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मधेश में नारी मुक्ति की आवाज कमजोर हैः मोहना अन्सारी

 

काठमांडू, १८ अप्रील । राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की पूर्व सदस्य तथा मानव अधिकारकर्मी मोहना अन्सारी ने कहा है कि तराई–मधेश में नारी मुक्ति की आवाज कमजोर है । मधेशवादी नेता तथा राष्ट्रीय मुक्ति क्रान्ति के संयोजक राजेन्द्र महतो द्वारा लिखित पुस्तक ‘अधुरा क्रान्ति’ विमोचन समारोह को सम्बोधन करते हुए उन्होंने ऐसा कहा है । मोहना जी का मानना है कि तराई मधेश में रहनेवाली महिलाएं आज भी राज्य की मूल प्रवाह में नहीं है, सामाजिक और आर्थिक रुप में भी उनकी भूमिका कमजोर है । उन्होंने आगे कहा– ‘५० प्रतिशत जनसंख्या महिलाओं की है, इनको अनदेखा कर कोई भी क्रान्ति और परिवर्तन सम्भव नहीं है ।’

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‘अधुरा क्रान्ति’ पुस्तक पर समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए अधिकारकर्मी अन्सारी ने आगे कहा कि पुस्तक के भीतर मधेश आन्दोलन में योगदान करनेवाले बहुत सारे व्यक्तियों की चर्चा है, लेकिन महिलाओं की चर्चा कम है । उनका मानना है कि राजनीतिक क्रान्ति हो या सामाजिक परिवर्तन, हरजगह महिलाओं की भूमिका विशेष है, लेकिन राज्य संरचना से लेकर राजनीतिक अभियान तक उनकी भूमिका को अनदेखा किया जाता है ।
अन्सारी जी की दृष्टिकोण में ‘अधुरा क्रान्ति’ पुस्तक ने वैचारिक और सैद्धान्तिक दृष्टिकोण से न्याय की मांग की है । उन्होंने यह भी कहा कि मधेश मुद्दा और आन्दोलन के सन्दर्भ में जो चीज आज तक अप्रकाशित है, वह ‘अधुरा क्रान्ति’ में प्रकाशित है ।

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