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मधेशवादी दल फिर आन्दोलन की ओर –

upendra yadav
 

विनय कुमार :मधेश और मधेशी राजनीतिक अधिकार, आर्थिक उन्नति, सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक श्रोत साधनों के उपयोग मंे विगत से ही विभेद होता आ रहा है । मधेश के साथ हुए दमन और अत्याचार से मधेशी पीडिÞत हुए और जब सहने की क्षमता जाती रही तो आन्दोलन का बिगुल फ्ूंका गया । उस आन्दोलन  से हर्ुइ उपलब्धि भी आज चरमराने लगी है । समय बदल चुका है और परिस्थिति बिगडÞती जा रही है । देश में कैसी राज्य पर्ुनसंरचना, निर्वाचन प्रणाली, शासकीय स्वरुप हो इस बात पर संविधानसभा की गाडÞी आकर रुकी है । देश की वर्तमान अवस्था के मार्ग अज्ञात हंै । ठीक राह पर चलने के लिए मार्ग दिखाने वाला कोई निर्ण्ाायक टीम नहीं है  । ८ माघ अर्थात् संविधान जारी होने का दिन तेजी से नजदीक आ रहा है । राज्य पर्ुनर्संरचना और शासकीय स्वरुप जैसे विवादित विषयों पर सहमति होने का वातावरण दिख नहीं रहा है ।

दूसरे संविधानसभा से तीसरी पार्टर्ीीने एनेकपा माओबादी २२ दलीय संघीयता पक्षीय मोर्चा बनाकर आगे निकल पडÞा है । धर्मनिरपेक्षता विरोधी हिन्दूराज्य को संविधान में सुनिश्चित करने के लिए देश भर अपना जनलहर खडÞा करने में जुट चुके हंै । सत्तासीन कांग्रेस और एमाले ने ७ प्रदेश की साझा अवधारणा प्रस्तुत की है । इस तरफ मोर्चा के नेतृत्व कर रहे नेता प्रचण्ड ने ऐसे प्रदेशीय खाका से देश मुठभेड की ओर जा सकता है ऐसी कडÞी अभिव्यक्ति दी है । मधेशवादी दल तर्राई को टुकडÞे-टुकडेÞ बनाने का कांग्रेस-एमाले दुष्प्रयास सफल ना होने देने के अभ्यास मंे जुटे हैं । वर्तमान परिस्थिति में मधेशवादी पार्टियों की राजनीतिक और सांगठनिक गतिविधि प्रस्तुत हैः

हृदयेश त्रिपाठी, उपाध्यक्ष
तर्राई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टर्ीीांग्रेस-एमाले ने संर्घष्ा पर उतरने के लिए बाध्य किया है । कांग्रेस एमाले के गैरजिम्मेवाराना रवैये और अभी तक के आन्दोलन की उपलब्धियों को समाप्त करने की योजना से देश संर्घष्ा मे जा चुका है । तमलोपा को संर्घष्ा करना पडेÞ हम यह नहीं चाहते थे । कांग्रेस और एमाले ने ७ प्रदेश की संघीय संरचना प्रस्तुत कर के विगत में हुए मधेश आन्दोलन, दलित-जनजाति, पिछडÞे वर्ग के साथ हुए समझौते को ललकारा है, यह  कदापि मन्जूर नहीं है । विगत के आन्दोलन से मिली उपलब्धियों को बचाने और संस्थागत करने के लिए दूसरे आन्दोलन की आवश्यकता आ गई है । अब इस संर्घष्ा को कोई रोक नहीं पाएगा, तमोलपा इस संर्घष्ा को आगे बढÞाने के लिए और अगुवाई करने के लिए तैयार है । पहचान और सामर्थ्य के आधार पर संघीयता निर्माण होना चाहिये मगर कांग्रेस एमाले द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव में ना पहचान है ना सामर्थ्य । ये दिवाली के समय में कौडÞा का खेल खेला गया है, एमाले अध्यक्ष केपी ओली की ओर से । वे कभी चौका कभी तिया मारने का अभ्यास कर रहे हैं, यह सौदेबाजी तमलोपा को स्वीकार नहीं । तर्राई मधेश का एक इन्च भू-भाग भी दूसरे भू-भाग से जोडने के पक्ष में हम नहीं हैं, यह बिल्कुल स्पष्ट है । समग्र मधेश एक प्रदेश नहीं भी बने लेकिन तर्राई मधेश का भू-भाग दूसरे भू-भाग मे नहीं जाना चाहिये । अन्तरिम संविधान १३८-क) में राज्य पर्ुनर्सरचना आयोग और समिति द्वारा स्थापित किए गए मूल्य मान्यताओं के विपरीत है । संर्घष्ा के लिए हम अपने  संगठन और कार्यकर्ताओं को तैयार रहने के लिए अपील करते  हंै ।
हम अपने सांगठनिक गतिविधि जोडÞतोडÞ के साथ आगे बढÞा रहे हैं । बहुत जिलों में अधिवेशन, क्षेत्रीय सभा-समारोह सम्पन्न कर चुके हैं और २/४ जगह बांकी भी है । अब हम पार्टर्ीीे केन्द्रीय महाधिवेशन की ओर जा रहे हैं । प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी तय हुआ है ।

