दूसरे को नहीं बोलने देना भी एक तरह से हिंसा ही है– योगेश भट्टराई
काठमांडू, भादव १२ – नेकपा एमाले सांसद योगेश भट्टराई के ‘हिंसा’ शब्द प्रयोग करने को लेकर सदन में हंगामा मच गया । बुधवार को हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में भट्टराई ने ‘हिंसा’ शब्द का प्रयोग किया जिसके बाद नेकपा माओवादी ने आपत्ति जताई है ।
भट्टराई के बोलने के क्रम में ही माओवादी सांसद माधव सापकोटा ने आपत्ति जताई, जिसके बाद भट्टराई ने यह अभिव्यक्ती दी ‘हिंसा है, हिंसा है, हिंसा है’ ।
सापकोटा ने कहा कि हम नहीं मानते । इसपर भट्टराई ने कहा कि ‘यह हमारी परिभाषा है कोई माने या न माने फर्क नहीं पड़ता है ।’ सापकोटा ने कहा संविधान में हिंसा कहाँ कहा गया है ? इस प्रश्न के बाद ही माओवादी के अन्य सांसदों ने उठकर आपत्ति जताई थी ।
जबाव में भट्टराई ने कहा ‘दूसरे को नहीं बोलने देना भी एक तरह से हिंसा ही है । आपकी धमकी से कोई डरने वाला नहीं है । धमकी से नहीं हिंसा से डर लगता है ।’ इसके पश्चात जब और भी माओवादियों ने मुद्दा उठाया तो माओवादी सांसद देवेन्द्र पौडेल ने शांति प्रक्रिया को कमजोर करने की बात कहते हुए इन शब्दों को रिकॉड से हटाने की मांग की ।


