प्रधानमन्त्री से लेकर कांग्रेस उपसभापति पौडेल भी लडाकू शिविर भ्रष्टाचार मे
साउन, काठमाडू । अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग ने माओवादी लडाकू शिविर मे हुये भ्रष्टाचार के उपर जाँच करते हुये प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला, शान्ति मन्त्रालय का पहला मन्त्री कांग्रेस उपसभापति रामचन्द्र पौडेल सहित शान्ति तथा पुननिर्माणमन्त्री नरहरि आचार्य को भी अपने अनुसन्धान के दायरा मे ताना है ।
शान्ति तथा पुननिर्माण मन्त्रालय गठन करके नेतृत्व लिये कांग्रेस उपसभापति पौडेल लगायत अभीतक का सभी पूर्वमन्त्री सहित प्रधानमन्त्री कोइराला और मन्त्री आचार्य को अख्तियार ने भ्रष्टाचार मे अनुसन्धान के घेरा मे ताना है । अख्तियार ने शान्ति मन्त्रालय का नेतृत्व कियेहुये पूर्वमन्त्री पौडेल, जनार्दन शर्मा, रकम चेम्जोङ, विश्वनाथ साह, वर्षमान पुन, सत्या पहाडी, पम्फा भुसाल, टोपबहादुर रायमाझी को भी लडाकु शिविर मे हुये भ्रष्टाचार के लिये अनुसन्धान के तहत जवाव मागा है ।
अख्तियार ने प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला से भी शान्त्रिमन्त्री के हैसियत मे जवाव मागा है । कोइराला आचार्य को उसमन्त्रालय का जिम्मेवारी देने से पहले कुछ समय के लिये अपने अन्दर रखा था । अख्तियार व्दारा पठाए गये पत्रमे सभी मन्त्री का नाम ही किटान करके लडाकू भ्रष्टाचार के जाँच के दायरा मे परने की बात स्रोत से पता चला है ।
अख्तियार ने शान्ति मन्त्रालय के तत्कालीन सचिव से लेकर शिविर व्यवस्थापन केन्द्रीय समन्वयकर्ता के कार्यालय का सचिव सहित चार कर्मचारी को भी लडाकू के नाम मे हुये राषी भुक्तानी के बारे मे जानकारी देने के लिये पत्राचार किया है । माओवादी लडाकू शिविर के लिये राज्य व्दारा दिएगये ४६ करोड १० लाख रुपैयाँ भ्रष्टाचार होने की उजुरी जाँच करते हुये अख्तियार ने धमाधम पत्र पठाना शुरू किया है । इसके तहत शान्ति मन्त्रालय ने जवाव देने के लिये मस्यौदा समिति का ही गठन गरेको है । शान्ति मन्त्रालय स्रोत के अनुसार अख्तियार ने लडाकू को रकम भुक्तानी देनेवाले तत्कालीन मन्त्री रामचन्द्र पौडेल से लेकर शान्ति तथा पुननिर्माणमन्त्री नरहरि आचार्य से भ्रष्टाचार के बारे मे एकमुष्ठ जवाव मागा है ।

