है, वहीं नेपाल के विदेश मंत्री ने संसद में बयान देकर कहा कि अभी तक देश में बीआरआई का एक भी प्रॉजेक्ट शुरू नहीं हुआ है।
इससे चीन के दावे की पोल खुल गई थी। नेपाल को अब सबसे ज्यादा लोन देने वाला देश चीन बन गया है। चीन की योजना बीआरआई के तहत नेपाल तक रेल दौड़ाने की है। हालांकि इसमें आने वाले अरबों डॉलर का खर्च आर्थिक मंदी से गुजर रहे नेपाल के लिए खतरनाक साबित हो सकता है । पहले ही चीन ने पोखरा एयरपोर्ट के लिए नेपाल को 21 करोड़ डॉलर का लोन दिया है जो काफी ज्यादा ब्याज दर पर है और इस एयरपोर्ट से उसे कोई कमाई नहीं हो रही है। इससे नेपाल के श्रीलंका की तरह से चीन के कर्ज जाल में फंसने का खतरा पैदा हो गया है।

