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जनकपुरधाम में पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी सिलांग द्वारा तीन दिवसीय ‘लेखक मिलन शिविर’ का शुभारंभ

 

पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी सिलांग, मेघालय द्वारा आयोजित सोलहवा (16) तीन दिवसीय ‘लेखक मिलन शिविर’ का शुभारंभ

जनकपुर धाम के राजदरबार होटल में आरंभ हुआ। शिविर में भारत के लगभग 20 राज्यों के 85 कवि और लेखक शामिल हुए हैं, जबकि नेपाल के कोशी और मधेस क्षेत्र के लेखक शामिल हुए हैं। आज के कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में जलेश्वर के मेयर श्री सुरेश शाह सोनार जी ने किया। साथ ही उन्होने जलेश्वर नाथ महादेव के दर्शन, भ्रमण, संवाद और स्वागत का निमंत्रण भी दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष श्रीमती उर्मी कृष्णा, वरिष्ठ साहित्यकार, संपादक, ‘शुभ तारिका’, अंबाला छावनी:
अतिथि: डॉ. भोला प्रसाद ‘आग्नेय, पूर्व प्रवक्ता श्री मुरली मनोहर टाउन इंटर कॉलेज, बलिया, उ. प्र., श्री विजय बागरी वरिष्ठ साहित्यकार, कटनी, म. प्र. , प्रो. सुरेश महेश्वरी, सलाहकार, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, अमलनेर, महाराष्ट्र, सत्र संचालक: डॉ. अकेलाभाइ, डॉ. रघुनाथ पाण्डेय, डा. अरुणा कुमारी उपाध्याय थें।
मंचस्थ अतिथियों का स्वागत/सम्मान डॉ अकेलाभाइ संयोजक द्वारा अंगवस्त्र से सम्मान, दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि : मंचस्थ अतिथिगण के द्वारा किया गया। वंदना / स्वागत गीत
श्रीमती रेखा कुमारी राय, संयोजक, जलेश्वर, द्वारा किया गया। स्वागत भाषण: प्रो सुरेश महेशरी, सलाहकार, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, अमलनेर, महाराष्ट्र द्वारा किया गया। कार्यक्रम के आधार व्याख्यान: डॉ रघुनाथ पाण्डेय, क्षेत्रीय संयोजक, पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, गोण्डा, उत्तर प्रदेश पुस्तकों/पत्रिकाओं का लोकार्पण : मंचस्थ अतिथियों द्वारा (उद्घोष्णा- डॉ. रघुनाथ पाण्डेय) द्वारा किया गया।
पुस्तक का नाम: 1) शुभ तारिका, मासिक पत्रिका
2) राष्ट्र समर्पण मासिक पत्रिका
3) एक अदद अंगरक्षक व्यंग्य संग्रह
4) पूर्वोत्तर भाषाएँ और लिपियाँ
5) श्रीमद्भागवत गीता (भोजपुरी भावानुवाद)
6) काव्य-सुधा (कविता संग्रह)
7) प्रेम राग (कविता संग्रह)
8) आखिरी दाना (कविता संग्रह)
9) अष्टावक्र गीता (हिंदी भावानुवाद पद्यानुवाद)
कार्यक्रम में अजय कुमार झा द्वारा हिन्दी में भावानुवाद – पद्यानुवाद पुस्तक (अष्टावक्र गीता) और श्री अयोध्या नाथ चौधरी की ‘प्रेम राग’ सहित 11 ग्यारह पुस्तकों का विमोचन हुआ। इसी प्रकार रेखकुमारी राय सहित देवगिनिया देवी बजाज स्मृति सम्मान:
जीवनसामगी देवी गोयनका स्मृति सम्मान:
महावीर प्रसाद टिपरीवाला स्मृति सम्मान से सम्मानित
श्री मनोज कुमार पाल, डॉ. गीतारामचंद्र दोडमणि, सुश्री बंदन शर्मा, श्री प्रभात कुमम, श्री दिलीप कुमार रामन’ श्री मोहन लाल जाकड, सुश्री रमन रिद्धि, श्री लाल गीतेश्वर, श्री मदन पाल, श्री सीताराम, कोलकाता (पं. बंगाल), श्री कृष्ण अवतार कंसल, सुश्री रेखा शुक्ला, श्री शिवशंकर 6) श्रीमती मीना दुधोरिया, श्रीमती रेखा कुमारी राय, श्री मुकेश कुमार साड़, श्री युगल किशोर दुबे, श्री करन सिंह जी को किया गया। वहीं
ट्रस्ट की ओर से स्मति निह भेंट- 1. मुख्य अतिथि, 2. विशिष्ट अतिथि (डॉ. अंकलाभाई द्वारा ) किया गया।
नेपाल भारत के बीच एक मधुर और मजबूत सेतु निर्माण में आज का यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है। विद्वानों से खचाखच भड़ी इस सभा को देखने से ऐसा प्रतीत होता था, मानो राजर्षी जनक के राजदरबार में आयोजित विद्वानों का सभा हो। राजा जनक और उनके गुरु अष्टावक्र के इस पुण्य नगरी में अष्टावक्र गीता का सरल हिंदी भाषा में पद्यानुवाद पुस्तक का लोकार्पण भी सांदर्भिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। इस कार्यक्रम में भोजपुरी भाषा में भगवद्गीता का लोकार्पण भी जनकपुर के आध्यात्मिक कशिश को पुष्ट करता है। कार्यक्रम मुख्य विषय ‘ प्रेम और सद्भावना ‘ पर अनेक विद्वानों ने कबीर साहब लगायत अनेक विद्वानों के पंक्तियों को उद्बोधित करते हुए प्रेम की महिमा और सदभाव पर गहन विचार रखें। फिर कवि सम्मेलन आरंभ हुआ। विभिन्न खंडों में मंचासिन कर सम्मानित करते हुए चार मिनट के भीतर कविता वाचन कार्य आरंभ हुआ। जनकपुर के लिए यह शैली प्रेरणास्पद महसूस हुआ। समय सीमा निर्धारित और श्रोता तथा वक्ता सबके सब मंचासीन होकर सम्मानित होना; यह एक प्रेरक प्रयोग रहा। इस पूरे कार्यक्रम को अकेला भाई के निर्देशन में संचालन किया गया।

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