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मधेशवादी नेता महतो की राजनीतिक जीवन में आधारित पुस्तक ‘अधुरा क्रान्ति’ का विमोचन

काठमांडू, १८ अप्रील । मधेशवादी नेता राजेन्द्र महतो की राजनीतिक जीवन में आधारित पुस्तक ‘अधुरा क्रान्ति’ का विमोचन हुआ है । राजनीतिक विश्लेषक सीके लाल की प्रमुख आतिथ्यता में सम्पन्न कार्यक्रम में पुस्तक की समीक्षा करते हुए वक्ताओं ने नेता महतो की राजनीतिक जीवन, मधेश आन्दोलन, उत्पीडित जनता और अधिकार, नेपाल की राजनीतिक आन्दोलन में भारतीय भूमिका जैसे मुद्दों को लेकर अपना–अपना विचार प्रस्तुत किया ।
बुद्धछिरिङ मोक्तान, महेश दाहाल, सुमन सायमी, प्रा.डा. बालकृष्ण माबुहाङ, मोहना अन्सारी, कनकमणि दीक्षित, डा. सोहन साह सीके लाल जैसे वक्ताओं ने कहा कि ‘अधुरा क्रान्ति’ नेपाल की एक राजनीतिक दस्तावेज भी है । विशेषतः मधेश मुद्दा और मधेश आन्दोलन पर केन्द्रीत रह कर लेखक महतो ने नेपाली राजनीतिक परिदृश्य पुस्तक में प्रस्तुत किया है । लेखक महतो के अनुसार बिगत सात वर्ष से पुस्तक की तैयारी हुई थी । उनका यह भी मानना है कि पुस्तक उत्पीडित जनता की उत्पीडन और पीड़ा का पुलिन्दा है ।
प्रा.डा. बालकृष्ण माबुहाङ के अनुसार पुस्तक में बहुत सारे सूचना और ऐतिहासिक तथ्य तिथिमिति के साथ है । उनका मानना है कि पुस्तक पढ़ने के बाद मधेश आन्दोलन और नेता महतो के प्रति जो दृष्टिकोण है, उसमें बदलाव आ सकता है । पत्रकार कनकमणि दीक्षित का मानना है कि मधेश और पहाड़ के बीच जो आपसी संबंध और वैमनस्यता है, उसको समझने के लिए पुस्तक महत्वपूर्ण है । प्रमुख वक्ता सीके लाल के अनुसार पुस्तक में लेखक राजेन्द्र महतो ने खूद को ज्यादा प्राथमिकता दिया है और मधेश मुद्दा को कम । लेकिन दूसरे वक्ता बुद्धछिरिङ मोक्तान का मानना है कि पुस्तक में लेखक महतो की जीवनी सिर्फ ३० प्रतिशत है, यहां राज्यविहीन नागरिकों की पीड़ा ज्यादा है ।



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