राष्ट्रीय परिचय पत्र अनिवार्य नहीं करने का सर्वोच्च का अंतरिम आदेश
काठमांडू भादव ९ – सर्वोच्च अदालत ने अन्तरिम आदेश दिया है कि सामाजिक सुरक्षा भत्ता सहित सार्वजनिक सेवा लेने के लिए राष्ट्रीय परिचयपत्र को अनिवार्य करने का सरकार ने जो निर्णय किया है उसे तत्काल के लिए कार्यान्वयन नहीं किया जाए ।
न्यायाधीश डॉ.मनोजकुमार शर्मा और तिलप्रसाद श्रेष्ठ के इजलास में शुक्रवार को सामाजिक सुरक्षा भत्ता के लिए राष्ट्रीय परिचयपत्र अनिवार्य करने का सरकार के निर्णय को तत्काल के लिए लागू नहीं करने का आदेश दिया है ।
अधिवक्ता रामबहादुर रावल के साथ अन्य ने भी सर्वोच्च अदालत में रिट निवेदन दर्ता की थी कि –राष्ट्रीय परिचयपत्र जारी करने में सरकार देरी कर रही है । इसे अनिवार्य करने के कारण बहुत से जेष्ठ नागरिक सामाजिक सुरक्षा भत्ता से बंचित हो रहे हैं । सरकार ने सामाजिक सुरक्षा भत्ता लेने, मोबाइल के सिमकार्ड लेने और सभी सार्वजनिक सेवा लेने के लिए राष्ट्रीय परिचयपत्र अनिवार्य करने का निर्णय किया था । इससे पहले २४ जेठ २०८१ को मन्त्रिपरिषद् की बैठक के पहले चरण में २८ जिलों में सावन १ गते से सामाजिक सुरक्षा भत्ता नवीकरण के लिए राष्ट्रीय परिचयपत्र अनिवार्य करने का निर्णय किया था ।
बाद में विस्तार करने के लिए दूसरे चरण में १ माघ २०८१ से और ३८ जिलों में अनिवार्य करने का निर्णय किया गया था, तथा सावन १ गते २०८२ के बाद ७७ जिलों में सामाजिक सुरक्षा भत्ता लेने के लिए राष्ट्रीय परिचयपत्र अनिवार्य करने का निर्णय किया गया था ।