upendra yadav hindi
उपेन्द्र यादव

उपेन्द्र यादव अध्यक्ष,मधेशी जनअधिकार फोरम -नेपाल)
एक मधेश एक प्रदेश के बिना कोई भी संविधान किसी भी रूप में मजफो नेपाल पार्टर्ीीो मान्य नहीं होगा । कांग्रेस और एमाले द्वारा सहमति के बिना प्रक्रिया से संविधान जारी करने पर हमारी घोर आपत्ति है और ऐसा संविधान पार्टर्ीीो स्वीकार्य नहीं होगा । संविधान सभा से मधेशी, दलित, आदिवासी, जनजाति का अधिकार स्थापित नहीं हुआ तो अपनी मातृभूमि से अधिकार के लिये लडÞने के सिवा दूसरा और कोई उपाय नहीं रह जाएगा । मधेश किसी का गुलाम नहीं हैं मधेश शान्ति चाहता है । मधेश के अहित में संविधान जारी हुआ तो संविधानसभा छोडकर सडÞक आन्दोलन द्वारा नया संविधान घोषणा करने की चेतावनी देते हैं ।
संगठनों को सक्रिय और मजबूत बनाने में पार्टर्ीीुटी है । हाल ही में पर्सर्ाांे पार्टर्ीी्रवेश कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । मधेशी जन अधिकार फोरम के केन्द्रीय सदस्य वीरेन्द्र यादव की अध्यक्षता मंे आयोजित पार्टर्ीी्रवेश कार्यक्रम में पार्टर्ीीे उपाध्यक्ष और सभासद लालबाबु राउत, मौलाना नूरहोदा, प्रदीप यादव, केन्द्रीय सल्लाहकार बच्चा यादव तथा करिमा बेगम जैसे वक्ताओ नें भी अपने बिचार व्यक्त किए । कार्यक्रम में मदन चौहान, मोहम्मद सलाउद्दीन अन्सारी सहित सौ से अधिक अधिक कार्यकर्ता विभिन्न पार्टर्ीीोडकर फोरम नेपाल मे प्रविष्ट हुए । ऐसे कार्यक्रम और जिले में भी जारी हंै ।

 अनिल कुमार झा, अध्यक्ष
संघीय सद्भावना पार्टर्ीीसंघीय समाजवादी पार्टर्ीीधेशवादी दलों के बीच व्यापक एकता और सहकार्य की आवश्यकता पर जोर देती है । संघीय सद्भावना पार्टर्ीीे निर्वाचन से पहले भी मधेशी एकता के पक्ष मे प्रयत्न किया था लेकिन दूसरी मधेशवादी पार्टर्ीीौर नेता के दम्भ के कारण यह सम्भव नहीं हो पाया । निर्वाचन में हर्ुइ हार की क्षतिपर्ूर्ति आपसी सहमति, सहकार्य, आन्दोलन और संर्घष्ा से ही सम्भव होने की बात हमारा मानना है । संविधानसभा से मधेश, मधेशवाद, संघीयता, समानुपातिक प्रतिनिधित्व, समावेशीकरण बनने बाले संविधान में सुनिश्चित होना चाहिये । २२ दल वाले मोर्चे से इस मामले में कुछ काम होते हुए भी आवश्यक पर्ूण्ाता मिलने की उम्मीद नहीं है । समग्र मधेश स्वायत्त एक प्रदेश का मुद्दा हम छोडÞकर आगे नहीं बढÞ सकते । प्रधानमन्त्री कार्यकारी और राष्ट्रपति आलंकारिक हो पार्टर्ीीी यह धारणा रहती आयी है ।
पार्टर्ीीभी सांगठनिक कार्य मे सक्रिय है । पर्ूव में झापा, मोरङ, रुपन्देही, सुनसरी में कार्यक्रम सम्पन्न कर चुके हैं । पश्चिम में भी बर्दिया में सम्पन्न करके कैलाली, कञ्चनपुर में भी संागठनिक कार्य चल रहा हैं जिस में हमारा एक ही उद्देेश्य है संघीयता पर जोर देना ।

मनीष सुमन, महासचिव
राष्ट्रीय सद्भावना पार्टर्ीींघीयता पहचान के आधार पर होना चाहिये न कि भूगोल के आधार पर । कांग्रेस और एमाले भूगोल के आधार पर संघीयता लाएंगे तो हमारी पार्टर्ीीसका घोर विरोध जताती है । पार्टर्ीीहासचिव मनीष सुमन ने कहा, ‘कांग्रेस-एमाले का प्रस्ताव राजा महेन्द्र की नीति की पुनरावृत्ति है ।’ ऐसी संघीयता पर्ूव मंे रहे राजवंशी, सन्थाल, गन्गाई, ताजपुरीया, उराव जाति की पहचान और पश्चिम में राना थारू जाति का इतिहास मिटा देगी ।
हम संघीयता के मुद्दे पर कुछ लचकता अपनाए हुए हैं । तर्राई में दो प्रदेश होगा तो उस में पार्टर्ीीी भी सहमति है । जर्वदस्ती बहुमत के घमण्ड से संविधान लादने की कोशीश  की गई तो सद्भावना ने सदन से राजीनामा दे कर सडÞक संर्घष्ा करने की चेतावनी दी है । नेपाल के अन्तरिम संविधान २०६३ के द्वारा बने उच्चस्तरीय आयोग के अनुसार ११ प्रदेशीय संघीय संरचना होनी चाहिये । १२ सूत्रीय सम्झौता के तहत संघीयता और संविधान नहीं बना तो दर्ुभाग्यपर्ूण्ा होगा । सद्भावना पार्टर्ीीाद्र २६ गते से संंगठन निर्माण मे जुटी हर्ुइ है ।
यह क्रम कार्तिक मासान्त तक चलने की जानकारी है । मधेश के २२ जिले मंे इन्चार्ज का चयन किया गया है । अपने- अपने जिले में क्षेत्रीय सभा कर के संगठन विभाग भी बनाया गया है । संगठन के पर्र्ुनर्गठन, बैठक, वर्गीय मञ्च का काम भी आगे बढ रहा है । मार्गशर्ीष्ा १ गते काठमाडू मंे बैठक होगी और राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित केन्द्रीय नेतागण द्वारा  प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम है ।

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